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Worksheetsकबीर की साखी
Total questions: 16
Worksheet time: 3mins
1. कबीर के अनुसार मनुष्य को कैसी वाणी बोलनी चाहिए?
(i) अहंकार भरी सत्य वाणी
(ii) अहंकार भरी मधुर वाणी
(iii) अहंकार रहित मधुर वाणी
(iv) अहंकार रहित कटु वाणी
2. ‘तन की शीतलता’ का क्या अर्थ है?
(i) शरीर ठंडा पड़ना
(ii) प्रभु में लीन होना
(iii) सुख और शान्ति का अनुभव करना
(iv) कटु वाणी को सहना
3. ‘कस्तूरी कुंडलि बसै’ – इस पंक्ति में कुंडलि का क्या अर्थ है?
(i) मृग
(ii) नाभि
(iii) आँख
(iv) पाँव
4. ‘मन का आपा खोना’ का क्या अर्थ है?
(i) मन में का प्रभु में लीन होना
(ii) मन में अहंकार उपस्थिति
(iii) अपने आप में खोना
(iv) अहंकार का त्याग करना
5. ‘जब मैं था तब हरि नहीं’ – इस पंक्ति में ‘मैं’ का क्या तात्पर्य है?
(i) स्वयं
(ii) कवि
(iii) अहंकार
(iv) पंडित
6. कबीर क्यों दुखी हैं?
(i) पत्नी के वियोग में
(ii) प्रभु के वियोग में
(iii) उनके पास सुविधाओं का भाव है
(iv) पुत्र के वियोग में
7. निंदक क्या करता है?
(i) अच्छी बातें करता है
(ii) दूसरों की निंदा करता है
(iii) मीठी बातें करता है
(iv) अहंकार भरी वाणी बोलता है
10. ‘जलती हुई मशाल’ किसका प्रतीक है?
(i) तपस्या का
(ii) ज्ञान का
(iii) मोह का
(iv) त्याग का
1. ‘निरमल करै सुभाइ’ – इस पंक्ति में ‘सुभाई’ का क्या अर्थ है?
(i) ज्ञान
(ii) सुख
(iii) स्वभाव
(iv) निंदक
2. मीठी वाणी बोलने से सुनने वालों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(i) उनमें अहंकार आ जाता है
(ii) वे क्रोधित हो जाते हैं
(iii) वे बोलने वाले की बुराई करते हैं
(iv) सुख और शान्ति मिलती है
3. निंदक हमारे स्वभाव को कैसे निर्मल कर देंगे?
(i) दवा देकर
(ii) बिन पानी और साबुन के
(iii) पुस्तकें पढ़कर
(iv) मन्त्र द्वारा
4. सारा संसार क्यों सुखी है?
(i) संसार खाने-पीने और सोने में मग्न है
(ii) संसार अपने बड़े घरों में व्यस्त है
(iii) संसार इश्वर की भक्ति में लीन है
(iv) संसार में अच्छे लोग भरे पड़े हैं
5. हमें ज्ञान की प्राप्ति कैसे होगी?
(i) मोटी पुस्तकें पढ़कर
(ii) दोहे पढ़कर
(iii) ईश्वर-भक्ति का अक्षर पढ़कर
(iv) नास्तिक बनकर
8. ‘अषिर’ का क्या अर्थ है?
(i) पुस्तक
(ii) मोह
(iii) पंक्ति
(iv) अक्षर
9. ‘हम घर जाल्या आपणाँ’ – इस पंक्ति में ‘घर’ किसका प्रतीक है?
(i) मोह-माया
(ii) पुस्तक
(iii) विश्वास
(iv) संसार
10. ‘बिरह भुवंगम तन बसै’ – इस पंक्ति में ‘बिरह भुवंगम’ का क्या अर्थ है?
(i) पूजा पाठ का मोह
(ii) सांसारिक मोह
(iii) विरह रूपी सर्प
(iv) सुख और शान्ति
