Worksheetsसहर्ष स्वीकारा है
Total questions: 35
Worksheet time: 18mins
'सहर्ष स्वीकारा है' कविता में किस शैली का प्रयोग हुआ है ?
संबोधन शैली
प्रश्नोत्तर शैली
अभिनय शैली
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
'गरबीली गरीबी ' शब्द में 'गरबीली' शब्द का क्या अर्थ है ?
स्वाभिमान से युक्त
हीन भावना से युक्त
दुःख से युक्त
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
'मुस्काता चाँद ज्यों धरती पर रात भर' - इन पंक्तियों में कौनसा अलंकार है ?
उत्प्रेक्षा अलंकार
उपमा अलंकार
रूपक अलंकार
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
कौनसा रमणीय उजाला कवि के लिए असहनीय है ?
सूर्य का उजाला
चाँद का उजाला
प्रिय के स्नेह का उजाला
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
'ममता के बादल की मंडराती कोमलता' इन पंक्तियों में किसका मानवीकरण किया गया है ?
ममता का मानवीकरण
कोमलता का मानवीकरण
बादलों का मानवीकरण
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
कविता में कवि का अज्ञात प्रिय कैसा है ?
अत्यंत प्रेरक
व्यक्तित्व का निर्माता
सुख -दुःख में साथ देने वाला
उपरोक्त सभी
'सहर्ष स्वीकारा है' कविता किस विषय पर आधारित है ?
देशभक्ति के भावों पर
कवि के निजी अनुभवों पर
हास्य-व्यंग्य की बातों पर
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
कवि ने अपनी प्रेरणा स्रोत किसे बताया है ?
अपनी माँ को
अपनी बहन को
अपनी प्रिय को
उपरोक्त सभी
'भीतर की सरिता' भावनाओं के प्रवाह के लिए कैसा प्रयोग है ?
व्यंग्यात्मक प्रयोग
लाक्षणिक प्रयोग
सामान्य प्रयोग
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
कवि अपने प्रिय प्रेरणास्रोत को भूलना क्यों चाहता है ?
वह उसके बिना जीवन जीने का साहस प्राप्त करना चाहता है
कवि आत्मनिर्भर बनना चाहता है
कवि आत्मविश्वासी होना चाहता है
उपरोक्त सभी
'पल -पल' में कौनसा अलंकार प्रयुक्त हुआ है ?
वीप्सा
पुनरुक्तिप्रकाश
यमक
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
कवि अपने जीवन को सहर्ष क्यों स्वीकार करता है ?
उसके जीवन की प्रेरणा स्रोत उसकी प्रिया है
उसकी हर सफलता -असफलता उसकी प्रिया के कारण है
उसके व्यक्तित्व की निर्माता उसकी प्रिया है
उपरोक्त सभी
'जाने क्या रिश्ता है , जाने क्या नाता है' ?इन पंक्तियों में प्रश्न और संदेह अलंकार से क्या प्रभाव आ गया है ?
रचनात्मकता
रहस्यात्मकता
व्यंग्यात्मकता
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
कवि कौनसा दंड प्राप्त करना चाहता है ?
मृत्यु दंड
प्रिया से वियोग का दंड
आजीवन कारावास
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
'दक्षिणी ध्रुवी अंधकार अमावस्या' इन पंक्तियों में अमावस्या का विशेषण दक्षिणी ध्रुवी अंधकार क्यों कहा गया है ?
अंधकार की सघनता दिखाने के लिए
कवि के दुःख को घनीभूत करने के लिए
दुःख की अत्यधिक मात्रा दिखाने के लिए
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
सहर्ष स्वीकारा है - से अभिप्राय है
‘सहर्ष स्वीकारना’ यानी खुशी-खुशी स्वीकार करना।
स्वीकार करना
बिना सोचे -समझे स्वीकार करना
कोई भी नहीं
कवि का संबोध्य कौन है ?
