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Worksheetskuldev and sukhdev
Total questions: 11
Worksheet time: 13mins
Read the passage carefully and answer the following quetions
६०० साल पहले की बात है एक बड़ा सा तालाब था जिसस्के पास एक बहुत बड़ा महल था। महाराजा विष्णु प्रताप सिंह की बीवी महारानी राधा प्रताप सिंह की खबर आई की महारानी राधा प्रताप सिंह पैठसे थी। महारानी राधा को दो बेटे हुए दोनों जुड़वाँ थे एक का नाम था कुलदेव प्रताप सिंह और दूसरे का नाम था सुखदेव प्रताप सिंह। कुलदेव और सुखदेव में बहुत भाई चारा था दोनों पड़ने में और बाकी हर चीज़ में होशिआर थे। फिर महाराजा विष्णु और महारानी राधा को किसी काम से बाहर जाना पढ़ा जाते- जाते विष्णु और राधा अपने दोनों बेटों को अच्छे संस्कार सिखाये और जाने के दिनपर रानी और राजा ने अपने दोनों बेटों को आशीर्वाद दिया और कहा की अपना ख्याल रखना हम जल्द से जल्द लौटेंगे, बेटों ने माँतापिता को शुभम अस्तु कहा उसके बाद वोह चले गए। कुलदेव और सुखदेव २० वर्ष के थे जब खबर आयी की कुलदेव और सुखदेव के मातपिता इस दुनिया में अब नहीं रहे बताया गया की उनके मातापिता एक दूसरे साम्राज्य के राजा से मरगये । एक साल गुज़रगाया दोनों ने शादी कर्ली कुलदेव की बीवी का नाम था शकुंतला पूरा नाम शकुंतला कुलदेव प्रताप सिंह और सुखदेव की बीवी का नाम बासुंदी पूरा नाम बासुंदी सुखदेव प्रताप सिंह। एक दिन सुकदेव कुलदेव के कमरे में आता है और कहता है ' कुलदेव हमारे पिता अब नहीं रहे और तुम मुझसे १० मिनट बड़े हो तो राजगति की ज़िमींदारी लेलो ' कुलदेव बोलता है 'नहीं नहीं तुम मेरे भाई हो राजगति पर तुम्हारा भी हक़ बनता है तुमलेलो राजगति की ज़िमींदारी' 'कुलदेव जब तुम थख जाओ तब राजगति की ज़िमींदारी तुम मुझे सौंप देना' कुलदेव बोलता है 'पर ' ऐसे में कुलदेव की बीवी बोलती है ' सुनिये अगर सुखदेव इतना कह रहा तो लेलीजिये न ज़िमींदारी ' कुलदेव बोलता है 'ठीके अभी तोह राजगति की ज़िमींदारी में ले रहा हूँ पर बाद में तुम्हे सौंप दूंगा ' सुखदेव ठीके बोलकर अपने कक्ष में वापस चला गया। कुलदेव राजगति ज़िमींदारी लेचुका था और यह बात कुलदेव के दोस्त गौरव को पता चल गयी तोह उसने सोचा की यह अच्छा मौका है इन भाईओं को अलग करने का उसने एक षड्यंत्र रचा और उन दोनों को फसा दिया। एक बार कुलदेव का दोस्त गौरव सुखदेव के पास आया। सुखदेव पूछता है 'अरे गौरव तुम यहाँ कैसे चलो तुम्हे कुलदेव के पास ले जाता हूँ ' गौरव बोलता है ' नहीं नहीं में तोह तुमसे मिलने आया हूँ मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी ' सुखदेव बोलता है ' बोलो क्या बात है ?' गौरव बोलता है ' बात यह थी की पता है की तुम्हारा भाई ज़िमींदारी ले रहा है तोह तुम्हे पता है मैं किसी काम से कुलदेव के पास जा रहा था तभी मैंने सुना की कुलदेव अपनी पत्नी से कह रहा था की ' शकुंतला अब राजगति की ज़िमींदारी मेरी है तोह अब में राजगति की ज़िमींदारी सुखदेव को नहीं दूंगा वह हमेशा से गैरज़िमींदार रहा है ' गौरव बोलता