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Kṛṣṇa Book Practice Quiz (Chapter 87-88)

Total questions: 58

Worksheet time: 2hrs 8mins

Name
Class
Date
1.

राजा परीक्षित ने शुकदेव गोस्वामी से क्या प्रश्न पूछा? (अध्याय 87)

a)

दिव्य मन, बुद्धि से भौतिक विषयवस्तु को कैसे समझ सकते हैं?

b)

भौतिक मन, वाणी से दिव्य विषयवस्तु को कैसे समझ सकते हैं?

2.

परम सत्य को समझने की प्रगति किन तीन रूपों में होते है? (अध्याय 87)

a)

ॐ, तत्, सत्

b)

भुः, भुवः, स्वः

c)

आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक

d)

ब्रह्म, परमात्मा, भगवान्

3.

वेद कर्मों के किन तीन विभागों के विषय में बताते हैं? (अध्याय 87)

a)

कर्मकाण्ड, ज्ञानकाण्ड, उपासनाकाण्ड

b)

सम्बन्ध, अभिदेय, प्रयोजन

c)

ब्रह्मा, विष्णु, महेश

d)

कारणोदकशायी, गर्भोदकशायी, क्षीरोदकशायी

4.

वेदों में देवताओं की उपासना का आदेश क्यों दिया गया है? (अध्याय 87)

a)

श्रीभगवान के साथ देवताओं के सम्बन्ध को समझते हुए

b)

विभिन्न प्रकार की इन्द्रियतृप्ति में अत्यधिक लिप्त होने वाले को नियमित करने के लिए

5.

शुकदेव गोस्वामी के राजा परीक्षित को दिए उत्तर के अनुसार भगवान् ने किस-किस की रचना की? (अध्याय 87)

a)

इन्द्रियाँ

b)

मन

c)

बुद्धि

d)

जीव

6.

वेदांत सूत्र के अनुसार परम सत्य के विषय में क्या सही है? (अध्याय 87)

a)

परम सत्य प्रत्येक वस्तु का मूल है

b)

परम सत्य निराकार है

c)

रचनाकार होने के कारण दिव्य बुद्धि का स्वामी है

d)

मानव का निर्माण उन्हीं के स्वरुप में किया गया है

7.

परम सत्य परमेश्वर को निर्गुण कहने का क्या अर्थ है? (अध्याय 87)

a)

उनमें कोई गुण नहीं है

b)

उनमें वे गुण हैं, जो बद्धजीवों के लिए अचिन्त्य हैं

c)

सत्य, रज, तम के भौतिक गुणों के विपरीत उनमें कोई दिव्य गुण नहीं हैं

8.

देवर्षि नारद भगवान् नारायण के अवतार महर्षि नारायण से मिलने कहाँ पहुंचे? (अध्याय 87)

a)

स्वर्गलोक

b)

जनलोक

c)

कल्पग्राम

d)

सम्भलग्राम

9.

स्वर्गलोक के निवासियों की सभा में महान ब्रह्मचारियों चतुष्कुमारों में से किसे वक्ता चुना गया? (अध्याय 87)

a)

सनक

b)

सनातन

c)

सनन्दन

d)

सनत

10.

वैदिक साहित्य को प्रस्तुत करने का उद्देश्य क्या है? (अध्याय 87)

a)

धर्म के अनुसार अर्थ, काम की पूर्ति

b)

श्रीकृष्ण को समझना

11.

"सर्वं खलु इदं ब्रह्म - प्रत्येक वस्तु श्रीकृष्ण है" का क्या अर्थ नहीं है? (अध्याय 87)

a)

प्रत्येक वस्तु की उपासना कृष्ण की ही उपासना है

b)

प्रत्येक वस्तु श्रीकृष्ण की शक्ति का ही एक परिवर्तित रूप है

c)

वे अपनी शक्ति के द्वारा प्रत्येक स्थान पर उपस्थित हैं

d)

शक्तिमान के रूप में वे सर्वत्र उपस्थित नहीं हैं

12.

कृष्णभावनामृत में प्रत्यक्ष कृष्ण की शरण ग्रहण करना ठोस धरती पर खड़े होने के समान है तो विभिन्न देवताओं, परमात्मा या निराकार ब्रह्म की शरण ग्रहण करने की तुलना किससे की गयी है? (अध्याय 87)

a)

आकाश में खड़े होना

b)

जल में खड़े होना

c)

धरती पर टिकी शिला पर खड़े होना

d)

धरती पर पड़े लकड़ी के टुकड़े पर खड़े होना

13.

