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WorksheetsCharak chikitsha 1-5
Total questions: 30
Worksheet time: 23mins
आचार्य भाव प्रकाश अनुसार ज्वर में भैषज प्रयोग का समय है।
ज्वर के पूर्व रूप में ही।
ज्वर के आदि में
ज्वर मध्य में।
ज्वर के अंत में।
नहीं पता।
किसी व्यक्ति को कुछ दिन पहले उसके मुंह में रक्त एवम मत्स्य गंध की प्रतीति हो रही थी और उसे अब हरिद्रा वर्ण का मूत्र त्याग हो रहा है यह किस अवस्था को बताता है ।
हरिद्रा मेह
रक्तपित्त
ग्रहणी
तृष्णा
नहीं पता
जटिली भाव केश यह सम्बन्धित है।
प्रमेह
राज यक्ष्मा
प्रमेह एवम कुष्ठ
प्रमेह एवम राज यक्ष्मा
गुद मार्ग से निकलने वाले रक्त के चिकित्सा मे वर्णित नहीं है।
मोच रस
वट मूल
हिबेर आदि
कोई नहीं
नहीं पता
रक्त पित्त कि 3 गति में नहीं है।
ऊर्ध्व
अधो
तिर्यक
उभय
मध्य
आयुष्याम पोष्टिकी धन्या वयसा स्थापनी परम है।
आमलकी
गुडुची
ब्राह्मी
हरितकी
नागबला
एंद्र रसायन के संबंध में सत्य नहीं है।
विष तिल प्रमाण में है।
स्वर्ण यव प्रमाण में है
काष्ठ ओषध 3यव प्रमाण में है
सभी सत्य है कोई असत्य नहीं
नहीं पता
वमन एवम उपवास किस विषम ज्वर कि चिकित्सा है।
निष्प्रतयनिक
सप्रत्यानिक
विषमप्रत्यानीक
अप्रत्यानिक
कोई नहीं
आचार्य चरक अनुसार यदि चतुर्थ क ज्वर में वात कि प्रधानता है तो वेग आरम्भ स्थान बताया है।
जंघा से
पक्वाशय से
शाखा से
शिर से
नहीं पता
स्वतंत्र अध्याय मे शूल का वर्णन एवम संख्या माना है क्रमशः।
सुश्रुत 4
माधव 4
माधव 8
हारित10
नहीं पता
चाष पक्षी के वर्ण का मूत्र त्याग होता है।
चाष मेह
भस्म मेह
तक्र मेह
नील मेह
कोई नहीं
यव प्रमेह नाशक है।
उष्ण गुण से
लघु गुण से
रूक्ष गुण से
सभी
नहीं पता
सुश्रुत अनुसार शुक्र दोष एवम प्रमेह का कारक है।
अति स्निग्ध भोजन
अति मैथुन
व्यान एवम अपान वायु एक साथ प्रकोप
तीक्ष्ण आहार
नहीं पता
नित्य मन्द ज्वर लक्षण है।
विषम ज्वर
कफ़ पित्तज ज्वर
वात बलास ज्वर
प्रलेपक ज्वर
नहीं पता
असाध्य ज्वर नहीं है।
केश सीमंत कृत
आग्नतुज ज्वर
कर्ण मूलिक शोथ के उपद्रव युक्त
कोई नहीं
नहीं पता
उर्ध्वग रक्त पित्त में देय है।
पेया
तर्पण
मांस रस
घृत
नहीं पता
ज्वर यदि शाखा अनुसा री है तो चिकित्सा हेतु श्रेष्ठ होगा।
शाखा पर अभ्यंग
शाखा उद्वरतन
रक्त मोक्षण
घृत पान
शाखा से कोष्ठ गमन चिकित्सा क्रम
महा श्वास यह लक्षण पाया जाता है।
अंतर वेग ज्वर
संतत ज्वर
अस्थिगत ज्वर
मज्जागत ज्वर
नहीं पता
खार्जुर आदि मंथ का निर्देश है।
ज्वर
रक्तपित्त
छर्दी
तृष्णा
मदात्यय
लशुन क्षीर रोग अधिकार है।
कुष्ठ
प्रमेह
उन्माद
कफज गुल्म
नहीं पता
मधवारिष्ट रोग अधिकार है।
प्रमेह
कुष्ठ
ग्रहणी
अर्श
नहीं पता
आचार्य कश्यप अनुसार उपद्रव युक्त शोथ में प्रयुक्त रसायन होगा।
नगबला रसायन
पिपली वर्धमान रसायन
जीवंती रसायन
भल्ला तक रसायन
शिलाजात रसायन
आचार्य चरक अनुसार शिलाजत सेवन कि मध्यम मात्रा होगी।
5 week 1tola per day
4week 1tola per day
4week 2tola per day
5week 2tola per day
None
आचार्य चरक अनुसार मेध्य रसायन नहीं है।
मंडूकपरणी
वचा
शंख पुष्पी
गुडुची
कोई नहीं
त्रिकंटक आदि स्नेह निर्देश है।
वात गुल्म
वात प्रमेह
वात कफ प्रमेह
त्रिदोषज प्रमेह
वात पित्त गुल्म
आचार्य भेल अनुसार त्रिफला रसायन हेतु भोजन के अंत में खाना चाहिए।
हरितकी
विभितक
आमलकी
त्रिफला 3gm
पता नहीं
आचार्य शारंगधर ने नाग बला एवम कपि कच्छू का समावेश किया है।
शुक्रल
रसायन
वाजीकर
बल्य
नहीं पता
भाव प्रकाश अनुसार हेमंत ऋतु में हरीतकी का सेवन हेतु अनुपान है।
शुंठी
पिपली
मधु
सैंधव
नहीं पता
गर्भवती नारी तथा रक्त मोक्षण किए हुए व्यक्ति में हरीतकी सर्व प्रथम निषेध किया है।
चरक
सुश्रुत
वागभट्ट
शारंगधर
भाव प्रकाश
शुक्र कि प्रवृत्ति के कारण आचार्य चरक ने माने है।
6
8
10
4
5