है मेने यह सुना। सुखदेव गुस्सेसे कुलदेव के पास गया और चिलकर बोलता है ' झूठे धोकेबाज़ तुमने मुझसे जूथ बोला ' कुलदेव प्यार से पूछता है 'अरे सुखदेव क्या हुआ चिला क्यों रहे हो ' सुखदेव बोलता है ' मेने ऐसा कया पाप किया था की तुम मुझे यह सज़्ज़ा दे रहे हो ' कुलदेव पूछता है 'क्या बोल रहे हो तुम मुझे कुछ समाज नहीं आराहा ' सुखदेव बोलता है ' अरे वाह बड़े भोले बन रहे हो अब हमारे बीच एक युद्ध होगा परसों तीन बजे ' सुखदेव की यही बात सुनकर कुलदेव को गुस्सा आ गया और तभी कुलदेव चिलाकर बोलता है ' बस ,मैं सुनता हूँ तोह तुम बोलते जा रहे हो कोई युद्ध नहीं होगा ' होगा सुखदेव छीलते हुए बोला। कुलदेव ' ठीके अब जब तुमने युद्ध की चुनौती दी है तो मुझे स्वीकार है तो फिर मिलते अपनी अपनी सेना के साथ परसों तीन बजे' ठीके ' सुखदेव बोला। हां हां ठीके। उसदिन कुलदेव अपनी ३०,००० की सेना और सुखदेव अपनी २०,००० की सेना लेकर मैदान में आये। दोनों सेना के एक एक सैनिक शंक बजाई और जंग शुरू की। जंग बाद कुलदेव की २००० सेना मर गयी और सुखदेव की ९००० सैना मर गयी अब कुलदेव की १८००० सेना बची थी और सुखदेव की ११००० बची। अगले दिन वापस जंग हुइ उस दिन सुखदेव ने कुलदेव की सेना को मार गिरगया और सुखदेव ने एक ऐसा तीर चलाया की वह सीधा जाकर कुलदेव के सीने पर लगा कुछ ही मिनट बाद सुखदेव को गौरव की हसने की आवाज़ आयी तो सुखदेव पूछता है ' तुम हस क्यों रहे हो ?' गौरव जवाब देता है ' बेवकूफ कुलदेव ने तोह ऐसा कुछ नहीं बोला वोह तोह मेने षड्यंत्र रचा और कुलदेव को मरवाया और हा तुम्हारी बीवी और भाभी मेने उनको भी मार दिया ' उसके बाद सुखदेव महाराजा बन गया और महाराजा बनकर गौरव को कुलदेव को मेरे हाथों मरवाने के लिए और दोनों रानियों को मरवाने के लिए सजा दी गयी की इससे आग के कांटें वाले गडे मेंमरने के लिए फ़ेंक दिया जाये पर उस दिन से सुखदेव अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाया। कहानी से सीख मिलती है की कभी किसी अनजान पर विश्वास मत करो और अगर करते भी हो तो एक बार अनुरूप कर लेना चाहिए।
धन्यवाद
महरानी राधा के कितने बेटे हुए ?
एक
दो
तीन
चार
पांच
महारानी राधा के पति महाराजा का नाम क्या था ?
गौरव वागखड़े कुशल
विष्णु प्रताप सिंह
वसंत सेनापति कमल
महारानी राधा के बड़े बेटे का नाम क्या था ?
कुलदेव
सुखदेव
गौरव
वसंत
कुलदेव और सुखदेव की बीवियों के नाम क्या थे ?
शकुंतला और बासुंदी
वसुंधरा और शीला
गौरव किसका दोस्त था ?
कुलदेव
सुखदेव
वसंत
कुलदेव किस के षड़यंत्र से मरा ?
गौरव के षड़यंत्र से
सुखदेव के षड़यंत्र से
वसंत सेनापति के षड़यंत्र से
इनमेंसे कोई भी नहीं
कुलदेव और सुखदेव कितने वर्ष के थे जब उनकी शादी हुई ?
२० वर्ष
३० वर्ष
४० वर्ष
५० वर्ष
आपने इस कहानी से क्या सीखा ?
किसी अनजान की बात पर विशवास मत करो और अगर करते भी हो तो पहले उस बात को एक बार अनुरूप कर लेना चाहिए वर्ण बेवजह किसी का बुरा हो सकता है I
किसी अनजान पे बिना अनुरूप किये विशवास कर लेना चाहिए I
अगर और चाहिए तो मुझे परसनली व्हॉट्सैप करें
धन्यवादम
