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WorksheetsJain Dharma- Gati
Total questions: 17
Worksheet time: 17mins
गति कितने प्रकार की होती है
4
2
5
60
4 गति के नाम क्या हैं?
हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह
नरक, तिर्यंच, देव, मनुश्य
जीव, अजिव, मिथ्यत्व, संवर
क्रोध, मान, माया, लोभ
गति किसे कहते हैं ?
जीव की अवस्था- तवशेष को गति कहिे हैं
मााँस का भक्षण अस्वाभात्रवक एवं त्रवशेष रागभाव से होता है
जिसमें, स्पर्श, रस, गंध, वणम पाया जाए
कषाय आत्मा का ववभाव है, स्वभाव नहीं
मनुश्य गति क्या है ?
जब कोई जीव कही से मरकर तिर्यंच शरीर धारण करते है, तो उसे मनुष्य कहा जाता है।
जब कोई जीव कही से मरकर देव का शरीर धारण करते है, तो उसे देव कहा जाता है।
जब कोई जीव कही से मरकर मनुष्य शरीर धारण करते है, तो उसे मनुष्य कहा जाता है।
जब कोई जीव कही से मरकर नारकी का शरीर धारणम करता है, तो उसे नारकी कहा जाता है।
एक इन्द्रिय जीव कितने होते है ?
5
2
7
3
नारकी कहा रहते है ?
पृथ्वी के निचे ३० पृथ्वीया है, उसमे १००० बिल है और उसमे नारकी रहते है।
पृथ्वी के निचे २ पृथ्वी है, उसमे १८ लाख बिलो में नारकी रहते ह।
पृथ्वी के निचे ७ पृथ्वी है, वहा ८४ लाख बिलो में नारकी रहते है।
पृथ्वी के निचे ८ बिलो में, उसमे ३० बिलो में नारकी रहते ह।
Select the odd one out.
देव गति
तिर्यंच गति
निगोद गति
मनुष्य गति
तिर्यंच जाने का कारन क्या है ? और उसके दो नाम और क्या है ?
कपट
छल
हवेली
माया
मिथ्यात्व
देव गति जाने का कारन ?
संयमासंयम
अकाम निर्जरा
बल तप
सरगसंयम
सबसे अच्छी गति कौनसी होती है, और क्यों ?
तिर्यंच गति क्यूंकि इस गति में अलग-अलग तरह के सुख और दुःख होते है।
मनुष्य गति क्यूंकि हम सिर्फ मनुष्य गति से ही मोक्ष पाया जा सकता ह।
नरक गति क्यूंकि वह सिर्फ दुःख होता है।
देव गति क्यूंकि इस गति में सिर्फ सुख ही सुख है।
पाप का फल भोगने के लिए नरक गति है, पुण्य का फल भोगने के लिए क्या है ?
तिर्यंच गति
पंचम गति
मनुष्य गति
देव गति
जब कोई जीव कही से मटकर देव का शरीर धारण करता है तब उसे देव कहा जाता है।
Yes
No
जब कोई जीव कही से मटकर देव का शरीर धारण करता है तब उसे देव कहा जाता है।
तिर्यंच गति
नरक गति
देव गति
मनुष्य गति
पंचम गति
अल्प परिग्रह, स्वभाव की सरलता, सहज मंद कषाय रखने से अहम मनुष्य गतिप्राप्त होती ह।
Yes
No
जब कोई जीव कही से मरकर तिर्यंच का शरीर धारण करता है तब उसे मनुष्य कहा जाता ह।
Yes
No
हम पंचम गति को कैसे प्राप्त हो सकते है ?
अपनी आत्मा को पहचानकर
मिथ्यात्व को बढ़ावा देकर
उसकी साधना कर
घोर पाप करकर
चतुर्गति के दुखो से छूटकर
चार गति के दुखो से छूटकर हम सिद्ध गति पार्प्त कर सकते है।
No
Yes