कृष्णभावनामृतविहीन व्यक्ति की तुलना किस से की गयी है? (अध्याय 87)

a)

श्वांस लेने की तुलना लुहार की दुकान में प्रयुक्त धौंकनी से

b)

दीर्घ जीवन की तुलना दीर्घजीवी वृक्ष के अस्तित्व से

c)

अतिलोलुप भक्षण की तुलना श्वान से

d)

विषयभोग के आनंद की तुलना शूकरों व बकरियों से

14.

भगवद्गीता में जीवन/चेतना के कौन से स्तर को मुक्तात्मा/ब्रह्मभूत स्थिति कहा गया है? (अध्याय 87)

a)

अन्नमय

b)

प्राणमय

c)

मनोमय

d)

विज्ञानमय

e)

आनंदमय

15.

परमात्मा और जीवात्मा के एकात्म का वास्तविक अर्थ क्या है? (अध्याय 87)

a)

परम ब्रह्म में मिल जाना और अपना व्यक्तिगत अस्तित्व खो देना

b)

मद्भक्तिं लभते परां - भक्ति में संलग्न होना

16.

भोजन को पचाने वाली श्रेष्ठतर शक्ति को भगवद्गीता में क्या कहा गया है? (अध्याय 87)

a)

मूलाधार

b)

मणीपूर

c)

वैश्वानर

d)

विश्वरूप

17.

एक वैष्णव के शरीर पर तिलक के रूप में भगवान् के कितने मंदिर होते हैं? (अध्याय 87)

a)

8

b)

11

c)

12

d)

13

18.

मूलाधार (मणीपूर) से लेकर ब्रह्मरन्ध्र तक के ध्यान की प्रक्रिया किनके लिए है? (अध्याय 87)

a)

जो भगवान् के भक्त, वैष्णव हैं

b)

जो स्थूल रूप से भौतिकतावादी हैं

19.

भगवान् की विभिन्न रसों में सेवा करने के लिए किन्हें वैकुण्ठ लोकों अथवा वृन्दावन लोक में स्थान प्रदान किया जाता है? (अध्याय 87)

a)

निर्विशेषवादी

b)

सगुणवादी

20.

शाश्वत आध्यात्मिक जगत में भी कौन सी प्रक्रिया शाश्वत रूप से चलती रहती है? (अध्याय 87)

a)

कर्मकाण्ड

b)

मीमांसा

c)

अष्टांगयोग

d)

भक्ति

21.

इनमें से कौन-कौन निराकारवादी/मायावादी छह दार्शनिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं? (अध्याय 87)

a)

जैमिनी

b)

गौतम

c)

कणाद

d)

अष्टावक्र

e)

शंकराचार्य

22.

श्रीभगवान का शरीर कैसा है? (अध्याय 87)

a)

निराकार

b)

भौतिक शरीर - हमारे जैसा

c)

आनन्दचिन्मय रस से निर्मित सच्चिदानन्दविग्रह

23.

भगवान् श्रीकृष्ण अपनी लीलाओं का प्रदशन करते समय कब अधिक शक्तिशाली थे? (अध्याय 87)

a)

यशोदा की गोद में लेटे हुए शिशु रूप में

b)

गाय-बछड़ों को चराते समय बालक रूप में

c)

द्वारिकाधीश के रूप में

d)

परम भगवान् हमेशा एक समान शक्तिशाली हैं

24.

परम भगवान् से ही उद्भूत इस भौतिक जगत को भौतिक रूप में देखने में क्या अज्ञानता है? (अध्याय 87)

a)

इसे इन्द्रियतृप्ति की विषयवस्तु के रूप में न देखना

b)

इसका अवलोकन श्रीकृष्ण से सम्बंधित मानते हुए न करना

25.

वैष्णव दृष्टिकोण से मूल स्वर्ण और स्वर्ण से बने कुण्डल, चूड़ियों आदि उदाहरण का क्या तात्पर्य है? (अध्याय 87)

a)

समस्त जीव गुणों में श्रीभगवान के ही समान हैं

b)

समस्त जीव भगवान् के ही सनातन सेवक हैं

c)

बद्ध/पथभ्रष्ट जीवों को सुधारकर भगवान् की सेवा का अवसर

d)

जीव और भगवान् में कोई अंतर नहीं है

26.

