NEW
Font size
Worksheetsसमयसार गाथा ८-११
Total questions: 40
Worksheet time: 30mins
समयसार गाथा ८ के अनुसार स्वस्ति शब्द का अर्थ क्या है ?
तुम्हारा अविनाशी कल्याण हो
तुम्हारा विनाशी कल्याण हो
तुम्हारा अविनाशी अकल्याण हो
हमारा अविनाशी कल्याण हो
समयसार गाथा ८ के अनुसार म्लेच्छ अर्थात कौन ?
दरिद्र
अनपढ़
दलित
अछुत
समयसार गाथा ८ के अनुसार आत्मा अर्थात क्या ?
ज्ञायक भाव
शुद्धात्मा
ज्ञान-दर्शन-चरित्र
समय
समयसार गाथा ८ के किसके सिद्धि के लिए है
व्यवहार नय
निश्चय नय
व्यवहार नय की उपयोगिता
निश्चय नय की निरर्थकता
समयसार गाथा ८ के अनुसार व्यवहार नय कैसा है ?
उपादेय
हेय
निश्चय नय का निषेधक
निश्चय का प्रतिपादक
समयसार गाथा ८ के अनुसार क्या नहीं होना चाहिए ?
निश्चयी को व्यवहारी
ब्राम्हण को म्लेच्छ
व्यवहाराभासी
निश्चयाभासी
सभी
समयसार गाथा ८ के अनुसार आत्मा समझने वाला व्यक्ति कैसा होता है ?
पात्र शिष्य
बुद्धि का विकास वाला
कषाय की मंदतावाला
आत्मा की तीव्र रूचिवाला
सभी
समयसार गाथा ८ के अनुसार आत्मा समझने वाले कैसा होता है ?
आत्मज्ञानीगुरु के प्रति बहुमान का भाव हो
आस्था हो
विनय हो
गहरी जिज्ञासा
सभी
समयसार गाथा ८ में व्यवहार नय का निषेध क्यों किया
निश्चय की स्थापना के लिये
धर्म की स्थापना के लिए
आत्मानुभव के लिए
हेय है बताने के लिए
समयसार गाथा ८ के अनुसार जिव के ज्ञान दर्शन चारित्र यह कथन
यह व्यवहार है
यह भेद कथन है
यह आत्मा को समझाने के लिए कहा
विकल्प है, आत्मानुभव मे बाधा है
सभी
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार श्रुतकेवली कितने प्रकार के होते है
निश्चय श्रुतकेवली और व्यवहार श्रुतकेवली दो प्रकार के
निश्चय श्रुतकेवली केवल एक प्रकार के
व्यवहार श्रुतकेवली केवल एक प्रकार के
केवल एक प्रकार के
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार निश्चय श्रुतकेवली किसे कहते है ?
जो श्रुतज्ञान के बल से केवल शुद्ध आत्मा को जानते है
जो श्रुतज्ञान के बल से सर्वश्रुतज्ञान को जानते है
जो सर्वश्रुतज्ञान को जानते है
जो सर्श्रुवतज्ञान के बल से केवल शुद्ध आत्मा को जानते है
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार व्यवहारनय से श्रुतकेवली किसे कहते है ?
जो श्रुतज्ञान के बल से केवल शुद्ध आत्मा को जानते है
जो श्रुतज्ञान के बल से सर्वश्रुतज्ञान को जानते है
जो सर्वश्रुतज्ञान को जानते है
जो सर्श्रुवतज्ञान के बल से केवल शुद्ध आत्मा को जानते है
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार सर्वश्रुतज्ञान अर्थात क्या ?
श्रुतज्ञान का अधिकतम विकास
द्वादशांग का ज्ञान
आत्मा
सभी
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार जो सर्वश्रुत को जानते हैं, वे श्रुतकेवली हैं यह कथन
असत्य है
परमार्थ का प्रतिपादक है
सत्य है
हेय
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार व्यवहार श्रुतकेवली आत्मा को नहीं जानते यह कथन
सत्य है
असत्य है
एकांत है
कथंचित सत्य है
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार निश्चय श्रुतकेवली द्वादशांग को जानते यह कथन
सत्य है
असत्य है
एकांत है
कथंचित सत्य है
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार गुण भेद अर्थात क्या ?
गुण-गुणी सम्बन्ध
पर्याय-पर्यायवान सम्बन्ध
अनुपचरित-सद्भूतव्यवहारनय का विषय
सभी
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार किसके जानने से आत्मा जानने में आता है ?
