
32. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_7.17–7.23
Authored by Abhay Ram Das
Religious Studies
University
Used 5+ times

AI Actions
Add similar questions
Adjust reading levels
Convert to real-world scenario
Translate activity
More...
Content View
Student View
52 questions
Show all answers
1.
OPEN ENDED QUESTION
1 min • Ungraded
कृपया यहाँ पर अपना नाम लिखें ।
Evaluate responses using AI:
OFF
2.
OPEN ENDED QUESTION
30 sec • Ungraded
कृपया यहाँ पर अपनी आयु लिखें ।
Evaluate responses using AI:
OFF
3.
OPEN ENDED QUESTION
1 min • Ungraded
कृपया यहाँ पर अपना मोबाईल नं0 लिखें ।
Evaluate responses using AI:
OFF
4.
OPEN ENDED QUESTION
2 mins • Ungraded
कृपया यहाँ पर अपना पता लिखें ।
Evaluate responses using AI:
OFF
5.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
भगवान् श्रीकृष्ण को आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी तथा ज्ञानी में से कौन अत्यंत प्रिय है ?
इन सभी में जो परमज्ञानी होता है और भगवान् की शुद्धभक्ति में लगा रहता है ।
इन सभी में जो आर्त है और भगवान् की शुद्धभक्ति में लगा रहता है ।
इन सभी में जो ज्ञानी है और भगवान् की शुद्धभक्ति में लगा रहता है ।
यह सभी भगवान् श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं क्योंकि यह सभी उनकी शरण ग्रहण करते हैं ।
6.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
"मेरा यह भौतिक शरीर मुझ आत्मा से भिन्न है ।" मनुष्य को ऐसी अनुभूति कब होती है ? आध्यात्मिक पथ पर यह अवस्था क्या कहलाती है ?
ज्ञान की खोज करते हुए मनुष्य को ऐसी अनुभूति होती है । आध्यात्मिक पथ पर यह अवस्था प्रारंभिक होती है ।
ब्रह्मा की खोज करते हुए मनुष्य को ऐसी अनुभूति होती है । आध्यात्मिक पथ पर यह उन्नत अवस्था होती है ।
अर्थ प्राप्ति हेतु प्रयासरत मनुष्य को ऐसी अनुभूति होती है । आध्यात्मिक पथ पर यह उन्नत अवस्था होती है ।
जीवन के रहस्य की जिज्ञासा को शान्त करने में प्रयासरत मनुष्य को ऐसी अनुभूति होती है । आध्यात्मिक पथ पर यह अति उन्नत अवस्था कहलाती है ।
7.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
2 mins • 1 pt
जीवात्मा को ईश्वर के साथ नित्य दास के रूप में अपनी स्वाभाविक स्थिति की अनुभूति कब होती है ?
जब जीवात्मा भौतिक इच्छाओं के समस्त कल्मष मुक्त होकर शुद्धभक्त बन जाता है ।
जब जीवात्मा एक भौतिक देह से देहान्तरण कर दूसरी भौतिक देह को प्राप्त करता है ।
जब जीवात्मा भौतिक जगत् से मुक्त होकर आध्यात्मिक जगत् में प्रवेश करता है ।
जब जीवात्मा अपने समस्त भौतिक कर्तव्यों से विमुक्त होकर जीवन के अंतिम पड़ाव अर्थात् मरणावस्था में होता है ।
Access all questions and much more by creating a free account
Create resources
Host any resource
Get auto-graded reports

Continue with Google

Continue with Email

Continue with Microsoft
or continue with
%20(1).png)
Apple
Others
Already have an account?