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Bhagavad Gita As It Is DAY-69 (18.59-68)

Authored by Keśava Kṛṣṇa Dāsa

Life Skills, Philosophy, Special Education

KG - Professional Development

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Bhagavad Gita As It Is DAY-69 (18.59-68)
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1.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

कर्म करने के लिए सर्वोत्तम मार्ग क्या है जिससे सभी परिस्थियों में सुरक्षित रहा जा सके? (18.59)

परमेश्वर से निर्देश प्राप्त करके कर्म किया जाय क्योंकि कोई भी अपने भाग्य का निर्णय नहीं कर सकता

भगवान् या भगवान् के प्रतिनिधि स्वरूप गुरु के आदेश की वह कभी उपेक्षा न करे

भगवान् के आदेश को बिना किसी हिचक के पूरा करने के लिए वह कर्म करे

2.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

अर्जुन द्वारा युद्ध में प्रवृत्त नहीं होने के निर्णय में क्या गलत था? (18.59)

वह क्षत्रिय स्वभाव लेकर जन्मा था अतः उसे अपने स्वभाव वश युद्ध में लगना ही पड़ेगा

मिथ्या अहंकारवश वह डर रहा था कि अपने गुरु, पितामह तथा मित्रों का वध करके वह पाप का भागी होगा

वह अपने को अपने कर्मों का स्वामी जान रहा था, भूल गया कि साक्षात् भगवान् उसे युद्ध करने का आदेश दे रहे हैं

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

भगवान् ने किन शब्दों में बताया कि अर्जुन को अपने क्षत्रिय स्वभाववश युद्ध में लगना ही पड़ेगा? (18.59)

यदहङ्कारमाश्रित्य

न योत्स्य इति मन्यसे

मिथ्यैष व्यवसायस्ते

प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

5 mins • 1 pt

भगवान् ने किन शब्दों में अर्जुन को कहा - "बाध्य होकर वही सब करोगे"? (18.60)

स्वभावजेन कौन्तेय

निबद्धः स्वेन कर्मणा

कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्

करिष्यस्यवशोऽपि तत्

5.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

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इनमें से क्या सही है? (18.60)

प्रत्येक व्यक्ति प्रकृति के गुणों के विशेष संयोग के वशीभूत है और तदानुसार कर्म करता है

जो स्वेच्छा से परमेश्वर के निर्देशानुसार कार्यरत रहता है, तो वह प्रकृति के गुणों द्वारा कर्म करने के लिए बाध्य होता है

जो परमेश्वर के निर्देशानुसार कर्म करने से मना करता है, वही गौरवान्वित होता है

6.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

शरीर-परिवर्तन होते ही जीव तो अपने विगत कर्मों को भूल जाता है, फिर अगले शरीर में वो संचित इच्छाओं के अनुसार भोग कैसे कर पाता है? (18.61)

शरीर समाप्त, इच्छाएं समाप्त, अब नए शरीर में फिर से नया जीवन बिलकुल खाली पन्ने से शुरू होता है

परमात्मा उसके समस्त कार्यों का साक्षी रहता है, अतएव जीवों के सभी कार्यों का संचालन उन्हीं के द्वारा होता है

परमात्मा के आदेश से प्रकृति विशेष शरीर प्रदान करती है, ताकि जीव अपनी पूर्व इच्छाओं के अनुसार कर्म कर सके

7.

MULTIPLE SELECT QUESTION

5 mins • 1 pt

Media Image

एक जीवात्मा के विषय में क्या सही है? (18.61)

जीवात्मा (व्यक्ति) ही सर्वेसर्वा नहीं है

व्यक्ति तो सदैव भगवान् के नियन्त्रण में रहता है

जीव का कर्तव्य है कि वह शरणागत हो

जीव जितना योग्य होता है उतना ही पाता है

जीव भूत, वर्तमान तथा भविष्य का ज्ञाता है

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