दर्शन-ज्ञान-चारित्र
सर्वश्रुतज्ञान
श्रुतज्ञान
सभी
समयसार गाथा ९-१० के अनुसार भेद करना
अनिवार्य है
हेय है
समझाने के लिए आवश्यक है
विकल्प उत्पादक है
सभी
समयसार गाथा ११ के अनुसार व्यवहार नय
अभुतार्थ है
अविद्यमान अर्थ को प्रगट करता है
के आश्रय से सम्यक दर्शन प्रगट नहीं होता
का पक्ष अनादी से है
सभी
समयसार गाथा ११ के अनुसार शुद्धनय
भुतार्थ है
विद्यमान अर्थ को प्रगट करता है
के आश्रय से सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती है
का पक्ष अनादी से नहीं हुआ
सभी
समयसार गाथा ११ के अनुसार आत्मा को शुद्ध कैसे किया जा सकता है
शुद्धनय के आश्रय से
व्यवहार नय के आश्रय से
राग द्वेष मोह का अभाव करके
पर्याय दृष्टी छोड़कर
सभी
समयसार गाथा ११ के कीचड़ के दृष्टांत के अनुसार जल
मलिन हो गया है
स्वच्छ ही है
मलिनता संयोग मे है
सभी
समयसार गाथा ११ के अनुसार प्रबल कर्मोदय में जिव
अनेक भाव रूप अशुद्ध हो गया है
स्वच्छ ही है
भुतार्थ दृष्टी से स्वच्छ ही है
कोई नहीं
समयसार गाथा ११ के अनुसार अध्यात्म के नय कौनसा होता है ?
निश्चय नय
परमशुद्ध निश्चयनय
शुदधनय
निश्चय-व्यवहार नय
समयसार गाथा ११ के अनुसार जिव शरीर का कर्ता-भोक्ता है यह कथन कौनसे नय का है ?
उपचरित- असदभूतव्यवहारनय
अनुपचरित- असदभूतव्यवहारनय
अशुद्धनिश्चय नय
उपचरित- सदभूतव्यवहारनय
समयसार गाथा ११ के अनुसार जिव परीवार-समाज का कर्ता-भोक्ता है यह कथन कौनसे नय का है ?
उपचरित- असदभूतव्यवहारनय
अनुपचरित- असदभूतव्यवहारनय
अशुद्धनिश्चय नय
उपचरित- सदभूतव्यवहारनय
समयसार गाथा ११ के अनुसार जिव राग का कर्ता-भोक्ता है यह कथन कौनसे नय का है ?
उपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अनुपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अशुद्धनिश्चय नय
अनुपचरित- अsदभूतव्यवहारनय
समयसार गाथा ११ के अनुसार राग है सो जिव यह कथन कौनसे नय का है ?
उपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अनुपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अशुद्धनिश्चय नय
उपचरित- असदभूतव्यवहारनय
समयसार गाथा ११ के अनुसार सम्यकदृष्टी जिव यह किस नय से कहा जाता है
उपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अनुपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अशुद्धनिश्चय नय
एकदेशशुद्धनिश्चय नय
समयसार गाथा ११ के अनुसार "केवलज्ञान जिव का है" यह कौनसा नय है ?
उपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अनुपचरित- सदभूतव्यवहारनय
साक्षातशुद्धनिश्चय नय
एकदेशशुद्धनिश्चय नय
समयसार गाथा ११ के अनुसार "ज्ञान है सो आत्मा है" यह कौनसा नय है ?
उपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अनुपचरित- सदभूतव्यवहारनय
साक्षातशुद्धनिश्चय नय
एकदेशशुद्धनिश्चय नय
समयसार गाथा ११ के अनुसार "केवलज्ञानी" यह कौनसा नय है ?
उपचरित- सदभूतव्यवहारनय
अनुपचरित- सदभूतव्यवहारनय
साक्षातशुद्धनिश्चय नय
एकदेशशुद्धनिश्चय नय
समयसार गाथा ११ के अनुसार निश्चय नय किसका निषेध करता है
भेद का
संयोग का
गुणभेद का
पर्याय भेद का
सभी का
स्त्री-पुत्र-परिवार हमारे है क्या यह कथन जिनवाणी के अनुसार सत्य है ?
कदापि नहीं
हा
कथंचित हा
कोई नहीं
समयसार गाथा ११ के अनुसार "दृष्टी का विषय" कौनसे नय का विषय है ?
परमशुद्धनिश्चयनय
अनुपचरित- सदभूतव्यवहारनय
साक्षातशुद्धनिश्चय नय
एकदेशशुद्धनिश्चय नय
समयसार गाथा ११ के अनुसार परमशुद्धनिश्चयनय की अपेक्षा व्यवहार नय के कितने भेद है ?
४
२
७
८
समयसार गाथा ११ के अनुसार भुतार्थनय अर्थात कौनसा नय ?
परमशुद्धनिश्चयनय
अनुपचरित- सदभूतव्यवहारनय
साक्षातशुद्धनिश्चय नय
एकदेशशुद्धनिश्चय नय
lockdown के बाद स्वाध्याय कैसा होना चाहिए
मंदिरजी में
online ही अच्छा है
कभी कभी मंदिरजी में भी
कभी कभी online भी
