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Bhagavad Gita As It Is DAY-65 (18.19-28)

Total questions: 15

Worksheet time: 1hrs 25mins

Name
Class
Date
1.

तमोगुण किस प्रकार कार्य करता है? (18.19)

a)

प्रकाशक

b)

भौतिकवादी

c)

आलस्य तथा प्रमाद का प्रेरक

2.

इनमें से कौन सा गुण मुक्ति का साधन है? (18.19)

a)

सतोगुण

b)

रजोगुण

c)

तमोगुण

d)

कोई भी नहीं, प्रकृति के सारे गुण बन्धनकारी हैं

3.

समस्त जीवों में एक ही आत्मा है, यद्यपि पूर्व कर्मों के अनुसार उनके शरीर भिन्न-भिन्न हैं - यह कैसा ज्ञान है जो आत्मसाक्षात्कार का एक पहलू बताया गया है? (18.20)

a)

निराकार

b)

साकार

4.

रजोगुण से उत्पन्न, राजसी ज्ञान के कारण व्यक्ति की क्या धारणा होती है? (18.21)

a)

एक शरीर दूसरे शरीर से भिन्न है, क्योंकि उनमें चेतना का विकास भिन्न प्रकार से होता है

b)

शरीर स्वयं आत्मा है और शरीर के परे कोई पृथक् आत्मा नहीं है, चेतना अस्थायी है

c)

इस शरीर के परे कोई विशेष जीवात्मा या परम आत्मा नहीं है; और यह शरीर क्षणिक अज्ञानता का प्रकाश है

5.

इनमें से कौन सा ज्ञान तामसी, तमोगुण से उत्पन्न कहा जाता है? (18.22)

a)

इस शरीर से परे आत्मा सम्बन्धी ज्ञान

b)

जिस ज्ञान से लौकिक तर्क तथा चिन्तन (मनोधर्म) द्वारा नाना प्रकार के सिद्धान्त तथा वाद जन्म ले

c)

शरीर को सुखमय बनाये रखने वाले ज्ञान को

6.

तामसी ज्ञान के क्या लक्षण हैं? (18.22)

a)

सत्य को जाने बिना अति तुच्छ कार्य में लिप्तता

b)

प्रमाणों या शास्त्रीय आदेशों के माध्यम से अर्जित

c)

खाने, सोने, रक्षा करने तथा मैथुन करने का ज्ञान

d)

परम सत्य से सम्बंधित

e)

धन, शारीरिक आवश्यकताओं की तुष्टि

7.

कौन सा कर्म सात्त्विक कहलाता है? (18.23)

a)

जो कर्म अनियमित है

b)

जो आसक्ति, राग या द्वेष से युक्त है

c)

कर्मफल की चाह से किया जाता है

d)

शास्त्रों में संस्तुत वृत्तिपरक कर्म

e)

परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए

8.

कौन सा शब्द बताता है कि रजोगुणी कर्म "अत्यंत प्रयासपूर्वक" किया जाता है? (18.24)

a)

कामेप्सुना

b)

साहंकारेण

c)

बहुलायासं

9.

उत्तरदायित्व से हीन कर्म (पौरुषम्) तमोगुणी क्यों माना जाता है? (18.25)

a)

यह कल्याणकारी कार्य शास्त्रीय आदेशों के आधार पर किया जाता है

b)

यह प्रायः अहिंसा पर आधारित और अन्य जीवों के लिए सुखदायी होता है

c)

ऐसा कर्म अपने निजी अनुभव (सामर्थ्य) के आधार पर किया जाता है जोकि मोह है और समस्त मोहग्रस्त कर्म तमोगुण है

10.

तामसी कर्म के क्या लक्षण हैं? (18.25)

a)

मोहवश

b)

शास्त्रीय आदेशों की अवहेलना करके

c)

भावी बन्धन की परवाह किये बिना

d)

हिंसा अथवा अन्यों को दुख पहुँचाने के लिए

e)

कर्त्तव्य की भावना से

11.

सात्त्विक कर्ता कैसा होता है? (18.26)

a)

कष्टों की कोई चिन्ता नहीं होती

b)

मिथ्या अहंकार तथा घमंड से परे

c)

सदैव उत्साहपूर्ण रहता है

d)

सफलता या विफलता की परवाह नहीं करता

e)

सुख-दुख में समभाव रहता है

12.

रजोगुणी कर्ता का स्वभाव कैसा होता है? (18.27)

a)

घर-बार, पत्नी तथा पुत्र के प्रति अत्यधिक विरक्त

b)

संसार को यथासम्भव आरामदेह बनाने में ही व्यस्त

c)

इन्द्रियतृप्ति हेतु कोई भी अनुचित कार्य करता है

d)

लोभी, ईर्ष्यालु, अपवित्र और सुख-दुख से विचलित

e)

चिन्ता करता है कि उसकी कमाई शुद्ध है या अशुद्ध

13.

तमोगुणी कर्ता किस प्रकार कार्य करता है? (18.28)

a)

प्रकृति के गुणों के अनुसार

b)

शास्त्रों के आदेशों के अनुसार

14.

तमोगुणी कर्ता के क्या लक्षण होते हैं? (18.28)

a)

प्राकृतः - भौतिकवादी, अलसः - अत्यन्त आलसी

b)

स्तब्धः - हठी, शठो - कपटी, विषादी - सदैव खिन्न

c)

नैष्कृतिको - अन्यों का अपमान करने में पटु

d)

दीर्घसूत्री - घंटे के काम को वर्षों तक घसीटते हैं

e)

युक्तः - शास्त्रों का पालन करता है

15.

प्रकृति के तीन गुणों के अनुसार ज्ञान, कर्म तथा कर्ता के भेद को जानकर आप निस्संदेह स्वयं को जांच चुके हैं |

एक चीज बताएं जो आप अपने में बदलना चाहते हैं?

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