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Worksheetsसमयसार गाथा १-५
Total questions: 30
Worksheet time: 15mins
कलश १ में नमस्कार का अर्थ क्या है ?
पहिचानना
जानना
रमना
ऊपर के सभी
कलश १ में समय शब्द का अर्थ क्या होता है ?
अरिहंत
सिद्ध
सर्वपदार्थ
शुधात्मा
कलश २ के अनुसार सरस्वती की मूर्ति कैसी होती है ?
सफ़ेद रंग की
सम्यकदर्शन की
सम्यकज्ञान की
लक्ष्मी जैसी
कलश २ के आधार से प्रत्यगात्मा कैसा है
परवस्तुओ से भिन्न
परवस्तुओ के निमित्त से उत्पन्न भावो से भिन्न
कर्मो से भिन्न
ऊपर के सबसे भिन्न
कलश ३ के अनुसार किसके फल में केवलज्ञान उत्पन्न होता है ?
देवदर्शन से
शास्त्र रचना से
मोह के नाश से
परम विशुद्धि से
गाथा १ के अनुसार आचार्य कुंद-कुंददेव सिद्धो की स्थापना कैसे की है ?
पूजन से
मंगलाचरण से
स्तुति से
द्रव्य-भाव स्तुति से
गाथा १ के अनुसार आचार्य कुंद-कुंददेव ने सिद्धो की गति को कैसा बताया है ?
ध्रुव, अचल और अप्रतिम
ध्रुव और अचल
ध्रुव और अनुपम
ध्रुव, अचल और अनुपम
गाथा १ के अनुसार आचार्य कुंद-कुंददेव ने समयसार ग्रन्थ की प्रमाणिकता कैसे सिद्ध करते है ?
जिनेन्द्र प्रणीत
श्रुत द्वारा प्रकाशित
श्रुतकेवलियो द्वारा कथित
•सर्व पदार्थो का और शुद्धात्मा का प्रकाशक
सभी के द्वारा
गाथा १ के अनुसार आचार्य कुंद-कुंददेव ने समयसार ग्रन्थ की रचना द्वादशांग जिनवाणी के कीस आधार पर की ?
चौदह पूर्व में से ज्ञानप्रवाद नामका पांचवा पूर्व +१० वे वस्तु अधिकार + समय नामक प्राभ्रुत
चौदह पूर्व में से ज्ञानप्रवाद नामका छटवा पूर्व +१२ वे वस्तु अधिकार + समय नामक प्राभ्रुत
चौदह पूर्व में से ज्ञानप्रवाद नामका तीसरा पूर्व +१० वे वस्तु अधिकार + समय नामक प्राभ्रुत
चौदह पूर्व में से ज्ञानप्रवाद नामका पांचवा पूर्व +११ वे वस्तु अधिकार + समय नामक प्राभ्रुत
गाथा २ के अनुसार आचार्य कुंद-कुंददेव स्वसमय की परिभाशा में किसमे स्थित होने को स्वसमय कहते है
ज्ञान में
दर्शन में
ज्ञान-दर्शन में
दर्शन-ज्ञान स्वभावी आत्मा में
गाथा २ के अनुसार आचार्य कुंद-कुंददेव के स्वसमय की परिभाशा में कौनसे गुणस्थान आते है ?
४ से १२
१३-१४
७ से सिद्ध
४ से सिद्ध
गाथा २ के अनुसार आचार्य कुंद-कुंददेव परसमय को कहा स्थित कहते है ?
a मोह-राग-द्वेष भावो में
b कर्म पुगल के प्रदेशो में
a और b दोनों
a और b दोनों भी नहीं
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा २ के अनुसार इनमे से कोनसा तथ्य सही नहीं है ?
स्वसमय उपादेय है
परसमय हेय है
समयसार उपादेय है
समय उपादेय है
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ३ के अनुसार के सुन्दर कौन है ?
जीव
अरिहंत
सिद्ध
एकत्व को प्राप्त प्रत्येक द्रव्य
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ३ के अनुसार कौनसी कथा विसंवाद उत्पन्न करती है ?
