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62. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_14.20-14.27

Authored by Abhay Ram Das

Religious Studies

University

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62. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप_प्रश्नोत्तरी श्रृंखला_14.20-14.27
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1.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

कोई प्रकृति के 3 गुणों के प्रभाव से मुक्त कैसे हो सकता है?

स्वच्छता का पालन करने से

आध्यात्मिक ज्ञान की उन्नति से

परोपकारी कार्य करने से

3 गुणों के प्रभाव से ध्यान पूर्वक बचते हुए कार्य करने से

2.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

जब तक जीव 3 गुणो में होता है तब तक ________ से जूझता है ?

जन्म, मृत्यु, जरा, व्याधि:

आदिभौतिक, आदिदैविक तथा आध्यात्मिक कल्मषो से

भौतिक कल्मषों एवं समस्या से

उपर्युक्त सभी

3.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

निम्नलिखित में से कौन सा प्रश्न अर्जुन द्वारा श्लोक 14.21 में नहीं पूछा जा रहा है?

जो इन तीनों गुणों से परे है, वह किन लक्षणों के द्वारा जाना जाता है

जो इन तीनों गुणों से परे है, उसका आचरण कैसा होता है

जो इन तीनों गुणों से परे है, वह प्रकृति के गुणों को किस प्रकार लाँघता है

अर्जुन ने उपरोक्त सभी प्रश्नों को श्लोक 14.21 के अंतर्गत रखा है

4.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

देहात्मबुद्धि से निकलने के लिए भगवान किस विधि का पालन करने की सलाह दे रहे हैं?

भक्ति में लगकर विधि विधानो का पालन करने की

अनासक्त रहकर निर्विशेष का ध्यान करने की

एकांत में रहकर परमात्मा का ध्यान करने की

कृष्ण किसी भी तरीके को अपनाने का सुझाव दे रहे हैं लेकिन कठोरता से पालन करने के लिए कह रहे हैं

5.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

यदि कोई भक्त भक्ति के सिद्धांतों का बहुत गंभीरता से पालन कर रहा है, लेकिन साथ ही इसका श्रेय खुद को देता है और उसका पालन करने में गर्व महसूस करता है, तो क्या हम उसे भौतिक संदूषण से ऐवम 3 गुणों के पाश से मुक्त मान सकते हैं?

जी हां, गीता में पहले कहा गया है ऐसे पुरुष को साधु मानो और ऐसा साधु मुक्त अवस्था में होता है

नहीं, उपरोक्त कथन स्वयं एक उत्तर है कि अभ्यास करने वाला भक्त अभी 3 गुणों के पाश में है

ऐसे भक्त को शुद्ध सतोगुण में प्रवेश करने वाला माना जा सकता है

A और C दोनो सही है

6.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

चेतना __________ में स्थानान्तरित कर देने से इंद्रात्रिपति स्वत: रुक जाती है?

कृष्ण

टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले आध्यात्मिक कार्यक्रम

देवी देवता की सेवा

वृद्धों और जरूरतमंदों की सेवा

7.

MULTIPLE CHOICE QUESTION

2 mins • 1 pt

निम्नलिखित में से किसका प्रयोग प्रभुपाद द्वारा दिव्य पद पर आसीन  व्यक्ति का वर्णन करने के लिए नहीं किया गया है?

वह मान तथा अपमान से प्रभावित होता है

कृष्णभावनामृत में रहकर अपना कर्तव्य निभाता है और इसकी चिन्ता नहीं करता कि कोई व्यक्ति उसका सम्मान करता है या अपमान

उसे किसी भौतिक वस्तु की आवश्यकता नहीं रहती, चाहे वह पत्थर हो या सोना |

वह शत्रु से भी घृणा नहीं करता

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