भौतिक जगत में जीवात्मा तथा परमात्मा दोनों आध्यात्मिक अस्तित्व हैं, फिर माया क्या है? (अध्याय 87)

a)

भौतिक जगत में इन्द्रियतृप्ति के जीवन की धारणा

b)

जीवात्मा द्वारा परमात्मा की सेवा की धारणा

27.

वेदवादः या खूंटे से बंधे पशु के समान किसे बताया गया है? (अध्याय 87)

a)

जो भक्त नहीं हैं, ज्ञान, योग, कर्म जैसी अनिश्चित प्रक्रियाओं में युक्त होने के कारण स्वयं को भी मुक्त नहीं कर सकते हैं

b)

जो केवल धार्मिक सूत्रों व औपचारिकताओं से चिपका रहता है तथा ईश्वर के प्रति प्रेम की स्थिति तक उन्नति नहीं करता

28.

सृष्टि के समय विभिन्न जीवों की उत्पत्ति को कैसे समझें? (अध्याय 87)

a)

सृष्टि की रचना के समय ही जीवों की भी रचना होती है

b)

एक समान वर्षा होने पर भी भिन्न बीजों के अनुसार विभिन्न वनस्पतियां उगती हैं, वैसे ही अपनी विभिन्न इच्छाओं के कारण जीव विभिन्न दशाओं में प्रकट होते हैं

29.

भगवान् तथा जीव दोनों ही नित्य हैं, फिर दोनों में अंतर क्या है? (अध्याय 87)

a)

भगवान् परम नियंता हैं

b)

समस्त नित्य जीव नियंत्रित हैं

30.

गंगा, यमुना भी तो अंततः समुद्र में मिल जाती हैं, क्या ऐसे ही जीव प्रलय के बाद भगवान् में नहीं मिल जाते? (अध्याय 87)

a)

यद्यपि जल समुद्र में मिल जाता है, तो भी गंगा-यमुना का स्वतंत्र अस्तित्व बना रहता है

b)

भौतिक शरीर विलोप होने के बावजूद भिन्न भिन्न रुचियाँ वैयक्तिक रूप से रहती हैं जैसे सागर के जल का खारापन और गंगाजल का मधुर स्वाद अलग-अलग है

31.

एक प्रामाणिक आध्यात्मिक गुरु की क्या योग्यता है जिनके निर्देशन में भक्ति करके व्यक्ति भगवान् की शरण स्वीकार करके भौतिक प्रकृति के प्रभाव से मुक्त हो सकता है? (अध्याय 87)

a)

क्षोत्रियं - जिसे गुरुपरम्परा में भक्ति के विज्ञान का ज्ञान है

b)

ब्रह्मनिष्ठं - जिसने अन्य गतिविधियों को त्यागकर अपना जीवन भगवान् श्रीकृष्ण के लिए समर्पित कर दिया है

32.

जब वैष्णव मायावादियों के तर्क कि "जगत मिथ्या है" को स्वीकार नहीं करते, तो संन्यास लेने की सस्तुति क्यों करते हैं? (अध्याय 87)

a)

एक वैष्णव जीवन की भौतिकतावादी रीति को त्यागकर संन्यास ग्रहण करता है, मिथ्यात्व की धारणा के आधार पर नहीं

b)

वह प्रत्येक को पूर्ण रूप से भगवान् की सेवा में संलग्न करने हेतु अपने को समर्पित करता है

33.

इनमें से क्या काल्पनिक या मिथ्या नहीं है? (अध्याय 87)

a)

जगत

b)

घोड़े का अंडा

c)

आकाशकुसुम

d)

खरगोश के सींग

34.

श्रीकृष्ण के प्राकृतिक ऐश्वर्य क्या-क्या हैं? (अध्याय 87)

a)

षडैश्वर्य

b)

अष्टसिद्धि

c)

षट्विकार

d)

अष्ट दिव्यगुण

35.

अनेक उदाहरणों (जैसे नदी का जल समुद्र में मिलना, घड़े का मिट्टी में मिलना, रस्सी-सांप आदि) से ईश्वर की बराबरी करने वाले मायावादी दार्शिनक किस प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाते?(अध्याय 87)

a)

परमेश्वर होने पर भी वह भौतिक बंधन में कर्म के नियमों के आधार पर दुःख भोगने हेतु कैसे पतित हुआ?

b)

यदि ब्रह्म सत्य है तो उनसे उत्पन्न जगत मिथ्या कैसे हो सकता है?

