
Chapter 2 भारतीय संविधान में अधिकर【LIVE🔴】
Authored by Manish Kumar
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1.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 5 pts
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये।
1. लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर सरकार धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा सकती है।
2. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सीमित है अर्थात् सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिये सरकार इन पर प्रतिबंध लगा सकती है।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Answer explanation
व्याख्याः दिये गए दोनों कथन सत्य हैं। लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर सरकार धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा सकती है, क्योंकि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है। सामाज में व्याप्त बुराईयों-मानव बलि, सती प्रथा, बाल विवाह व बहु विवाह जैसी कुरीतियों पर प्रहार करने हेतु अनेक कदम उठाए गए हैं। सरकार द्वारा/विधि द्वारा उठाए गए इन कदमों को स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। संविधान ने सभी को अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने की स्वतंत्रता दी है। संविधान धर्मांतरण भय व लालच दिखाकर या जबरन धर्म परिवर्तित कराने की इजाज़त नहीं देता है। संविधान हमें केवल अपने धर्म की सूचनाओं का प्रसार करने की स्वतंत्रता देता है जिससे लोग स्वतः उसकी ओर आकर्षित हो एवं उसका अन्तःकरण कर सकें।
2.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 5 pts
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. न्यायालय ने सम्पत्ति के अधिकार को संविधान के मूल ढाँचे का तत्व माना है।
2. 44वें संशोधन 1978 में सम्पत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से निकालकर अनुच्छेद 300 (A) के अन्तर्गत सामान्य कानूनी अधिकार बना दिया गया।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Answer explanation
व्याख्याः 1973 में न्यायालय ने अपने निर्णय में सम्पत्ति के अधिकार को ‘संविधान के मूल ढाँचे’ का तत्व नहीं माना और कहा कि संसद को संविधान का संशोधन करने का अधिकार है। 1978 में 44वें संविधान संशोधन के द्वारा सम्पत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से निकालकर संविधान के अनुच्छेद 300 (A) के अन्तर्गत सामान्य कानूनी अधिकार बना दिया।
3.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 5 pts
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. संसद संविधान के किसी भी अंश या प्रावधान में संशोधन कर सकती है।
2. न्यायालय ने संविधान की मूल-ढाँचागत विशेषताओं का सिद्धान्त केशवानन्द भारती मुकदमें के अपने निर्णय में दिया था।
उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Answer explanation
व्याख्याः केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य वाद, 1973 में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि संसद को संविधान के किसी अंश या प्रावधान में संशोधन करने की शक्ति है; किंतु संविधान के मूल-ढाँचे में संशोधन नहीं कर सकती।
संविधान के मूल ढाँचे का सिद्धांत सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य वाद, 1973 में पहली बार दिया।
संविधान की मूल ढाँचा के सिद्धांत को मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ वाद, 1980 में सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः दोहराया।
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि न्यायालय समय-समय पर बतलाएगा कि संविधान की मूल ढाँचा कौन-कौन हैं।
4.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 5 pts
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
1. मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्व दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
2. मौलिक अधिकार सरकार के लिये आदेशात्मक होते हैं वहीं नीति-निर्देशक तत्व केवल निर्देशात्मक होते हैं।
