Worksheetsबाल गोबिन भगत
Total questions: 20
Worksheet time: 10mins
बालगोबिन भगत पाठ लिखा है
दिनकर ने
निराला ने
रामवृक्ष बेनीपुरी ने
कह नहीं सकते।
बालगोबिन भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी क्योंकि
वह जानती थी कि भगत जी संसार में अकेले हो गए हैं
वे अकेले अपने खाने पीने और स्वास्थ्य की ओर ध्यान नहीं दे पाएंगे
उनका भोजन कौन बनाएगा,बीमार पड़ने पर उनकी देखभाल कौन करेगा।।
ये सब कारण सही हैं।
बालगोबिन भगत की मृत्यु के विषय में मान्यता थी कि
मौत दुख का कारण ना होकर उत्सव का दिन है
मृत्यु वह स्तिथि है जब आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है
यह विरहनि का अपने प्रिय से मिलने का दिन है।
ये सब।
बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा थी क्योंकि
बालगोबिन भगत अपने सिर पर कबीर पंथी टोपी पहनते थे।
कबीर के बताए आदर्शों पर चलते थे।
कबीर के पद गाय करते थे।
ये सब।
बालगोबिन भगत गृहस्थ होने के बावजूद भी साधु थे क्योंकि
बालगोबिन का रहन सहन वेशभूषा बहुत ही सरल थी।
उनमें दिखावा नहीं था।
वे किसी दूसरे की चीज को बिना पूछे व्यवहार में नहीं लाते थे।
ये सभी।
भगत पतोहू की दूसरी शादी करवाना चाहते थे क्योंकि
भगत जी विधवा विवाह के समर्थक थे
उन्हें शादी करवाने का बहुत शौक था
वे पतोहु कि पहली शादी से खुश नहीं थे।
कुछ कह नहीं सकते।
पतोहू भगत के चरणों में ही रहना चाहती थी क्योंकि
बालगोबिन भगत के चरण बहुत कोमल थे।
भगत के अलावा उसका कोई सहारा नहीं था
उसे अपने पति का घर छोड़कर जाने की इच्छा नहीं थी
पतोहू भगत जी की सेवा और उनकी देखभाल करना चाहती थी।
अपने बेटे की मृत्यु पर बालगोबिन भगत ने इनमें से क्या नहीं किया
मृतक बेटे को सफेद कपड़े से ढंक दिया।
फूल और तुलसी के पत्ते डाल दिए , सिर के सामने चिराग जलाकर रख दिया।
जोर जोर से रोने लगे
यह समय आत्मा परमात्मा के मिलन का है।
बाल गोबिन भगत के व्यक्तित्व और वेशभूषा के बारे में दी गई बातों में से क्या सही नहीं है
उनके सिर के बाल पके थे
उनका रंग गोरा था
अक्सर एक लुंगी पहने रहते थे
वे स्वाभिमानी होने के साथ ही बहुत विनम्र भी थे।
भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे ,यह इससे पता चलता है कि उन्होंने
पतोहू की दूसरी शादी करवा दी।
वे मृत्यु को आत्मा से परमात्मा के मिलन का समय समझते थे
मृत्यु पर रोने की बजाय उत्सव मानने को कहते थे
ये सभी
भगत की पुत्रवधू
बहुत ही सुंदर और सुशील कन्या थी
ने पूरे घर का प्रबंधन अपने हाथों में ले रखा था
अपने ससुर भगत जी को दुनियादारी के कामों से मुक्त कर रखा था
ये सब
तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफ़िर जाग जरा का अर्थ पाठ के आधार पर होगा
हे मुसाफ़िर उठो गठरी में चोर लग गया है
हे मुसाफ़िर उठो गठरी अब चोरी हो जायेगी
हे मनुष्य तेरी जीवन रूपी गठरी को मृत्यु रूपी चोर चुरा रहा है,प्रभु का नाम ले।
ये प्रश्न बहुत मुश्किल है कोई और पूछो।
संझा का अर्थ क्या है?
सभा
मंडली
संध्या
सांझा संगीत
तूल न देना का आशय है
बढ़ चढ़कर काम न करना
परंपराओं का पूर्ण पालन करना
सामान्य भाव से कार्य करना
कार्य का बखान न करना
बालगोबिन भगत की मृत्यु तब हुई जब वे
खाना खा रहे थे
हर बार की तरह गंगा स्नान को गए थे।
खेती कर रहे थे
कुछ कह नहीं सकते।
पतोहू का अर्थ होगा
पुत्र की स्त्री
पुत्र वधू
बहू
ये सभी।
बालगोबिन भगत की प्रभातिया शुरू होती थीं
भादो के महीने में
कातिक के महीने में
आसाढ़ के महीने में
कुछ कह नहीं सकते।
बाल गोबिन भगत की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष उस दिन देखा गया जिस दिन
उन्होंने गंगा स्नान किया
जिस दिन उन्होंने गाना गाया
जिस दिन उनका इकलौता बेटा मरा
कह नहीं सकते किस दिन
श्राद्ध की अवधि पूर्ण होने पर भगत ने क्या किया?
मुक्ति के लिए गंगा स्नान को चले गए
घर छोड़कर जाने की तैयारी कर ली।
पुत्रवधू को घर की सारी जिम्मेदारी सौंप दी।
दूसरी शादी के लिए पुत्रवधू को उसके भाई के साथ भेज दिया।
बालगोबिन भगत के बारे में क्या सही नहीं है
जब जाडा आता तो एक काली कमली ओढ़ लेते।
गले में तुलसी की जड़ों की माला बांधे रहते
किसी से दो टूक बात करने में संकोच करते थे
जो कुछ खेत में पैदा होता पहले उसे कबीर साहब के दरबार में ले जाते थे।
