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23. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_5.26–6.02

Authored by Abhay Ram Das

Religious Studies

University

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23. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_5.26–6.02
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2.

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कृपया यहाँ पर अपना मोबाईल नं0 लिखें ।

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4.

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कृपया यहाँ पर अपना पता लिखें ।

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5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

निम्न में से किस व्यक्ति की मुक्ति सुनिश्चित नहीं होती है ?

स्वरूपसिद्ध एवं आत्मसंयमी व्यक्ति ।

क्रोध तथा कामेच्छाओं में लिप्त व्यक्ति ।

संसिद्धि के लिए प्रयासरत व्यक्ति ।

अपने गुरु की आज्ञा का पालन करने वाला व्यक्ति ।

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

संसिद्धि से आपका क्या अभिप्राय है ?

मनुष्य जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य अर्थात् भगवत्प्रेम प्राप्ति संसिद्धि कहलाती है ।

जीवात्मा की बद्धावस्था की तुलना में मुक्तावस्था संसिद्धि कहलाती है।

जीवात्मा का कृष्णभावनामृत को अंगीकार करना संसिद्धि कहलाता है ।

मनुष्य की अन्यों के प्रति दयालुता संसिद्धि कहलाती है ।

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

3 mins • 1 pt

मोक्ष के लिए सतत प्रयत्नशील रहने वाले साधु पुरुषों में कृष्णभावनाभावित व्यक्ति सर्वश्रेष्ठ होता है । ऐसा क्यों ? स्पष्ट करें ।

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति को परमसत्य विषयक ज्ञान होता है । अतः वह परमसत्य से योग के लिए प्रत्यक्ष मार्ग अर्थात् कृष्णभावनामृत का अनुशीलन करता है ।

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति अपने नियत कर्मों का परित्याग नहीं करता, अपितु अपने नियत कर्मों को परमसत्य से योग के लिए साधन के रूप में क्रियान्वित करता है ।

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति इंद्रियभोग की इच्छाओं का कृत्रिम दमन नहीं करता, अपितु अपनी इच्छाओं को कृष्ण की तुष्टि अथवा प्रसन्नता मे अभिनिविष्ट करके, उनकी गुणवत्ता को भौतिकता से आध्यात्मिकता में परिवर्तित कर, कृष्णभावनामृत के पथ पर निरंतर अग्रसर होता है ।

यह सभी कथन कृष्णभावनाभावित व्यक्ति की स्थिति को स्पष्ट करते हैं ।

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