कवि के बचपन का मित्र
वह दिवंगता माँ, पत्नी, बहन, सहचरी कोई भी हो सकती है।
कोई नहीं
जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है जितना भी उँड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
कवि के मन में अपने संबोध्य के प्रति भावनाओं का प्रवाह सदैव उमड़ता रहता है।
कवि का मन संबोध्य के प्रति भावनाओं से भरा हुआ है
कवि अपने संबोध्य के प्रति अपने रिश्ते को समझने में असमर्थ है
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है
कवि को अपना संबोध्य धरती पर झुके चाँद की तरह लगता है
कवि ने अपने संबोध्य को कुछ इस तरह स्वीकार और आत्मसात किया था कि आज तक वह सामने नहीं भी है तो भी आसपास उसके होने का एहसास है
कवि का संबोध्य चाँद की तरह है
दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं - कवि ऐसा क्यों चाहता है?
कवि पूर्ण रूप से अंधकार में खो जाना चाहता है ताकि उसे कुछ भी याद न रहे
कवि दक्षिण ध्रुवीय अंधकार से पूर्ण अमावस्या में अपने आप को विलीन कर देना चाहता है
कवि अँधेरे से अपने आप को ढकना चाहता है
इसलिए कि तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित रहने का रमणीय यह उजेला अब सहा नहीं जाता है।नहीं सहा जाता है।-से क्या अभिप्राय है?
अतिशय प्रकाश से आँखें चैंधिया जाती हैं। इसलिए किसी हद तक अँधेरा भी-विस्मृति का अँधेरा वरेण्य है ।
कवि महसूस करता है कि संबोध्य के प्रेम का अतिरेक उसे कमजोर बना रहा है
दोनों
ममता के बादल की मँडराती कोमलता-भीतर पिराती है- संभवतः कवि कहना चाहता है कि-
अति किसी चीज़ की अच्छी नहीं। हर समय की भावार्द्रता भी कमज़ोर करती है।
कवि स्वीकार करता है कि प्रेम का अतिरेक उसे पीड़ा पहुँचाने लगा है
उपरोक्त दोनों
कमजोर और अक्षम अब हो गई है आत्मा यहछटपटाती छाती को भवितव्यता डराती है बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है!!- संभवत: कवि का मानना है कि -
वह अपने प्रति जताई जाने वाली सहानुभूति का तिरस्कार करता है क्योंकि ये उसके संकल्पों को कमजोर बनाती हैं|
प्रेम का अतिरेक हमें कमजोर बना देता है , कवि को अपने सम्बोध्य से हर समय मिलने वाली आत्मीयता कवि के भीतर एक अज्ञात भय को जन्म देती है |
लगातार मिलने वाला भावनात्मक सह्रारा अंदर एक अज्ञात भय भी कायम करता है।
क ख ग तीनों
लापता कि वहाँ भी तो तुम्हारा ही सहारा है!!- किसे और किसका सहारा है ?
पूरी तरह भूलना संभव नहीं हो सकता क्योंकि वहाँ भी कवि को अपने संबोध्य का ही सहारा है
कवि लापता होने पर अपने संबोध्य को ढूँढ़ता है ।
कवि का संबोध्य लापता है और वह उसे खोज रहा है
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है या मेरा जो होता-सा लगता है, होता-सा संभव है सभी वह तुम्हारे ही कारण के कार्यों का घेरा है, कार्यों का वैभव है- कवि स्वीकार करता है कि -
कवि जीवन की हर गतिविधि पर अपने सम्बोध्य का प्रभाव स्वीकार करता है।
कवि के जीवन में जो कुछ घटित होने वाला है, उन सब पर उसके संबोध्य की अदृश्य छाया है।
क और ख दोनों
कविता में क्या विरोधाभास है ?
कवि एक ओर सबकुछ सहर्ष स्वीकार करता है वहीं दूसरी ओर सबकुछ भूल जाना चाहता है
एक ओर वह अपने चारों ओर अपने संबोध्य का अहसास महसूस करता है तो दूसरी ओर अपने प्रति जताई जाने वाली सहानुभूति का तिरस्कार करता है क्योंकि ये उसके संकल्पों को कमजोर बनाती हैं|
कवि चाँद की तरह आत्मा पर झुका हुआ चेहरा भूलकर अंधकार अमावस्या में नहाने की बात करता है |
तीनों
कविता के अंत में कवि क्या स्वीकार करता है ?
कवि स्वीकार करता है कि वो किसी भी स्थिति में रहे हर स्थिति में अपने संबोध्य के अहसास को महसूस करता है
कवि स्वीकार करता है कि वो किसी विशेष स्थिति में अपने संबोध्य के अहसास को भूल जाता है
वह अपने सम्बोध्य को भूला सकता है