3. मौलिक अधिकार खास तौर पर व्यक्ति के अधिकारों को संरक्षित करते हैं, जबकि नीति-निर्देशक तत्व पूरे समाज की हित की बात करते हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
उपरोक्त सभी
Answer explanation
व्याख्याः दिये गए सभी कथन सत्य हैं। मूल अधिकार और राज्य के नीति-निदेशक तत्त्वों के बीच वरीयता को लेकर संसद एवं न्यायपालिका के बीच एक लम्बा संघर्ष चला। केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य, 1973 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि मूल अधिकार और राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत एक-दूसरे का पूरक हैं। मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ, 1980 में भी सर्वोच्च न्यायालय ने इसे पुनः दोहराया किया।
मूल अधिकारों के उल्लंघन या हनन पर सर्वोच्च या उच्च न्यायालय रिट निकालकर सरकार को आदेश देता है, जबकि राज्य के नीति निदेशक तत्त्व सरकार के लिये निर्देश हैं कि इनके प्रावधानों को लागू करे, क्योंकि इसके पीछे जनता की नैतिक शक्ति है।
मूल अधिकार का संबंध व्यक्ति के अधिकारों के संरक्षण से है, जबकि नीति-निदेशक तत्त्वों का संबंध समाज के हितों के संरक्षण से है।
5.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 5 pts
भारत में नागरिकों के मौलिक कर्त्तव्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये-
1. इनको संविधान में 42वें संशोधन 1976, के माध्यम से जोड़ा गया था।
2. इनको लागू करने के संबंध में संविधान मौन है।
3. मौलिक कर्त्तव्यों के अनुपालन के आधार पर या उनकी शर्त पर संविधान हमें मौलिक अधिकार नहीं देता।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
केवल 1
केवल 2
केवल 2 और 3
उपरोक्त सभी
Answer explanation
व्याख्याः मौलिक कर्त्तव्यों के संबंध में दिये गए तीनों कथन सत्य हैं। इनमें संविधान का पालन करना, देश की रक्षा करना, सभी नागरिकों में आपसी भाईचारे को बढ़ाने हेतु प्रयत्न तथा पर्यावरण की रक्षा करने संबंधी कर्तव्यों को शामिल किया गया है।
42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा संविधान में भाग-4(क) और अनुच्छेद-51(क) जोड़ा गया। इसमें 10 मूल कर्त्तव्यों को शामिल किया गया, किन्तु 11वें मूल कर्त्तव्य को 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा को जोड़ा गया। वर्तमान में कुल 11 मूल-कर्त्तव्य हैं।
भारत के संविधान में मूल कर्त्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति के सिफारिशों के आधार पर शामिल किया गया।
6.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 5 pts
निम्नलिखित में से किन-किन अधिकारों के सबंध में न्यायालय में दावा नहीं किया जा सकता है?
1. महिलाओं और पुरुषों को समान काम हेतु समान मजदूरी देने के लिये।
2. आर्थिक शोषण के विरुद्ध।
3. काम की उपलब्धता के लिये।
4. 6 वर्ष से कम आयु के बालकों के लिये प्रारम्भिक बाल्यावस्था में देख-रेख और शिक्षा सुविधा देने हेतु।
5. सुविधापूर्ण जीवन यापन हेतु।
केवल 1, 3 और 5
केवल 1, 4 और 5
केवल 1, 3, 4 और 5
उपरोक्त सभी।
Answer explanation
व्याख्याः दिये गए सभी विकल्प राज्य के नीति-निर्देशक तत्त्वों में शामिल हैं। नीति निर्देशक तत्त्वों में शामिल किसी भी अधिकार को लागू करने हेतु न्यायालय में दावा नहीं किया जा सकता। इनके लागू करने संबंधी अधिकार को राज्य सरकारों के विवेक पर छोड़ा गया है।
7.
MULTIPLE CHOICE QUESTION
30 sec • 5 pts
राज्य की नीति-निदेशक तत्वों की नीतियों में कौन-कौन शामिल हैं?
1. समान नागरिक संहिता
2. मद्यपान निषेध
3. घरेलू उद्योगों को बढ़ावा
4. पशुओं को मारने पर रोक
5.ग्राम पंचायतों के गठन को प्रोत्साहन
कूटः
केवल 1, 2 और 4
केवल 2, 4 और 5
केवल 2 और 5
उपरोक्त सभी।
Answer explanation
व्याख्याः दिये गए सभी विकल्प नीति-निर्देशक तत्वों की नीतियों में शामिल हैं।
समान नागरिक संहिता : अनुच्छेद-44
मद्यपान निषेध : अनुच्छेद-47
घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना (कुटीर) : अनुच्छेद-43
पशुओं का वध करने पर रोक : अनुच्छेद-48
ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन देना : अनुच्छेद-40
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