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Total questions: 8
Worksheet time: 80secs
सुमिरन का अर्थ
शाशवत नाम की तरंग के साथ मन को जोड देना
अलौकिक नाम
मन के अनुसार जाप
कोई नहीं
दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय। जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ॥
ये दोहा किसने लिखा हुआ है?
कबीर दास
रावी दास
दोनों
कोई नहीं
शरीर में कुल चक्र कितने होते है ?
5
7
8
9
सुख में (a) ना किया, दु:ख में किया याद ।
कह कबीर ता दास की, कौन सुने फरियाद
ब्रह्मज्ञानi की यात्रा आज्ञाचक्र से कौन से चक्र तक की है?
मणिपुर
ब्रह्मरन्ध्रा
स्वाधिष्ठान
मूलाधार
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
(इसको पूर्ण करिए)
.कर मनका डार दे, मनका ही बस
मनका मन से फ़ेर
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।
कोई नहीं
ब्रह्म ज्ञान के समय कौन सा चक्र जाग्रत होता है?
स्वादिष्ठान
अनाहत
विशुद्ध
आज्ञाचक्र
माला तो कर में फिरे, जीभि फिरै मुख माँहि ।
मनुवाँ तो दहुँ दिसि फिरै, यह तौ सुमिरन नाहिं ॥
सूरदास
तुलसीदास
मीराबाई
कबीरदास
