Worksheetsअपठित गद्यांश
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शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
प्रश्न -1 शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में किसका महत्त्व है?
थकान
व्यायाम
पसीना
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
शरीर की उपेक्षा करने वाला व्यक्ति अपने लिए -------दरवाजा खोलता है।
खुशी का
धन का
रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को --------- कर दिया है।
व्यस्त
खाली
उदास
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, ----------- तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है।
अशुद्ध जल
ठंडा जल
स्वच्छ जल
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
व्यायाम करने वाले व्यक्ति में ---------- आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
अद्भुत भक्ति
अद्भुत शक्ति
अद्भुत मति
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
गद्यांश में 'जीवन' का विलोम शब्द कौन सा है?
मरण
मृत्यु
मौत
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
गद्यांश में 'निरोग' का विलोम शब्द क्या है?
रोग
स्वस्थ
शुद्ध