36.

इनमें से कौन सा कार्य "कृष्णार्थ अखिलचेष्टा - श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए किये गए" कर्म की श्रेणी में आता है? (अध्याय 87)

a)

एक भक्त द्वारा श्रीविष्णु के मंदिर का निर्माण

b)

भगवान् की सेवा न करके एक परोपकारी द्वारा शिक्षा-संस्थान व अस्पताल खोलना

37.

इनमें से कौन सा ब्रह्मचारी स्त्री-सम्बन्ध से पूर्णतया विमुख होने के कारण श्रुतधर व वीर-व्रत भी कहलाता है? (अध्याय 87)

a)

सावित्र

b)

प्रजापत्य

c)

ब्रह्म

d)

नैष्टिक

38.

इनमें से कौन वैष्णव गुरु-परम्परा के चारों सम्प्रदायों में से एक नहीं है? (अध्याय 87)

a)

रामानुज

b)

मध्व

c)

शंकर

d)

विष्णुस्वामी

e)

निम्बार्क

39.

श्रील रूपगोस्वामी के अनुसार कैसे व्यक्ति को जीवन्मुक्त कहा जाता है? (अध्याय 87)

a)

जिसके पास भौतिक जगत का सारा ऐश्वर्य हो

b)

जो जीवन में सभी कर्जों से मुक्त हो

c)

जो पूर्णतया कृष्णभावनामृत में संलग्न हो

d)

जो संसार से तंग आकर बाबा बन जाए

40.

वेदों का चरम लक्ष्य क्या है? (अध्याय 88)

a)

भुक्ति

b)

मुक्ति

c)

सिद्धि

d)

भक्ति

41.

सामान्यतया किसके उपासक भौतिक रूप से अत्यंत ऐश्वर्यशाली हो जाते हैं? (अध्याय 88)

a)

हिमालय के हिम में वृक्ष के नीचे रहने वाले भगवान् शिव के

b)

अत्यंत ऐश्वर्यपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाले वैकुण्ठपति भगवान् के

42.

भौतिक प्रकृति के त्रिगुणों का कितनी वस्तुओं में विस्तार होता है? (अध्याय 88)

a)

3

b)

9

c)

16

d)

108

43.

भगवान् शिव के भक्तों की तथाकथित समृद्धि क्यों लाभदायक नहीं है? (अध्याय 88)

a)

शिवजी के भक्त केवल भौतिक गुणों के मामले में समृद्ध हैं

b)

यह तथाकथित प्रगति भौतिक अस्तित्व में बंधन का कारण है

c)

निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन - मानवजीवन का ध्येय त्रिगुणातीत होना है

44.

महाराज युधिष्ठिर ने विशाल यज्ञभूमि में किससे प्रश्न किया कि "शिव-भक्त भौतिक ऐश्वर्यों के स्वामी हो जाते हैं, जबकि भगवान् विष्णु के भक्त नहीं होते?" (अध्याय 88)

a)

श्रीकृष्ण

b)

नारद मुनि

c)

शुकदेव गोस्वामी

d)

व्यासदेव

45.

जब एक भक्त दरिद्र या समृद्ध होता है तो उसका कारण क्या होता है? (अध्याय 88)

a)

पूर्व पापकर्म या पुण्यकर्म

b)

लापरवाही या मेहनत

c)

श्रीभगवान की व्यवस्था ताकि भक्त पूर्णरूपेण उन पर निर्भर हो जाए

46.

एक भक्त और एक सामान्य व्यक्ति को प्राप्त दुखों में क्या अंतर है? (अध्याय 88)

a)

भक्त को ज्यादा और सामान्य व्यक्ति को कम दुःख प्राप्त होता है

b)

भक्त जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसता रहता है जबकि सामान्य मनुष्य बंधन में नहीं पड़ता

c)

माता द्वारा दिए दण्ड और शत्रु द्वारा दिए दण्ड के समान विशाल अंतर होता है

47.

