Worksheetsसमास भाग 1
Total questions: 30
Worksheet time: 15mins
बस चालक इस शब्द में समास होगा
द्विगु
द्वंद
तत्पुरुष
अव्ययीभाव
त्रिफल- तीन फलों का समूह। विग्रह के आधार पर समास होगा-
बहुव्रीहि
द्विगु
द्वंद्व
पता नहीं कि कौन सा समास होगा।
पीतांबर-पीले है अंबर जिसके अर्थात श्री कृष्ण। विग्रह के आधार पर यह समास होगा
कर्मधारय
बहुव्रीहि
द्विगु
तत्पुरुष
दशानन-दश (दस) आननो का समूह।। दिए गए विग्रह के आधार पर यह उदाहरण होगा
द्विगु समास का
बहुव्रीहि समास का
कर्मधारय का
द्वंद समास का
श्वेत अंबर हैं जिनके अर्थात सरस्वती।। दिए गए समास विग्रह का समस्त पद और समास का नाम होगा
श्वेतांबर, कर्मधारय
श्वेतांबर बहुव्रीहि
यह दोनों सही हैं
केवल दूसरा सही है
समस्त पद को तोड़ना, अर्थ अलग अलग करना ही समास विग्रह कहलाता है।। कही गई बात के बारे में आप का विचार क्या है?
गलत है
सही है
कुछ कहा नहीं जा सकता
पता नहीं
1)तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है और 2) कर्मधारय समास में पहला पद प्रधान होता है।।
पहला सही है दूसरा गलत है
दूसरा सही है पहला गलत है
दोनों सही हैं
कह नहीं सकते कि क्या सही है और क्या गलत है।
1) कर्मधारय समास में उत्तर पद प्रधान होता है
2) पूर्व पद और उत्तर पद विशेषण विशेष्य का संबंध होता है।।
3) पूर्व पद और उत्तर पद में उपमेय और उपमान का संबंध नहीं होता
ऊपर कही गई सारी बातें सही है
ऊपर कही गई बातों में से केवल पहली और दूसरी ही सही है।
केवल तीसरी बात सही है
यह सब गलत है वास्तव में कर्मधारय समास में ऐसा कुछ भी नहीं होता।
1)विशेषण-संज्ञा की विशेषता बताने वाला
2)विशेष्य-जिस की विशेषता बताई जाए।
यह दोनों परिभाषाएं गलत है
पहली वाली सही दूसरी वाली गलत है
दोनों सही है
कुछ कहा नहीं जा सकता
नरसिंह इस समस्त पद का कर्मधारय समास में विग्रह होगा
नर के समान सिंह
सिंह रूपी नर
नरों में सिंह है जो वाह
पता नहीं
नरेंद्र मोदी जी हमारे प्रधानमंत्री हैं। यहां प्रधानमंत्री में समास है
द्वंद्व
तत्पुरुष
द्विगु
कर्मधारय
विद्या के लिए आलय-समस्त पद बनाकर समास का नाम लिखिए
विद्या का आलय, कर्मधारय समास
विद्या के लिए आलय ,तत्पुरुष समास
विद्यालय, तत्पुरुष समास
विद्यालय ,कर्मधारय समास
लंबा है उदर जिसका वह , विग्रह के आधार पर समस्त पद और समास होगा
लंबोदर, कर्मधारय
लंबा उदर ,बहुव्रीहि
लंबोदर ,तत्पुरुष
लंबोदर, बहुव्रीहि
महान है जो आत्मा-समस्त पद और समास का नाम होगा
महात्मा-बहुव्रीहि समास
महात्मा- कर्मधारय समास
महात्मा- तत्पुरुष समास
कुछ पता नहीं चल रहा है क्या होगा?? यह क्या हो रहा है??
पत्ते झड़ते हैं ,जिस विशेष ऋतु में-इस समास विग्रह का समस्त पद और समास का नाम होगा
पतझड़, कर्मधारय समास
पतझड़, बहुव्रीहि समास
पतझड़, अव्ययीभाव समास
पतझड़ ,तत्पुरुष समास
शक्ति के अनुसार-समस्त पद और समास होगा
यथाशक्ति तत्पुरुष समास
यथाशक्ति अव्ययीभाव समास
यथाशक्ति बहुव्रीहि समास
पता नहीं कौन सा समास होगा
वह शब्द जिनका रूप- लिंग, वचन ,कारक अथवा काल के अनुसार नहीं बदलता, उन्हें कहते हैं
संज्ञा
विशेष्य
अव्यय
क्रिया
जिस समास में उस शब्द को छोड़कर दूसरा बाहरी अर्थ निकले वहां होगा
तत्पुरुष समास
कर्मधारय समास
बहुव्रीहि समास
अव्ययीभाव समास
अंशुमाली-इस समस्त पद से हमें पता चलता है-
पहाड़ के बारे में
सूर्य के बारे में
अंशु और माली के बारे में
अंगुलिमाल जैसे किसी दैत्य के बारे में
आज, अभी ,कल ,परसो भीतर ,बाहर ,ताकि ,तो ,इसलिए ,किंतु ,अगर ,मगर लेकिन-यह सारे शब्द उदाहरण है
अव्यय के
संज्ञा के
समास के
पता नहीं, मुझे तो कुछ नहीं आता।।
1) द्विगु समास में, द्वि का अर्थ है दो।।
2) इस समास में प्रथम पद हमेशा संख्यावाची होता है।
दी गई जानकारी बिल्कुल सही है
ऊपर कई बात बिल्कुल गलत है
केवल पहला सही है
केवल दूसरा सही है
2 शब्दों की अगर बार-बार पुनरावृति हो रही हो तो वहां समास होगा-
द्वंद्व
द्विगु
अव्ययीभाव
तत्पुरुष
इस समास में दोनों ही पद प्रधान होते हैं। इस समास को कहते हैं-
द्विगु समास
अव्ययीभाव समास
द्वंद समास
बहुव्रीहि समास
बा बे भर आ प्रति नि यथा-ये उपसर्ग दिखाई पड़ते हैं
बहुव्रीहि समास
कर्मधारय समास
अव्ययीभाव समास
तत्पुरुष समास
भूखे- प्यासे में समास होगा
तत्पुरुष
द्विगु समास
द्वंद्व
अव्ययीभाव समास
रातोंरात- इस समस्त पद में समास होगा
द्विगु समास
द्वंद्व
अव्ययीभाव
तत्पुरुष
इस समास में विग्रह करते समय हमेशा एक शब्द लगाना होता है समूह या समाहार। इस समास को कहते हैं
द्वंद्व
द्विगु समास
कर्मधारय समास
बहुव्रीहि समास
पेट भरकर-इस समास विग्रह का समस्त पद और समास का नाम होगा
पेट भर ,दिगु समास
भरपेट ,कर्मधारय समास
भरपेट, अव्ययीभाव समास
भरपेट, बहुव्रीहि समास
आजन्म _यह समस्त पद उदाहरण है
कर्मधारय समास
अव्ययीभाव समास का
बहुव्रीहि समास का
पता नहीं किस समास का उदाहरण है
किस समास में विग्रह करते हुए कारकों का प्रयोग होता है।।
कर्मधारय
तत्पुरुष
अव्ययीभाव समास
द्वंद्व
