Worksheetsनर हो न निराश करो मन को
Total questions: 20
Worksheet time: 10mins
कवि ने हमें प्रेरणा दी है-
धर्म की
शान की
कर्म की
मन की
कवि के अनुसार मनुष्य को अमरत्व प्राप्त हो सकता है-
अपने पैसे से
अपने मन से
पूजा करके
अपने व्यक्तित्व से
कवि के अनुसार 'न निराश करो मन को' का आशय है-
मनुष्य अपने प्रयत्न से सफलता को भी सफलता में बदल सकता है।
मनुष्य अपने पैसे से सफलता को भी सफलता में बदल सकता है।
मनुष्य अपने धर्म से सफलता को भी सफलता में बदल सकता है।
मनुष्य अपनी किस्मत से सफलता को भी सफलता में बदल सकता है।
नर हो ना निराश करो मन को कविता के कवि हैं -
सिया राम शरण गुप्त
मैथिली शरण गुप्त
ऐथिली शरण गुप्त
बिहारी शरण गुप्त
कवि ने किसके समान शुद्ध रहने को कहा है ?
जंगल के समान
पर्वत के समान
वायु के समान
जल के समान
कविता के अनुसार पंक्ति पूरी कीजिए-
नर हो -------------- मन को ...
प्रकाश करो
न विश्वास करो
न निराश करो
न प्रकाश करो
कविता के अनुसार पंक्ति पूरी कीजिए-
यह जन्म हुआ किस .............. अहो,
व्यर्थ
सार्थक
विनाशक
अर्थ
कविता के अनुसार पंक्ति पूरी कीजिए-
संभलो कि सुयोग न जाय चला,
...............सदुपाय भला |
कब अनर्थ हुआ
कब व्यर्थ हुआ
कब अर्थ हुआ
कब सत्यार्थ हुआ
कविता के अनुसार पंक्ति पूरी कीजिए-
......................हैं, अवलंबन को,
नर हो, न निराश करो मन को।।
परमेश्वर
भगवान्
परमात्मा
अखिलेश्वर
निज -------------------- का नित ज्ञान रहे
सम्मान
विश्वास
गौरव
संतान
केवल उद्यम से ही ----------- बनता है
भाग्य
रास्ता
मंज़िल
लक्ष्य
हमे आलस को ----------------------------होगा
संभालना
संजोना
अपने पास रखना
त्यागना
कवि ने अखिलेश्वर शब्द किसके लिए प्रयुक्त किया है ?
भगवान/ ईश्वर
मनुष्य
कविता में कैसे जीवन को धिक्कार कहा गया है ?
निष्क्रिय
सक्रिय
कविता में आसमान को किसका प्रतीक माना गया है ?
पवित्रता
धैर्यता
जीवन में सबसे अधिक महत्त्व किसे दिया जाना चाहिए ?
धन
. मान सम्मान
कवि के अनुसार किसके भरोसे नहीं रहना चाहिए ?
भाग्य के भरोसे
दूसरों के भरोसे
सुख की निधि प्राप्त करने का एकमात्र साधन क्या है ?
परिश्रम
समय
मनुष्य को किसके चले जाने से पहले समझ जाना चाहिए ?
सुयोग / अच्छा अवसर
मित्रता
कवि ने हमें प्रेरणा दी है-
धर्म की
शान की
कर्म की
मन की
