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Worksheetsअलंकार
Total questions: 20
Worksheet time: 13mins
कौन-कौन से अलंकार हैं?
रौद्र
अनुप्रास
बहुव्रीहि
यमक
वीर
अलंकार के कितने भेद होते हैं?
(a)
अलंकार किसे कहते हैं?
इनमें से कौन-सा अलंकार शब्दालंकार नहीं है?
अनुप्रास अलंकार
यमक अलंकार
श्लेष अलंकार
रूपक अलंकार
इनमें से कौन-सा अलंकार शब्दालंकार है?
उपमा अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
यमक अलंकार
रूपक अलंकार
अर्थलंकार किस प्रकार काव्य की शोभा बढ़ाते हैं?
कविता में शब्दों के चमत्कार
कविता में शब्दों की बार-बार आवृत्ति
कविता के अर्थ में चमत्कार
कविता में अर्थ की आवृत्ति
इनमें से काव्य का गहना कौन-सा है?
कर्णफूल
कंगन
रूपक
चूड़ामणि
इनमें से उत्प्रेक्षा अलंकार की क्या विशेषता है?
दो या दो से अधिक बार वर्ण की आवृत्ति
जब एक शब्द में कई अर्थ चिपके हों!
उपमान और उपमेय में कोई अंतर न रहे
काव्य में 'मानो' 'जानो' आदि सम्भावना वाले शब्द
जब उपमान में उपमेय की संभावना बताये जाये तब..?
काव्य में उत्प्रेक्षा अलंकार होता है
काव्य में रूपक अलंकार होता है
काव्य में उपमा अलंकार होता है
काव्य में मानवीकरण अलंकार होता है
मानवीकरण अलंकार की विशेषता क्या है?
काव्य में जब बात बढ़ा-चढ़ाकर की जाये
प्रकृति की सुंदरता का वर्णन हो
प्रकृति को मानव-व्यवहार करते दिखाया जाये
काव्य में जब शब्द दो या दो से अधिक बार आये
रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम! किस अलंकार का उदाहरण है?
अनुप्रास अलंकार
उपमा अलंकार
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
"कनक कनक ते सौ गुनी।।" काव्य में कौन-सा अलंकार है?
श्लेष अलंकार
यमक अलंकार
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून|
पानी गए न उबरें, मोती मानुष चून||
इस दोहे में श्लेष अलंकार है| मगर क्यों?
पानी शब्द की आवृत्ति दो या दो से अधिक बार
पानी शब्द के अलग-अलग अर्थ
"श्लेष" का अर्थ है चिपका हुआ
पानी शब्द के अनेक अर्थ हैं
पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो। इस पद में कौन-सा अलंकार है?
उपमा अलंकार
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
अतिश्योक्ति अलंकार
जान पड़ता नेत्र देख बड़े बड़े|
हीरकों से गोल नीलम हैं जड़े||
प्रस्तुत काव्य में कौन-कौन-से अलंकार हैं?
उपमा और उत्प्रेक्षा
रूपक और उत्प्रेक्षा
अनुप्रास और मानवीकरण
अतिश्योक्ति एवं उपमा
मेघ आये बड़े बन-ठन के सँवर के।.. इन पंक्तियों में क्या कहा गया है?
मेघ का मानवीकरण
मेघ के बारे में अतिश्योक्ति
मेघ के अतिथि से तुलना
मेघ की सुंदरता
किन पंक्तियों में अतिश्योक्ति का वर्णन है?
चारु चंद्र की चंचल किरणें
खेल रही थीं जल-थल में
राणा ने सोचा इस पार
तब तक चेतक था उस पार।।
फूल हंसे कलियां मुसकाईं।
अनुचरों से बादलों ने स्वर्ण की पोशाक धारी|
बीती विभावरी जाग री।
अम्बर-पनघट में डुबों रही, तारा-घट उषा नागरी।
प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-कौन से अलंकार हैं?
मानवीकरण और अतिश्योक्ति
अतिश्योक्ति और रूपक
रूपक और मानवीकरण
मानवीकरण और उपमा
रूपक अलंकार का भेद कौन-सा है?
हनुमान की पूँछ में लगन न पायी आगि।
सगरी लंका जल गई, गये निसाचर भागि।।
आ रही रवि की सवारी|
नव किरण से रथ सजा है, कलि कुसुम से पता सजा है|
सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात |
मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतप परयौ प्रभात ||
मैया मैं तो चंद्र-खिलौना लैहौं|
जैहौं लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं॥
कौन-कौन-से अलंकार अर्थालंकार हैं?
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
उपमा अलंकार
अनुप्रास अलंकार
अतिश्योक्ति अलंकार
