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WorksheetsPratyaya
Total questions: 40
Worksheet time: 7mins
बोर्ड परीक्षा 2020-21 के लिए निर्धारित प्रत्यय कौन-से हैं ?
मतुप् - तद्धित प्रत्यय
त्व - तद्धित प्रत्यय
टाप् - स्त्री प्रत्यय
तव्यत् - कृत प्रत्यय
तद्धित प्रत्यय शब्दों के अन्त में जुड़कर किन दो प्रकार के पदों की रचना करते हैं ?
संज्ञा
अव्यय
क्रिया
मतुप् प्रत्यय का प्रयोग दो प्रकार से होता है, क्या आप जानते हैं ?
अकारान्त / आकारान्त शब्दों के साथ यह 'वत्' के रूप में आता है |
अन्य स्वरान्त शब्दों के साथ यह 'मत्' के रूप में आता है |
ये दोनों विकल्प सही नहीं हैं |
मतुप् प्रत्यय जिन तीन अर्थों में प्रयुक्त होता है वे हैं ------------|
से युक्त
वाला
वाली
कोई भी नहीं
क्या मतुप् प्रत्यय से युक्त शब्दों के रूप तीनों लिंगों में अलग-अलग चलते हैं ?
हाँ
नहीं
त्व प्रत्यय से युक्त शब्द अव्यय बन जाता है | क्या यह कथन सत्य है ?
हाँ
नहीं
निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है ?
स्त्री प्रत्यय का प्रयोग स्त्रीलिंग शब्दों के साथ किया जाता है |
स्त्री प्रत्यय का प्रयोग पुल्लिंग शब्दों से स्त्रीलिंग शब्द का निर्माण करने के लिए किया जाता है |
टाप् किस श्रेणी का प्रत्यय है ?
कृत प्रत्यय
तद्धित प्रत्यय
स्त्री प्रत्यय
मतुप् प्रत्यय किसी शब्द के अन्त में कैसे जुड़ता है ?
मत् / वत् के रूप में
म / व के रूप में
जब त्व प्रत्यय किसी शब्द के अन्त में लगता है,तब उस शब्द का स्वरूप निम्न में से किस प्रकार का होता है ?
त्व
त्वम् / त्वं
तां / ताम्
टाप् प्रत्यय लगने के बाद शब्द का स्वरूप बन जाता है ............
अकारान्त पुल्लिंग
अकारान्त नपुंसकलिंग
आकारान्त स्त्रीलिंग
गणेशः गुणवान् आसीत् |
गुण + मतुप्
गुण + वान्
गुणं + मतुप्
बुद्धि+मतुप् छात्राः व्यर्थमेव कालं न यापयन्ति |
बुद्धिमान्
बुद्धिमानाः
बुद्धिमन्तः
रूप + मतुप् नरः श्रेष्ठः मन्यते |
रूपवत्
रूपमान्
रूपवान्
सदाचार + मतुप् विवेकी जनः सम्मानं लभते |
सदाचारी
सदाचारमान्
सदाचारवान्
नीति + मतुप् जनः उत्तमः भवति |
नीतिवन्तः
नीतिवान्
नीतिमान्
चरित्र + मतुप् जनाः सर्वोत्तमाः भवन्ति |
चरित्रमान्
चरित्रवान्
चरित्रवन्तः
यः सत्यवादी निष्ठा + मतुप् भवति सः श्रेष्ठः |
निष्ठावतः
निष्ठावन्तः
निष्ठावान्
विनय + मतुप् छात्र सुशीलः अस्ति |
विनयी
विनयवाणः
विनयवान्
फल + मतुप् वृक्षाः नमन्ति |
फलमान्
फलवान्
फलवन्तः
वीराः अभ्युदये धैर्य + मतुप् भवन्ति |
धैर्यवताः
धैर्यवन्तः
धैर्यवान्
स्वर्णस्य महत् + त्व सर्वे स्वीकुर्वन्ति |
महत्ता
महताम्
महत्वम्
पुष्पाणां रमणीय + त्व दृष्ट्वा जनाः प्रसीदन्ति |
रमणीयताम्
रमणीयत्वम्
रमणीयत्व
पृथिव्याः गुरु + त्व सर्वे जानन्ति |
गुरुताम्
गुरुत्व
गुरुत्वम्
समत्वं योग उच्यते |
सम + त्वम्
स + मत्वाम्
सम + त्व
सैनिकानां वीरत्वम् अद्भुतं अस्ति |
वीर + त्वम्
वीर + त्व
वीर + तवम्
दीनत्वं न हि शोभते |
दीन + तव
दीन + त्व
दीन + त्वं
विशाल + त्व हि सहृदयस्य लक्षणम् |
विशालता
विशालत्व
विशालत्वम्
कवित्वं दुर्लभं लोके |
कवि + त्वं
कवि + त्व
कवित् + वं
मनसः चञ्चल + त्व वशीकरणीयम् |
चन्चलतवम्
चञ्चलत्व
चञ्चलत्वम्
बालिका विद्यालयात् आगच्छति |
बालकः + टाप्
बालकः + चाप्
बालक + टाप्
नास्ति मातृसमा प्रिय + टाप् |
प्रियम्
प्रिया
प्रियः
दीपिका धावने कुशल + टाप् |
कुशली
कुशलिनी
कुशला
कोकिला मधुरस्वरेण गायति |
कोकिला + टाप्
कोकिल + आ
कोकिल + टाप्
उद्यानानां शोभा अनुपमा भविष्यति |
अन् + उपमा
अनुपम + टाप्
अनुपम् + टाप्
धन्या इयम् दीपावली |
धन्य + टाप्
धन्य् + टाप्
धन्या + टाप्
भाषासु मुख्या मधुरा गीर्वाणवाणी |
मधुर + आ
मधुर + टाप्
मधुरम् + टाप्
अजा तृणं चरति |
अजा + टाप्
अजः + टाप्
अज + टाप्
सा समाजस्य सेविका अस्ति |
सेवक + टाप्
सेविक + टाप्
सेविका + टाप्
अध्यापिका सन्मार्गं दर्शयति |
अध्यापिका + टाप्
अध्यापक + आ
अध्यापक + टाप्
