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Worksheetsअतीत में दबे पाँव - ओम थानवी - सुनीता गुसांई जीट चंडीगढ़
Total questions: 20
Worksheet time: 15mins
1 ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के लेखक हैं- *
क) ओम थानवी
ख) प्रेमचंद
ग) मनोहर श्याम जोशी
घ) आनंद यादव
मोहनजोदड़ो का वास्तविक नाम था- *
(क) मोहनजोदड़ो
ख) मुअनजो-दड़ो
मुएंजोदड़ों
(घ) सिंधु सभ्यता
मुअनजो-दड़ो का अर्थ है – *
(क) मुर्दों का टीला
ख) खंडहर
(ग) नदी
(घ) शहर
मुअनजो-दड़ो सभ्यता का विकास किस नदी की किनारे हुआ था ? *
(क) गंगा
(ख) नर्मदा
(ग) सतलुज
(घ) सिंधु
कौन –सा कथन सही है – *
क मुअनजो-दड़ो ताम्र काल के शहरों में सबसे बड़ा है।
ख मुअनजो-दड़ो प्रस्तर काल के शहरों में सबसे बड़ा है।
ग मुअनजो-दड़ो लोह काल के शहरों में सबसे बड़ा है।
घ मुअनजो-दड़ो प्राचीन काल के शहरों में सबसे बड़ा है।
6 पूरा मुअनजो-दड़ो छोटे-मोटे टीलों पर आबाद था ताकि - *
क ताकि सिंधु का पानी कम हो जाए तो उससे बचा जा सके
ख ताकि सिंधु का पानी आसानी से भरा जा सके
ग ताकि सिंधु का पानी बाहर पसर आए तो उससे बचा जा सके
घ ताकि सिंधु का पानी प्रयोग में लाया जा सके
7 मुअनजो-दड़ो किसकी अनूठी मिसाल है- *
क नगर नियोजन की
ख ग्राम नियोजन की
ग कस्बे के नियोजन की
घ बाज़ार के नियोजन की
यहाँ की कमोबेश सारी सड़कें सीधी हैं या फिर आड़ी। आज वास्तुकार इसे- *
क ‘ग्रिड प्लान’ कहते हैं।
ख 'आधुनिक प्लान' कहते हैं |
ग 'सड़क नियोजन' कहते हैं |
घ कुछ नहीं कहते हैं |
कौन से शहर ग्रिड शैली के शहर हैं - *
क ब्रासीलिया , दिल्ली और इस्लामाबाद
ख ब्रासीलिया , चंडीगढ़ और इस्लामाबाद
ब्रासीलिया , चंडीगढ़ और लाहौर
एम्सटर्डम, चंडीगढ़ और इस्लामाबाद
इतिहासकार इरफ़ान हबीब के मुताबिक यहाँ के लोग कौन -सी फ़सल लेते थे - *
क रबी की
ख ख़रीफ़ की
ग दलहन की
घ स्थानीय फ़सल
मेसोपोटामिया के शिलालेखों में मुअनजो-दड़ो के लिए कौन -से शब्द का संभावित प्रयोग मिलता है। *
क मोहनजोदड़ो
ख ‘मेलुहा’
ग हड़प्पा
घ सिन्धु
आज के युग में पूरब की बस्तियाँ गरीबोंकी बस्तियाँ मानी जाती हैं। मुअनजो-दड़ो में *
क पूरब की बस्तियाँ अमीरों की बस्तियाँ थीं
ख. मजदूरों की बस्तियाँ थीं
ग. धर्मगुरुओं की बस्तियाँ थीं
घ प्रशानिक अधिकारियों की बस्तियाँ थीं
सिंधु घाटी सभ्यता संसार में पहली ज्ञात संस्कृति है जो कुएँ खोद कर भू-जल तक पहुँची। मुअनजो-दड़ो में - *
क लगभग 600 कुएँ थे
ख लगभग 700 कुएँ थे
ग लगभग 800 कुएँ थे
घ लगभग 900 कुएँ थे
सिंधु सभ्यता एक ‘लो प्रोफाइल’ सभ्यता थी क्योंकि *
क हड़प्पा संस्कृति में न भव्य राजप्रसाद मिले हैं, न मंदिर।न राजाओं, महंतों की समाधियाँ।
ख यहाँ के मूर्तिशिल्प छोटे हैं और औजार भी। मुअनजो-दड़ो के ‘नरेश’ के सिर पर जो ‘मुवुफट’ है, शायद उससे छोटे सिरपेंच की कल्पना भी नहीं की जा सकती
ग उन लोगों की नावें बनावट में मिस्र की नावों जैसी होते हुए भी आकार में छोटी थीं ।
घ उपरोक्त सभी
‘सिंधु-सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषितथा।’ क्योंकि - *
क सिंधु-सभ्यता के लोगों में कला या सुरुचि का महत्व अधिक था।
ख यहाँ अनुशासन जरूर था, परंतु सैन्य सभ्यता का नहीं।
ग यहाँ पर धर्मतंत्र या राजतंत्र की ताकत का प्रदर्शन करने वाली वस्तुएँ-महल, उपासना-स्थल आदि-नहीं मिलतीं।
घ उपरोक्त सभी
सिंधु सभ्यता को जल संस्कृति कहा जा सकता है क्योंकि - *
क सिंधु घाटी सभ्यता संसार में पहली ज्ञात संस्कृति है जो कुएँ खोद कर भू-जल तक पहुँची।
ख मुअनजो-दड़ो में सात सौ के करीब कुएँ थे।
ग नदी, कुएँ स्नानागार और बेजोड़ निकासी व्यवस्था को देखते हुए
घ उपरोक्त सभी
ऐसा क्यों कहा गया है कि अब हम सिंधु सभ्यता के प्रमाण प्राप्त नहीं कर सकते - *
क , क्योंकि मुअनजो-दड़ो में अब खुदाई बंद कर दी गई है।
ख क्योंकि अब इस क्षेत्र में किसी को आने नहीं दिया जाता
ग इस क्षेत्र को बंद कर दिया गया है
घ उपरोक्त सभी
मुअनजो-दड़ो को देखकर लेखक को राजस्थान के किस स्थान की याद आ गई - *
क पुष्कर
ख कुलधरा
ग चितौड़गढ़
घ उदयपुर
मुअनजो-दड़ो कहाँ स्थित है - *
क पाकिस्तान के सिंधु प्रांत में स्थित पुरातात्त्विक स्थान, जहाँ सिंधु घाटी सभ्यता बसी थी।
ख भारत के सिंधु प्रांत में स्थित पुरातात्त्विक स्थान, जहाँ सिंधु घाटी सभ्यता बसी थी।
ग अफगानिस्तान के सिंधु प्रांत में स्थित पुरातात्त्विक स्थान, जहाँ सिंधु घाटी सभ्यता बसी थी।
घ ईरान के सिंधु प्रांत में स्थित पुरातात्त्विक स्थान, जहाँ सिंधु घाटी सभ्यता बसी थी।
सिंधु घाटी की सभ्यता की खोज की शुरुआत कब और किसके द्वारा की गई *
क 1922 में राखलादास बनर्जी के द्वारा
ख 1922 में जॉन मार्शल के द्वारा
ग 1922 में दीक्षित काशीनाथ के द्वारा
घ उपरोक्त में से कोई भी नहीं
