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वाख

Total questions: 20

Worksheet time: 10mins

Name
Class
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1.

रस्सी कच्चे धागे की ,खींच रही मै नाव का अर्थ होगा

a)

कवयित्री ने परमात्मा के निकट जाने वाले प्रयासों को कच्चे धागे से खींची जाने वाली नाव के रूप में बताया है

b)

कवयित्री ने कच्चे धागे की रस्सी से नाव खीचने की बात कही है

c)

कच्चे धागे की रस्सी से ही नाव खींचने की योजना बन रही है।

d)

कह नहीं सकते।

2.

पानी टपके कच्चे सकोरे,व्यर्थ प्रयास हो रहे मेरे का अर्थ होगा

a)

धीरे धीरे समय निकलता जा रहा है,पर कवयित्री द्वारा प्रभु मिलन के लिए किए गए सारे प्रयास व्यर्थ होते जा रहे हैं।

b)

पानी टपके कच्चे सकोरे,व्यर्थ प्रयास हो रहे मेरे।

c)

बर्तन से पानी टपक रहा है,सारे प्रयास व्यर्थ है।

d)

इसमें से कोई नहीं।

3.

हूक का अर्थ होगा

a)

पीड़ा

b)

शूल

c)

कसक

d)

ये सब

4.

पानी टपके कच्चे सकोरे,में सकोरे का अर्थ होगा

a)

मिट्टी का बना एक छोटा कटोरे की तरह का बर्तन

b)

सकोरे का अर्थ है कोरे के साथ

c)

नाव

d)

कह नहीं सकते।

5.

खा खा कर कुछ पाएगा नहीं का अर्थ होगा

a)

केवल और केवल भोग उपभोग में लगे रहने से कुछ प्राप्त नहीं हो सकता।

b)

खा खा कर कुछ प्राप्त नहीं होगा केवल वजन बढ़ेगा

c)

सब कुछ खा जाएगा तो क्या बचेगा।

d)

इनमें से कोई नहीं।

6.

जेब टटोली कौड़ी न पाई का अर्थ होगा

a)

कवयित्री ने अपना सारा जीवन सांसारिक इच्छाओं में फंसकर व्यर्थ गवां दिया।

b)

जीवन के अंतिम समय में जब उन्होंने पीछे देखा तो ईश्वर को देने के लिए उनके पास कोई सदकर्म ही नहीं थे

c)

उसने अपने जीवन में कोई भी पुण्य कर्म नहीं किया है।अब उसे पछतावा हो रहा है।

d)

ये सभी।

7.

थल थल में बसता है शिव ही का अर्थ होगा

a)

ईश्वर कण कण में व्याप्त है

b)

वह सबके हृदय के अंदर मौजूद है

c)

ये दोनों अर्थ सही हैं

d)

इनमें से कोई नहीं।

8.

बंद द्वार की सांकल खोलने के लिए ललद्यद ने कहा है कि

a)

भोग और त्याग के बीच संतुलन बनाए रखो

b)

ना तो भोगों में ही डूबे रहो और ना ही शरीर को सुखाओ

c)

माध्यम मार्ग अपनाओ तभी प्रभु मिलन का द्वार खुलेगा

d)

ये सब

9.

घर जाने की चाह है घेरे से अर्थ होगा

a)

घर जाना

b)

परमात्मा से मिलन

c)

मृत्यु ना आना

d)

जल्दी घर चले जाना

10.

कवयित्री ने ईश्वर प्राप्ति के लिए बेकार जा रहे उसके प्रयासों की तुलना की है

a)

कच्चे सकोरों से

b)

खाना खाकर दुबला होने से

c)

मंदिर जाने से

d)

कह नहीं सकते कि किससे की है

11.

न खाकर बनेगा अहंकारी का अर्थ होगा

a)

सांसारिक सुखों से लोग इतनी अधिक दूरी बना लेते हैं कि सब कुछ छोड़ देते हैं।

b)

उन्हें अपनी इन्द्रियों को वश में करने के कारण घमंड हो जाता है

c)

वे खुद को बहुत बड़ा और महान समझने लगते हैं।

d)

ये सब

12.

नाव किसका प्रतीक है?

a)

इस नष्ट हो जाने वाले शरीर का प्रतीक है।

b)

केवल नाव

c)

कहीं जाने का साधन

d)

कह नहीं सकते कि किसका प्रतीक है

13.

भवसागर का अर्थ क्या होगा?

a)

भाव सागर

b)

भावों का सागर

c)

संसार रूपी सागर

d)

ये सब

14.

कवयित्री ने ईश्वर का निवास बताया है

a)

मनुष्य के हृदय में

b)

मंदिर में

c)

मस्जिद में

d)

इन सभी जगहों पर

15.

इन वाखों में रस्सी शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है

a)

मनुष्य की सांसों के लिए

b)

केवल रस्सी का प्रयोग बताने के लिए

c)

नाव की रस्सी

d)

पता नहीं

16.

ज्ञानी से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?

a)

जो आत्मा और परमात्मा के संबंध को जान सके

b)

जो अपने भीतर बसे ईश्वर के स्वरूप को जान सके

c)

ईश्वर को अपने हृदय में ही ढूंढने वाले सच्चे ज्ञानी हैं

d)

ये सब

17.

आई सीधी राह से,गई न सीधी राह का अर्थ क्या होगा?

a)

ललद्यद के मन का पश्चाताप प्रकट हुआ है

b)

उन्होंने अपनी आत्मा को परमात्मा से मिलाने के लिए सही उपाय नहीं किए

c)

अपनी अवस्था पर उन्हें बहुत अफसोस हो रहा है।

d)

ये सभी।

18.

इन वाख़ों को लिखा है

a)

लालद्याद ने

b)

लालदयाद ने

c)

ललद्यद ने

d)

कह नहीं सकते

19.

सुषुम सेतु का अर्थ होगा

a)

कुंडली जागरण से संबंधित

b)

सुषुम्ना नाड़ी को जागृत कर अपने और प्रभु के बीच हठयोग के द्वारा सीधे तौर पर सेतु बनाना

c)

हठयोग करना

d)

ये सब

20.

आत्मा में ही परमात्मा का वास है इसलिए स्वयं को जानना ही ईश्वर को जानना है_ ये अर्थ इन पंक्तियों से मिलता है_

a)

थल थल में बसता है शिव ही

b)

ज्ञानी है तो स्वयं को जान यही है ईश्वर से पहचान

c)

आई सीधी राह से गई ना सीधी राह

d)

किसी भी पंक्ति में ऊपर दिया गया अर्थ नहीं मिलता है।