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Worksheetsचरक संहिता सूत्र स्थान 11 से 15 क्विज
Total questions: 30
Worksheet time: 15mins
उपकल्पनीय अध्याय किस चतुष्क में आता है।
भेषज चतुष्क
निर्देश चतुष्क
योजना चतुष्क
कल्पना चतुष्क
प्रत्यक्ष प्रमाण में बाधक कारण नही है।
अतिसमीप्य
अतिसूक्ष्म
अतिदूर
अनभिभव
विसर्प निम्न में से किस रोगमार्ग मैआताहै।
कोष्ठ गत
शाखा गत
अस्थि संधिगत
A+b
नियता प्रणेता च मनस किस वायु के कर्म है।
शरीरगत पराकृत वायु
लोकगत पराकृत
शरीरगत अपराकृत
लोकगत अपराकृत
विसर्प निम्न में से किस रोगमार्ग मैआताहै।
कोष्ठ गत
शाखा गत
अस्थि संधिगत
A+b
विश्व रूपा,विश्वाकर्मा पयार्य है।
वायु
आत्मा
अ,ब
दोनो मे से कोई नही।
विशेषतो अ्स्थानाम च बलकृत गुणकर्म है।
घृत
तैल
मज्जा
वसा
क्रूर कोष्ठ किसका गुण कर्म है।
घृत ,तैल
तेल,मज्जा
घृत,वसा
वसा,मज्जा
स्नेह व्यापद है।
19
15
18
16
पृस्कंदन किस का पर्याय है।
वमन
विरेचन
स्नेहन
स्वेदन
आमाशय कुपित वात मे स्वेद क्रम है।
रूक्ष,स्नीध
स्निध,रूक्ष
अ,ब
उपरोक्त मे से कोई नही।
वृषण हृदय नेत्र मे स्वेद करवाते है।
स्वेदन का निषेध है।
मृदु स्वेद करवाते है।
स्वेदन का निषेध,आवश्यक होने पर मृदु स्वेद करवाते है।
उपरोक्त मे से कोई नही।
नाडी स्वेद मे मूल भाग की मोटाई होती है।
1/2
1/4
1/8
1/6
पिण्ड स्वेद आता है।
साग्नि स्वेद
निराग्नि स्वेद
एकांग स्वेद
रुक्ष स्वेद
जीवादान ,स्तम्भ उपदृव है।
वमन के अयोग से उपदृव
वमन के अतियोग से उपदृव
दोनो
विरेचन के समयोग
वमन पश्चात संसर्जन का कर्म है।
यवागू ,विलेपी,ओदन,यूष +मांस रस
विलेपी,ओदन,यूष+मांस रस,यवागू
ओदन,विलेपी,यवागू,यूष+मांस रस
यूष+मांस रस,ओदन,विलेपी,यवागू
पीत्वा संशोधनं सम्यगायुषा ... का संदर्भ है।
उपकल्पनीय अध्याय
स्वेदाध्याय
स्नेहाध्याय
त्रि ऐषणीय अध्याय
उपकल्पनीय अध्याय अनुसार संसर्जन कर्म मै ओदन की मात्राहै।
2 पृसत
3 पृसत
4पृसत
8पृसत
स्वेदन मे निषेध है।
व्यायाम
स्नान
टहलना
स्निध भोजन करना
स्नेह व्यापद (उपदृव) मेक्या नही है।
कामला
आनाह
उत्क्लेश
ज्वर
सम्यक पृयोगनिमिता हिसर्वर्मणा सिदिध् रिष्टा संदर्भ है।
15
14
13
11
विरेचन कर्म मे त्रिवृत की मात्रा है।
1अक्ष
1कर्ष
दोनो
1 पल
निराग्नि स्वेद करते हैं।
कफ+मेद
कफ+वात
कफ+पित
कफ+वसा
अवगाहन स्वेद की कुल मात्रा है।
4 मुहूर्त
3 मुहूर्त
2 मुहूर्त
1 मुहूर्त
मन्दविभ्रंशा कोनसी स्नेह मात्रा है।
मध्यम मात्रा
प्रधान मात्रा
ह्रस्व मात्रा
कोई नहीं
कुष्ठ,प्रमेह, वात शोणित में स्नेह की किस मात्रा का प्रयोग किया जाता हैं।
प्रधान मात्रा
मध्यम मात्रा
ह्रस्व मात्रा
सभी
आचार्य चरक अनुसार स्नेह प्रविचारणा में क्या नही है।
विलेपी
ओदन
यवागू
पेया
चरक अनुसार स्नेह की प्रविचारणा है।
64
24
दोनों
20
मोह किस दोष का प्राकृत कर्म है।
वात,पित्त
पित कफ
कफ वात
त्रिदोष
बीजाभिसंस्कार किस का कर्म है।
शरीर गत प्राकृत वायु
लोक गत प्राकृत वायु
शरीर गत अप्राकृत वायु
कोई नही
