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Worksheetsअभिनव मनुष्य और संधि - Koshish Ek Asha Hindi Group Nabi sir
Total questions: 40
Worksheet time: 40mins
1. आज की दुनिया कैसी है?
आज की दुनिया विचित्र और नवीन है ।
आज की दुनिया विचित्र है ।
आज की दुनिया नवीन है ।
आज की दुनिया बहुत अच्छी है ।
रामधारीसिंह दिनकर द्वारा रचित कविता है -
मातृभूमि
तुलसी के दोहे
अभिनव मनुष्य
समय की पहचान
रामधारी सिंह दिनकर जी का जन्म कब और कहां हुआ था?
सन 1909 में बिहार प्रांत के मुंगर जिले में हुआ था ।
सन 1908 में बिहार प्रांत के मुंगर जिले में हुआ था ।
सन 1910 में बिहार प्रांत के मुंगर जिले में हुआ था ।
सन 1809 में बिहार प्रांत के मुंगर जिले में हुआ था ।
अभिनव मनुष्य कविता को __________________ से लिया गया है ।
कुरुक्षेत्र काव्य के षष्ठ सर्ग
महाभारत काव्य के षष्ठ सर्ग
रामायण काव्य के षष्ठ सर्ग
पुराण काव्य के षष्ठ सर्ग
मानव के हुक्म पर क्या चढता और उतरता है?
मानव के हुक्म पर पवन का ताप चढता और उतरता है ।
मानव के हुक्म हवा चढता और उतरता है ।
मानव के हुक्म पर धूप चढता और उतरता है ।
मानव के हुक्म पर पानी चढता और उतरता है ।
3. परमाणु किसे देखकर काँपते हैं?
परमाणु नर (मानव) के पैरों को देखकर काँपते हैं ।
परमाणु नर (मानव) के करों को देखकर काँपते हैं ।
परमाणु नर (मानव) के उंगलियों को देखकर काँपते हैं ।
परमाणु नर (मानव) के काम को देखकर काँपते हैं ।
आधुनिक पुरूष ने किस पर विजय पायी है?
आधुनिक पुरुष ने भूमि पर विजय पायी है ।
आधुनिक पुरुष ने आकाश पर विजय पायी है ।
आधुनिक पुरुष ने प्रकृति पर विजय पायी है ।
आधुनिक पुरुष ने पानी पर विजय पायी है ।
नर किन-किनको एक समान लाँघ सकता है?
नर नदि, तथा समुद्र या सागर को लाँघ सकता है ।
नर नदि, पर्वत को लाँघ सकता है ।
नर नदि, पर्वत तथा समुद्र या सागर को लाँघ सकता है ।
पर्वत तथा समुद्र या सागर को लाँघ सकता है ।
आज मनुज का यान कहाँ जा रहा है?
आज मनुज का यान गगन में जा रहा है ।
आज मनुज का यान पाताल में जा रहा है ।
आज मनुज का यान शहरों में जा रहा है ।
आज मनुज का यान घरों में जा रहा है ।
’प्रकृति प्र सर्वत्र है विजयी पुरूष आसीन’ – इस पंक्ति का आशय समझाइए । Very Important Questions your Exam
महादेवी वर्मा जी का कहना है कि मनुष्य ने प्रकृति के सभी तत्वों पर अर्थात पृथ्वि आकाश वायु जल तथा अग्नि पर विजय प्राप्त कर ली है और वे सभी मनुष्य के आदेश पर चल रहे है ।
कवि का कहना है कि मनुष्य ने प्रकृति के सभी तत्वों पर अर्थात पृथ्वि आकाश वायु जल तथा अग्नि पर विजय प्राप्त कर ली है और वे सभी मनुष्य के आदेश पर चल रहे है ।
कवि का कहना है कि मनुष्य ने मनुष्य के सभी तत्वों पर अर्थात पृथ्वि आकाश वायु जल तथा अग्नि पर विजय प्राप्त कर ली है और वे सभी मनुष्य के आदेश पर चल रहे है ।
कवि का कहना है कि मनुष्य ने प्रकृति के सभी तत्वों पर अर्थात कपड़े खेत वायु शहर तथा गांव पर विजय प्राप्त कर ली है और वे सभी मनुष्य के आदेश पर चल रहे है ।
दिनकर जी के अनुसार मानव का सही परिचय क्या है? Very Important Questions your Exam.
