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Worksheetsbus ki yatra
Total questions: 23
Worksheet time: 12mins
पाठ बस की यात्रा के लेखक का नाम बताऐ ?
कामता नाथ
कबीर
हरिशंकर परसाई
अरविंद कुमार सिंह
लोगो ने लेखक को क्या सलाह दी ?
शाम की बस से न जाए।
कही न जाए।
शाम की बस से ही जाए।
अगले दिन जाऐ।
बस की यात्रा के बारे मे हिचकिचाहट होने पर किस मित्र की सलाह काम आई ।
कंडक्टर
डाक्टर
वकील
कंपनी का हिस्सेदारी
बस के स्टार्ट होते ही लेखक को क्या प्रतीत हुआ ?
कुछ नहीं।
बस चल पडी।
बस हीलने लगी।
जेसै पुरी बस ही इंजन हो।
लेखक ने किन 2 आंदोलन के बारे मे बताया ?
आंदोलन
असहयोग आंदोलन
सविनय अवज्ञा आंदोलन
सहयोग आंदोलन
पेट्रोल की टंकी मे क्या हो गया था ?
फूट गया था
छेद हो गया था
कुछ नहीं हुआ
पचंर हो गया था
लेखक किन घटनाऔ के बारे मे सोच रहे थे ?
ब्रेक फेल होने के बारे मे ।
बस पलट सकती थी ।
स्टीयरिंग टूट सकता था ।
भूतो के बारे मे ।
लेखक को पेड़ो से डर क्यो लग रहा था ?
क्योकि पेड़ बडे थे।
क्योकि पेड़ डरावने थे।
क्योकि पेड़ो पर पत्ते नहीं थे।
क्योकि लेखक को लग रहा था की बस पेड़ो से टकरा जाएगी।
क्षीण चाँदनी में वृक्षों की छाया के नीचे वह बस कैसी लग रही थी।
डरावनी
सुन्दर
दयानीय
भयानक
" निकल जाओ, बेटी ! अपनी तो वह उम्र ही नहीं रही।" यह वाक्य किस के लिए कहा गया है ?
वृद्धा बस के लिये
कंपनी के हिस्सेदार के लिये
डॉकटर मित्र के लिये
कंडक्टर के लिये
बस की रफतार अब क्या थी ?
पंद्रह-बीस मील
पंद्रह मील
बीस मील
बस चल ही नहीं रही थी।
सविनय अवज्ञा आंदोलन कब शुरू हूआ ?
जब बस पहली बार रुकी।
जब बस चली।
जब बस दूसरी बार रुकी।
इन मे से कोइ नहीं।
बस के दुसरी बार खराब होने पर, किसने उसे ठिक किया ?
ड्राइवर ने
लेखक ने
हिस्सेदार ने
डॅाकटर ने
लेखक ने किसकि तरफ श्रद्धाभाव से देखा?
दोस्त की तरफ
बस की तरफ
डॅाकटर की तरफ
हिस्सेदार की तरफ
हिस्सेदार को कौनसे आंदोलन का नेता होना चाहिए ?
असहयोग आंदोलन
क्रांतिकारी आंदोलन
सविनय अवज्ञा आंदोलन
सहयोग आंदोलन
लेखक ने कहा पहुंचने की उम्मीद छोड़ दी थी
पन्ना
घर
सातारा
पता नंही
पुलिया के ऊपर पहुंचते ही ..........
बस जोर से पुलिया पार कर गई।
एक टायर फिस्स करके बैठ गया और बस जोर से हिलकर थम गई
एक टायर फिस्स करके बैठ गया
बस पुलिया पर रुक गई।
चिंता जाती रही,हंसी मजाक चालू हो गया क्योंकि
पृथ्वी पर उनकी अब कोई मंजिल ना रह गई थी।
उन सबकी,बेताबी,तनाव खत्म हो गए थे।
सब बड़े इत्मीनान से घर की तरह बैठ गए।
उपर्युक्त सभी।
वह महान आदमी आ रहा है जिसने एक टायर के लिए प्राण दे दिए।मर गया पर टायर नहीं बदला__यह किसके लिए कहा गया है?
लेखक के लिए
कम्पनी के हिस्सेदार के लिए
बस के ड्राइवर के लिए
बस कम्पनी के मालिक भी उसी बस में सफर कर रहे थे उनके लिए कहा गया है।
झील देखकर लेखक को लगता था कि
वाह कितनी सुंदर झील है।
इसमें बस गोता लगा जाएगी।
इस झील में कितनी मछलियां होंगी
न जाने और कितनी झीलें अभी रास्ते में आने वाली हैं।
कैसे लोग शाम की बस से सफर नहीं करते
समझदार
बेवकूफ
मूर्ख
पन्ना से जाने वाली बस कौन सी ट्रेन मिला देती है
जबलपुर की
दिल्ली की
पन्ना की
बस कहाँ से कहाँ जा रही थी ?
पन्ना से सतना
पन्ना से जबलपुर
सतना से पन्ना
