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Worksheetsरस कक्षा 10
Total questions: 40
Worksheet time: 20mins
रस के अंग होते है|
9
6
4
5
रस की संख्या मानी गई है |
9
13
16
5
संचारी भावों की संख्या मानी गई है|
13
33
43
25
वीर रस का स्थायी भाव है |
जुगुप्सा
उत्साह
रति
क्रोध
रसराज कहा जाता है |
वात्सल्य रस
वीर रस
श्रृंगार रस
करुण
जेहि दिसि बैठे नारद फूली |सो दिसि तेहि न विलोकी भूली |पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं |देखि दसा हरिगन मुसकाहीं | --पंक्तियों में रस है|
श्रृंगार रस
संयोग श्रृंगार रस
हास्य रस
शान्त
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोय |- पंक्तियों में रस है|
शांत रस
श्रृंगार रस
भक्ति रस
वात्सल्य
निसिदिन बरसत नयन हमारे,
सदा रहति पावस ऋतु हम पै जब ते स्याम सिधारे॥ पंक्तियों में रस है |
संयोग श्रृंगार
वियोग श्रृंगार
करुण रस
वीभत्स रस
वह खून कहो किस मतलब का जिसमे उबाल का नाम नहीं,
वह खून कहो किस मतलब का आ सके देश के काम नहीं.---पंक्तियों
में रस है |
वीर रस
रौद्र रस
करुण रस
भयानक
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।
भोर भयो गैयन के पाछे मधुवन मोहि पठायो।--पंक्तियों में रस है |
वात्सल्य रस
करुण रस
भक्ति रस
श्रृंगार रस
भरतमुनि के अनुसार रसों की संख्या कितनी है?
आठ
नौ
दस
ग्यारह
'निर्वेद' किस रस का स्थायीभाव है?
करुण
वात्सल्य
शांत
वीर
'क्रोध' किस रस का स्थायीभाव है?
रौद्र
करुण
वीभत्स
भयानक
रसों की संख्या मुख्य रूप से नौ है,बाद में कौन से दो रस सम्मिलित किए गए हैं?
भयानक और रौद्र
वात्सल्य और रौद्र
भक्ति और वात्सल्य
भक्ति और शांत
निम्नलिखित में से कौन-सा रस का अंग नहीं है?
स्थायीभाव
भाव
विभाव
अनुभाव
शृंगार रस के भेद कौन-से हैं?
आलंबन-उद्दीपन
संयोग-वियोग
विभाव-अनुभाव
आश्रय-विषय
निम्नलिखित पंक्तियों में कौन - सा रस है?
तुम नहीं धमकी हमें दो, धम्म से भू पर गिरोगे।
तुम न हमको जला पाओगे, स्वयं जलकर मरोगे।
करुण
रौद्र
अद्भूत
वीभत्स
निम्नलिखित पंक्तियों में कौन - सा रस है?
एक मित्र बोले, "लाला तुम किस चक्की का खाते हो? इतने महँगे राशन में भी, तुम तोंद बढ़ाए जाते हो।"
वीर
हास्य
अद्भुत
वीभत्स
‘रस’ शब्द का कविता के संदर्भ में अर्थ है।
तत्व
सजावट
आनंद
दुख
रस सिद्धांत के जनक हैं?
आनंद वर्धन
भरतमुनि
मम्मट
मुनिजिन विजय
भरतमुनि ने अपनी पुस्तक............में रस सिद्धांत के विषय में लिखा।
भागवत पुराण
नाट्यशास्त्र
ध्वन्यालोक
साहित्य दर्पण
नाट्यशास्त्र में किस रस का उल्लेख नहीं है?
वीर
हास्य
अद्भुत
शांत
सूरदास किस रस के वर्णन के लिए विशेष प्रसिद्ध हैं
वीर
करुण
शांत
वात्सल्य
राम लक्ष्मण परशुराम संवाद में किन रसों का परिपाक है
भक्ति और श्रृंगार
वीर और रौद्र
करुण और भयानक
श्रृंगार और हास्य
मनुष्य के मन में हमेशा से रहने वाले भाव जो अनुकूल वातावरण में जग जाते हैं तथा जिन्हे कोई अन्य भाव दबा न सके....... कहलाते हैं।
स्थायी भाव
विभाव
अनुभाव
संचारी भाव
आश्रय की चेष्टाएँ कहलाती हैं
स्थायी भाव
विभाव
अनुभाव
संचारी भाव
यह भाव मन में कुछ देर के लिए जगते हैं, थोड़ी ही देर में लुप्त भी हो जाते हैं।इनकी संख्या 33 बताई गई है।
स्थायी भाव
विभाव
अनुभाव
संचारी भाव
यह रस के कारण माने जाते हैं
स्थायी भाव
विभाव
अनुभाव
संचारी भाव
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी
वीर
हास्य
अद्भुत
वीभत्स
यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता जमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे।
वीर
हास्य
अद्भुत
वात्सल्य
यशोदा हरि पालने झुलावै । हलरावै ,दुलराइ मल्हावै।
वीर
हास्य
अद्भुत
वात्सल्य
तनकर भाला यूँ बोल उठा,राणा मुझको विश्राम न दे।। मुझको वैरी से हृदय-क्षोभ,तू तनिक मुझे आराम न दे।।
वीर
हास्य
अद्भुत
वात्सल्य
रे नृप बालक कालबस, बोलत तोहि न संभार।धनुही सम त्रिपुरारि धनु विदित सकल संसार।।
वीर
हास्य
रौद्र
वात्सल्य
तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेमप्रताप,साज मिले पंद्रह मिनट,घंटे भर आलाप।घंटे भर आलाप राग में मारा गोता धीरे-धीरे खिसक चुके थे सारे श्रोता।।
वीर
हास्य
रौद्र
वात्सल्य
एक जंगल है तेरी आँखों में जहाँ मैं रास्ता भूल जाता हूँ।तू किसी रेल सी गुजरती है,मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ।
वीर
हास्य
रौद्र
शृंगार
सिर पर बैठो काग,आँखि दोउ खात निकारत।जीभहिं खींचत स्यार अतिहि आनन्द उर धारत।
वीर
हास्य
रौद्र
वीभत्स
देख यशोदा सुत के मुख में, सकल विश्व की माया।क्षण भर को वह हुई अचेतन,हिल न सकी मृदु काया।।
वीर
हास्य
रौद्र
अद्भुत
ए मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी।जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो क़ुर्बानी।।
वीर
हास्य
रौद्र
करुण
श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगे। सब शोक अपना भूल करके कर युगल मलने लगे। संसार देखे अब हमारे शत्रुरण में मृत पड़े,करते हुए यह घोषणा वे हो गए उठकर खड़े।।
वीर
हास्य
रौद्र
करुण
यह ऐसा संसार है,जैसा सेमल फूल।दिन दस के व्यवहार को झूठे रंग न भूल।।
वीर
हास्य
शांत
करुण