दिनकर जी के अनुसार मानव जितनी भी भौतिक प्रगति प्रप्त कर ले यह उसका परिचय नहीं उसका सही परिचय यह है कि,
वह मनुष्य हृदय पर जीत प्राप्त करे तथा मानव से मानव के बीच जो रूकावटें, द्वेष, दूरियाँ हैं उन्हें मिटाएँ ।
तभी वह ज्ञानी तथा विद्वान कहलाएगा ।
ऊपर के सभी ।
गिरि : पहाड :: वारि : __________________।
पहाड़
समुद्र
जल
धरती
पवन : वायु :: सिंधु : _______________ ।
जल
पर्वत
समुद्र
अग्नि
जमीन : आसमान :: आकाश : ______________ ।
जल
समुद्र
पृत्वी
पर्वत
नर : आदमी :: उर : _______________ ।
शरीर
अंग
आंख
हृदय
मातृभूमि : भगवतीचरण वर्मा :: अभिनव मनुष्य : ______ ।
प्रेमचंद
महादेवी वर्मा
विष्णु प्रभाकर
रामधारी सिंह दिनकर
"जलाशय" शब्द में संधि है -
गुण
दीर्घ
यण
वृद्धि
निम्नलिखित में से दीर्घ संधि का उदाहरण नहीं है -
विद्यार्थी
धर्मात्मा
कवींद
गणेश
समानाधिकार" संधि है -
दीर्घ
गुण
वृद्धि
अयादि
"गिरीश" में संधि है -
गुण
वृद्धि
दीर्घ
यण
"लघूत्तर" में संधि है -
गुण
व्यंजन
वृद्धि
दीर्घ
निम्नलिखित में से दीर्घ संधि का उदाहरण है -
गजेंद्र
सुरेश
भूर्जा
एकैक
"रजनीश" में संधि है -
दीर्घ
गुण
वृद्धि
यण
"वधूत्सव" में संधि है -
व्यंजन
गुण
वृद्धि
दीर्घ
"परमेश्वर" में संधि है -
गुण
यण
दीर्घ
व्यंजन
"परोपकार" में संधि है -
दीर्घ
यण
गुण
वृद्धि
"महोत्सव" में संधि है -
गुण
दीर्घ
वृद्धि
व्यंजन
"वार्षिकोउत्सव" में संधि है -
वृद्धि
गुण
दीर्घ
यण
"सप्तर्षि" में संधि है -
दीर्घ
वृद्धि
यण
गुण
"रमेश" में संधि है -
गुण
व्यंजन
दीर्घ
अयादि
"एकैक" में संधि है -
गुण
दीर्घ
वृद्धि
यण
निम्नलिखित में से वृद्धि संधि है -
सदैव
गणेश
विद्यालय
रवींद
"परमौज" में संधि है -
गुण
दीर्घ
यण
वृद्धि
"वनौषधि" में संधि है -
वृद्धि
गुण
दीर्घ
अयादि
"महौषधि" में संधि है -
व्यंजन
दीर्घ
गुण
वृद्धि
"अत्यंत" में संधि है -
यण
गुण
दीर्घ
वृद्धि
"इत्यादि" में संधि है -
वृद्धि
गुण
दीर्घ
यण
निम्नलिखित में से यण संधि का उदाहरण है -
गणेश
समादारित
स्वागत
विद्यार्थी
"चयन" में संधि है -
अयादि
गुण
दीर्घ
यण
"नयन" में संधि है -
गुण
व्यंजन
अयादि
यण
