WorksheetsQuiz 6 - Aao Chale Pathsala
Total questions: 15
Worksheet time: 75secs
हिंसा, सत्य, चौरी अब्रम्ह और परिग्रह से विरत होना क्या है।
व्रत
तप
संयम
आरंभ
हिंसादि से एक देश निर्वृति क्या है।
तप
अणुव्रत
महाव्रत
परिग्रह
व्रती किससे रहित होता है ।
पाप
हिंसा
शल्य
मिथ्या
प्रतिमा धारी व व्रताचरण धारी श्रावक ----- गुणस्थान वर्ती होते हैं।
पंचम गुणस्थानवर्ती
दशम गुणस्थानवर्ती
द्वादश गुणस्थानवर्ती
प्रथम गुणस्थानवर्ती
जो वस्तु बार बार भोगने में आवे उसे क्या कहते हैं। एक उदाहरण बताइये।
उपयोग (जल)
फल (सत-असत)
कार्य ( वांछा- इच्छा)
उपभोग (भोज्य-वस्त्र)
अस्तेय का अर्थ ----- है।
पाप न करना
चोरी न करना
हिंसा न करना
परिग्रह न करना
अविरत सम्यग्दृष्टि ---- पात्र है।
उत्तम
मध्यम
जघन्य
सम्यग्दृष्टी
दूसरों को खांसी आदि इसारों से अपना अभिप्राय बताना ----- देशव्रती व्रत के पांच अतिचार में है।
वर्णानुपात
वचनानुपात
शब्दानुपात
क्रियानुपात
स्मृत्यनुपस्थानं ----- शिक्षा व्रत का अतिचार है।
सामायिक
ध्यान
तप
उपवास
दातार में ---- गुण होना चाहिए।
नौ
सात
आठ
ग्यारह
अहिंसा व्रत की ---- भावानायें हैं।
एक
तीन
पाँच
आठ
व्रत का उल्लंघन करना ---- है।
अतिक्रम
व्यतिक्रम
अनाचार
अतिचार
श्रावक के व्रतो का उल्लेख किस ढाल में किया गया है।
पहली ढा़ल
चौथी ढा़ल
तीसरी ढा़ल
दूसरी ढा़ल
अनुव्रतं पंच उत्पादंते , अहिंसा नृत उच्यते। अस्तेयं बंभ व्रतं सुद्धं, अपरिग्रहं स उच्यते।।
यह श्री तारण स्वामी जी के किस ग्रंथ की गाथा है।
मालारोहण जी
पंडित पूजा जी
श्रावकाचार जी
कमल बत्तीसी जी
‛पडिमाय ग्यारह तत्वानी पेषं’ यह गाथा किस ग्रंथ की है और कितने नं. की है।
श्री न्यानसमुच्चय सार जी व 15 नं की गाथा
श्री मालारोहण जी व 12 नं की गाथा।
श्री पंडित पूजा जी व 17 नं की गाथा
श्री श्रावकाचार जी व गाथा 10 नं की गाथा