जैन-अजैन कथा
२० पंथ - १३ पंथ कथा
एकत्व-विभक्त कथा
बंध कथा
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ३ के अनुसार अगर सर्व पदार्थ अपने अपने स्वरुप में स्थित नहीं होते तो कौनसा दोष खड़ा होता ?
सर्व-विनाश दोष
एकांत दोष
सर्वसंकर दोष
वस्तु लोप दोष
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ३ के अनुसार सुन्दरता कौन खंडित करते है ?
वृद्धपना
रोग
मोह-राग द्वेष
बंध-मिलावट की बात
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ३ के अनुसार समय की परिभाषा में इनमे से कौनसी बात सही नहीं है ?
समय अपने-अपने गुण-पर्यायो को प्राप्त होता है
समय का अर्थ जिव, अजीव, पुद्गल, धर्म, अधर्म, आकाश, और काल
समय अपने अनंत धर्मो चक्र को चुम्बन करते है, एक दुसरे को स्पर्श नहीं करते
एक क्षेत्रावगाहरूप से तिष्ठ रहे है
एक दुसरे कार्य में सहायता करते है
आचार्य कुंद-कुंददेव के समयसार गाथा ३ और आचार्य जयसेन की तात्पर्य वृत्ति टिका के अनुसार सुन्दर कौन है ?
एकत्व निश्चय को प्राप्त होने वाले सभी पदार्थ
सर्व जिव
सम्यकदृष्टी जिव
निश्चयरत्नत्रयपरिणत जिव
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ४ के अनुसार "काम" का अर्थ क्या है ?
स्पर्शन + रसना
स्पर्शन + घ्राण
रस + गंध
स्पर्श + गंध
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ४ के अनुसार कौनसी कथा बहोत बार सुनी है
काम + बंध कथा
काम + भोग कथा
भोग + बंध कथा
काम + भोग + बंध कथा
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ४ के अनुसार काम आदि की कथा क्या की है ?
सुनी है
समझी है
परिचय किया है
अनुभव किया है
सभी
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ४ के अनुसार कौनसी कथा कभी नहीं सुनी?
एकत्व आत्मा की
विभक्त आत्मा की
आत्मा की
एकत्व-विभक्त आत्मा की
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ४ के अनुसार एकत्व विभक्त आत्मा की चर्चा
ना सुनी है
ना परिचय हुआ
ना ही अनुभव किया
सभी
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ४ के अनुसार एकत्व विभक्त आत्मा चर्चा-वार्ता दुर्लभ क्यों है
पुण्य-पाप की चर्चा-वार्ता करता है
गुणस्थानादि की चर्चा करता है
बाह्याचार पालकर अपने को धर्मात्मा मान लेता है
सभी
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ५ के अनुसार वैभव का क्रम कैसा ?
आगम का सेवन, युक्ति का अवलम्बन, गुरुके उपदेश, स्वसंवेदन
युक्ति का अवलम्बन, आगम का सेवन, गुरुके उपदेश, स्वसंवेदन
आगम का सेवन, गुरुके उपदेश, युक्ति का अवलम्बन, स्वसंवेदन
आगम का सेवन, गुरुके उपदेश, स्वसंवेदन , युक्ति का अवलम्बन
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ५ के अनुसार एकत्व-विभक्त आत्मा की बात कैसे स्वीकारना ?
सुनकर ही
युक्ति से
समयसार ग्रन्थ से
अनुभव से ही स्वीकारना है
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ५ के अनुसार क्या मत ग्रहण करो यह कह रहे है
मोह
व्याकरण
छल
भ्रम
आचार्य कुंद-कुंददेव की समयसार गाथा ५ मे किस बात कि प्रतिज्ञा क़रते हैं
अनुभव
आगम अभ्यास
रत्नत्रय
एकत्व-विभक्त आत्मा की बात समझानेकी
सुबह समयसार की zoom app ऑनलाइन क्लास में क्या सुधार आवश्यक है ?
