NEW
Font size
Worksheetsरस
Total questions: 34
Worksheet time: 17mins
रस को कहा जाता है |
वाक्य
काव्य की आत्मा
व्याकरण की आत्मा
रस के अंग होते है|
9
6
4
रस की संख्या मानी गई है |
9
13
16
स्थायी भाव का अर्थ है |
आलम्बन
विभाव
प्रधान भाव
विभाव के प्रकार होते है|
2
4
6
आलम्बन विभाव के प्रकार होते है|
2
3
4
स्थायी भाव की उत्पत्ति के कारण को कहते है |
विभाव
अनुभाव
संचारी भाव
वाणी तथा अंगों के द्वारा प्रकट भाव कहलाता है|
विभाव
अनुभाव
स्थायी भाव
संचारी भावों की संख्या मानी गई है|
13
33
43
संचारी भाव का दूसरा नाम है |
आलम्बन
अनुभाव
व्यभिचारी भाव
शोक स्ठायी भाव का रस है |
करुण रस
रौद्र रस
शांत रस
वीर रस का स्थायी भाव है |
जुगुप्सा
उत्साह
रति
प्रेमी से सदैव बिछुड़ जाने पर रस उत्पन्न होता है |
श्रृंगार रस
करुण रस
रौद्र रस
रसराज कहा जाता है |
वात्सल्य रस
वीर रस
श्रृंगार रस
जेहि दिसि बैठे नारद फूली |सो दिसि तेहि न विलोकी भूली |पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं |देखि दसा हरिगन मुसकाहीं | --पंक्तियों में रस है|
श्रृंगार रस
संयोग श्रृंगार रस
हास्य रस
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोय |- पंक्तियों में रस है|
शांत रस
श्रृंगार रस
भक्ति रस
माँ जब जब तुम अकुलओगी | हम शीश कटाने आएँगे | पंक्तियों में रस है|
करुण रस
वात्सल्य रस
वीर रस
निसिदिन बरसत नयन हमारे,
सदा रहति पावस ऋतु हम पै जब ते स्याम सिधारे॥ पंक्तियों में रस है |
संयोग श्रृंगार
वियोग श्रृंगार
करुण रस
वह खून कहो किस मतलब का जिसमे उबाल का नाम नहीं,
वह खून कहो किस मतलब का आ सके देश के काम नहीं.---पंक्तियों
में रस है |
वीर रस
रौद्र रस
करुण रस
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।
भोर भयो गैयन के पाछे मधुवन मोहि पठायो।--पंक्तियों में रस है |
वात्सल्य रस
करुण रस
भक्ति रस
भरतमुनि के अनुसार रसों की संख्या कितनी है?
आठ
नौ
दस
ग्यारह
करुण रस का स्थायीभाव क्या है?
रति
वीभत्स
रौद्र
शोक
'निर्वेद' किस रस का स्थायीभाव है?
करुण
वात्सल्य
शांत
वीर
'क्रोध' किस रस का स्थायीभाव है?
रौद्र
करुण
वीभत्स
भयानक
रसों की संख्या मुख्य रूप से नौ है,बाद में कौन से दो रस सम्मिलित किए गए हैं?
भयानक और रौद्र
वात्सल्य और रौद्र
भक्ति और वात्सल्य
भक्ति और शांत
निम्नलिखित में से कौन-सा रस का अंग नहीं है?
स्थायीभाव
आविर्भाव
विभाव
अनुभाव
शृंगार रस के भेद कौन-से हैं?
आलंबन-उद्दीपन
संयोग-वियोग
विभाव-अनुभाव
आश्रय-विषय
निम्नलिखित पंक्तियों में कौन - सा रस है?
तुम नहीं धमकी हमें दो, धम्म से भू पर गिरोगे।
तुम न हमको जला पाओगे, स्वयं जलकर मरोगे।
करुण
रौद्र
अद्भूत
वीभत्स
निम्नलिखित पंक्तियों में कौन - सा रस है?
जसुमति मन अभिलाष करै
कब मेरो लाल घुटुरुवनि रैंगे, कब धरनी पग द्वेक धरै।
करुण
वात्सल्य
शृंगार
वीर
निम्नलिखित पंक्तियों में कौन - सा रस है?
एक मित्र बोले, "लाला तुम किस चक्की का खाते हो? इतने महँगे राशन में भी, तुम तोंद बढ़ाए जाते हो।"
वीर
हास्य
अद्भुत
वीभत्स
'निर्वेद' किस रस का स्थायी भाव है?
करुण
वीर
शांत
भयानक
अदभुत रस का स्थायी भाव क्या है?
शोक
रति
क्रोध
विस्मय
'घृणा' के भाव उत्पन्न होने से किस रस की पुष्टि होती है?
वीर
वीभत्स
भयानक
करुण
'करुण रस' की पुष्टि किस प्रकार के भाव उत्पन्न होने से होती है?
शोक
निर्वेद
जुगुप्सा
घृणा