देवताओं का आशीर्वाद लेना अल्पबुद्धि का परिचायक क्यों है? (अध्याय 88)

a)

देवताओं के आशीर्वादों का फल स्थायी होता है

b)

इनका फल सदैव शुभकारी होता है

c)

व्यक्ति भौतिक ऐश्वर्य के प्रभाव में अत्यंत विनम्र हो जाता है

d)

व्यक्ति अपने उपकारक की उपेक्षा करने लगता है

48.

इनमें से कौन वरदान देने से पहले यह विचार करते हैं कि यह भक्त के लिए हितकारी होगा अथवा नहीं? (अध्याय 88)

a)

ब्रह्मा

b)

विष्णु

c)

शिव

49.

शकुनिपुत्र वृकासुर को तीनों अधिष्ठाता देवताओं में से सर्वाधिक शीघ्र प्रसन्न होने वाले शिवजी की उपासना का परामर्श किसने दिया? (अध्याय 88)

a)

शकुनि ने

b)

नारद मुनि ने

c)

नरकासुर ने

d)

बाणासुर ने

50.

तमोगुणी वृकासुर शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कहाँ यज्ञ करने गया? (अध्याय 88)

a)

सोमनाथ

b)

बैजनाथ

c)

केदारनाथ

d)

नीलकण्ठ

51.

वृकासुर अपना मांस काट-काटकर _________ दिनों तक भी जब शिवजी के प्रत्यक्ष दर्शन करने में असफल रहा तो अगले दिन स्नान करके गीले ही अपना सिर काटकर अग्नि में अर्पित करने को उद्यत हुआ और दयार्द्र शिवजी तुरंत प्रकट हो गए | (अध्याय 88)

a)

2

b)

6

c)

18

d)

54

52.

वृकासुर ने शिवजी से अभीप्सित वर प्राप्त का आश्वासन पाकर क्या माँगा? (अध्याय 88)

a)

जिस किसी के सिर पर भी मेरे हाथ का स्पर्श वो तत्काल धनी हो जाए

b)

जिस किसी के सिर पर भी मेरे हाथ का स्पर्श उसकी तत्काल मृत्यु हो जाए

53.

ब्रह्माण्ड में स्थित स्थानीय वैकुण्ठलोक का क्या नाम है जहां भगवान् विष्णु रहते हैं? (अध्याय 88)

a)

रक्तद्वीप

b)

श्वेतद्वीप

c)

नीलद्वीप

d)

कालद्वीप

54.

शास्त्रों के अनुसार इस भौतिक जगत में कौन से स्थान सतोगुणी माने जाते हैं? (अध्याय 88)

a)

वन में स्थित निवासस्थान

b)

बड़े-बड़े नगरों, कस्बों, ग्रामों में स्थित आवासगृह

c)

चारों पापकर्मों कीी प्रधानता वाले आवासगृह

d)

विष्णुमंदिर के आवासगृह

55.

अंततः शिवजी और पीछे-पीछे वृकासुर जब श्वेतद्वीप पहुंचे तो भक्तवत्सल भगवान् नारायण किस रूप में प्रकट हुए? (अध्याय 88)

a)

आदर्श गृहस्थ

b)

उद्दण्ड राजा

c)

वृद्ध ब्राह्मण

d)

आदर्श ब्रह्मचारी

56.

भगवान् ने किस प्रकार वृकासुर को आकर्षित करके उसका उद्धार किया और शिवजी को आसन्न संकट से मुक्त किया? (अध्याय 88)

a)

भगवान् की द्युतिमान कांति से वृकासुर आकर्षित हो गया

b)

अपने पिता का नाम सुनकर अपना परिचित मान लिया

c)

शरीर का महत्त्व बताया जिसे असुर महत्त्वपूर्ण समझता है

d)

भगवान् के मधुर वचनों से असुर को शांति प्राप्त हुई

e)

माया से भ्रमित होकर तुरंत अपना हाथ सिर पर रख लिया

57.

महाजनों (महान भक्तों) के प्रति अपराध करने के परिणाम को जानते हुए हमें उनके प्रति कैसा व्यवहार करना चाहिए?

4 lines
58.

परम सत्य को समझने की प्रगति किन तीन रूपों में होते है? (अध्याय 87)

a)

ॐ, तत्, सत्

b)

भुः, भुवः, स्वः

c)

आधिदैविक, आधिभौतिक, आध्यात्मिक

d)

ब्रह्म, परमात्मा, भगवान्