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Bhagavad Gita As It Is DAY-23 (5.18-26)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-23 (5.18-26)
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

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विनम्र साधुपुरुष एक विनीत ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ता तथा चाण्डाल को समान दृष्टि (समभाव) से क्यों देखते हैं? (5.18)

इसका कारण परमेश्वर से उनका सम्बन्ध है जो सबके हृदय में स्थित है तथा सभी शरीरों में सचेतन है

क्योंकि एक ही आत्मा उन सब भिन्न शरीरों में स्थित है जो हर शरीर की पीड़ा का अनुभव कर सकती है

2.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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मानसिक समता वाले व्यक्ति के विषय में भगवान् ने क्या बताया है? (5.19)

आत्म-साक्षात्कार का लक्षण है

जन्म तथा मृत्यु पर, विजय प्राप्त किए हुए मानना चाहिए

बद्धजीव माना जाता है

वैकुण्ठ जाने का अधिकारी हो जाता है

आसक्ति अथवा घृणा से रहित होने के कारण निर्दोष होता है

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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स्वरूपसिद्ध व्यक्ति के क्या लक्षण होते हैं? (5.20)

वह शरीर और आत्मतत्त्व में कोई अंतर नहीं मानता

वह भलीभाँति जानता है कि मैं यह शरीर ही हूँ

कुछ प्राप्त होने पर अत्यंत प्रसन्न होता है

शरीर की कुछ हानि होने पर तुरंत शोकमग्न होता है

वह ब्रह्म, परमात्मा तथा भगवान् के ज्ञान को जानता है

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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मुक्त पुरुष भौतिक इन्द्रियसुख की ओर आकृष्ट न होकर, सदैव समाधि में रहकर ______ (5.21)

अत्यंत दुखी रहता है

काम-सुख के बारे में सोचता रहता है

नित्य नवीन कष्टों/अभावों का अनुभव करता है

परब्रह्म में एकाग्रचित्त होने के कारण असीम सुख भोगता है

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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भौतिक इन्द्रियों के संसर्ग से इतना आनंद मिलता है, ये कृष्णभावनाभावित व्यक्ति भला इसमें क्यों रूचि नहीं लेता, ऐसा उसे क्या मिल जाता है? (5.22)

भौतिक इन्द्रियसुख नाशवान हैं क्योंकि शरीर ही नाशवान है

बुद्धिमान् मुक्तात्मा किसी नाशवान वस्तु में रूचि नहीं रखता

भौतिकसुख के प्रति जितना आसक्त, उतने अधिक दुख

सूकरों-कूकरों का रमणीय सुख हर किसी के भाग्य में कहाँ

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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भगवान् की प्रेमाभक्ति (आत्मसाक्षात्कार) और इन्द्रियसुख (कामसुख) के साथ साथ चलने में क्या दिक्कत है? (5.21)

महान भक्त श्री यामुनाचार्य ने कहा है कि मैं काम-सुख के विचार पर ही थूकता हूँ और मेरे होंठ अरुचि से सिमट जाते हैं

कृष्णभावनाभावित व्यक्ति प्रेमाभक्ति में इतना अधिक लीन रहता है कि इन्द्रियसुख में तनिक रूचि नहीं लेता

भौतिकता की दृष्टि में कामसुख ही सर्वोपरि आनन्द है और भौतिकतावादी लोग इसके बिना कोई कार्य कर नहीं सकते

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

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इनमें से किस श्लोक में कहा गया है कि परम सत्य को राम कहा जाता है? (5.22)

ये हि संस्पर्शजा भोगा दु:खयोनय एव ते |

आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः || (5.22)

रमन्ते योगिनोऽनन्ते सत्यानन्दे चिदात्मनि |

इति रामपदेनासौ परं ब्रह्माभिधीयते || (पद्मपुराण)

(SB 5.5.1) नायं देहो देहभाजां नृलोके कष्टान् कामानर्हते विड्भुजां ये |

तपो दिव्यं पुत्रका येन सत्त्वं शुद्धयेद् यस्माद् ब्रह्मसौख्यं त्वनन्तम् ||

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