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Worksheetsअलंकार, रसखान
Total questions: 48
Worksheet time: 24mins
1. मधुर मधुर मुस्कान मनोहर , मनुज वेश का उजियाला।
इस काव्य पंक्ति में अलंकार पहचाने ।
उपमा अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
अनुप्रास अलंकार
यमक अलंकार
काली घटा का घमंड घटा -इस पंक्ति में अलंकार बताइए ।
रूपक अलंकार
उपमा अलंकार
अतिशयोक्ति अलंकार
यमक अलंकार
चरण कमल बंदों हरि राई- इस पंक्ति में अलंकार बताइए ।
उपमा
रूपक
मानवीकरण
उत्प्रेक्षा
मानो हवा के वेग से सोता हुआ सागर जगह - इस काव्य पंक्ति में अलंकार बताइए।
उपमा
रूपक
उत्प्रेक्षा
मानवीकरण
पीपर पात सरिस मन डोला- इस काव्य पंक्ति में अलंकार पहचानिए।
उत्प्रेक्षा
रुपक
उपमा
अनुप्रास
मुख बाल रवि सम लाल होकर ज्वाल -सा बोधित हुआ l यह पंक्ति किस अलंकार का उदाहरण है ?
उपमा अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
रूपक अलंकार
उपरोक्त सभी
आगे नदिया पड़ी अपार घोड़ा कैसे उतरे पार l राणा ने सोचा इस बार तब तक चेतक था उस पार ll इन पंक्तियों में कौन सा अलंकार है ?
मानवीकरण अलंकार
अतिशयोक्ति अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
रूपक अलंकार
हरि मुख मानो मधुर मयंक l इस पंक्ति में कौनसा अलंकार है ?
उपमा अलंकार
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
मानवीकरण अलंकार
कालिंदी कूल कदंब की डारन l इस पंक्ति में कौनसा अलंकार है ?
अनुप्रास अलंकार
यमक अलंकार
श्लेष अलंकार
उपरोक्त में से कोई भी नहीं
इनमें से उत्प्रेक्षा अलंकार की क्या विशेषता है?
दो या दो से अधिक बार वर्ण की आवृत्ति
जब एक शब्द में कई अर्थ चिपके हों!
उपमान और उपमेय में कोई अंतर न रहे
काव्य में 'मानो' 'जानो' आदि सम्भावना वाले शब्द
रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम! किस अलंकार का उदाहरण है?
अनुप्रास अलंकार
उपमा अलंकार
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो। इस पद में कौन-सा अलंकार है?
उपमा अलंकार
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
अतिश्योक्ति अलंकार
किन पंक्तियों में अतिश्योक्ति का वर्णन है?
चारु चंद्र की चंचल किरणें
खेल रही थीं जल-थल में
राणा ने सोचा इस पार
तब तक चेतक था उस पार।।
फूल हंसे कलियां मुसकाईं।
अनुचरों से बादलों ने स्वर्ण की पोशाक धारी|
वह दीपशिखा-सी शांत भाव में लींन | -में कौन सा अलंकार है ?
श्लेष
रूपक
यमक
उपमा
सिर फट गया उसका मानो अरुण रंग का घड़ा हो |- में कौन सा अलंकार है ?
रूपक अलंकार
अनुप्रास अलंकार
अतिशयोक्ति अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
मेघ आए बड़े बन ठन के संवर के - इस काव्य पंक्ति में अलंकार पहचानिए।
अनुप्रास
मानवीकरण
अतिशयोक्ति
उपमा
बाल कल्पना के-से पाले - इस काव्य पंक्ति में अलंकार बताइए।
मानवीकरण
उपमा
यमक
रूपक
चरण धरत चिंता करत,चितवन चारों ओर। सुबरन को खोजत फिरत, कवि व्यभिचारी चोर।। - काव्य की इन पंक्तियों में कौन सा अलंकार है ?
यमक
रूपक
उपमा
श्लेष
किस अलंकार में बेजान पर चेतना का आरोप किया जाता है ?
अतिशयोक्ति
मानवीकरण
यमक
श्लेष
‘माली आवत देखि कलियन करि पुकार।
फूले फूले चुन लियो कलि हमारी बार।।’
ये पंक्तियां निम्न में से कौनसे अलंकार की ओर इशारा कर रही हैं?
श्लेष अलंकार
यमक अलंकार
उपमा अलंकार
मानवीकरण अलंकार
‘देखि सुदामा की दीन दशा। करुणा करके करुणानिधि रोए।।
पानी परायत को हाथ छुओ नाहिं। नयनन के जल से पग धोये।।’
में कौनसा अलंकार है?
श्लेष अलंकार
यमक अलंकार
रूपक अलंकार
अतिश्योक्ति अलंकार
बालक बोधि बधों नहीँ तोही |-में कौन सा अलंकार है ?
उपमा अलंकार
अनुप्रास अलंकार
रूपक अलंकार
उत्प्रेक्षा अलंकार
‘घेर -घेर घोर गगन धारा धर ओ |-में कौन सा अलंकार है ?
यमक अलंकार
अनुप्रास अलंकार
श्लेष अलंकार
उपमा अलंकार
प्रीत नदी में पौऊँ न बौरयो |-में कौन सा अलंकार है ?
मानवीकरण अलंकार
यमक अलंकार
अतिशयोक्ति अलंकार
रूपक अलंकार
मानुष का अर्थ होगा
मानुष
जानवर
मनुष्य
एक जगह का नाम
रसखान जी मनुष्य का जन्म लेकर रहना चाहते हैं
जंगल में
शहर में
गांव में
गोकुल के ग्वालों के बीच में
रसखान जी गोवर्धन पर्वत का ही पत्थर बनकर रहना चाहते हैं क्योंकि
गोवर्धन बहुत सुंदर पर्वत है
उन्हें और कोई पर्वत अच्छा नहीं लगता।
श्रीकृष्ण ने इंद्र के क्रोध से गोकुलवासियों को बचाने के लिए अपनी उंगली पर उठाया था
कह नहीं सकते।
पक्षी बनकर रसखान क्या करना चाहते हैं?
उड़ना चाहते हैं
यमुना नदी के किनारे रहना चाहते हैं
यमुना नदी के किनारे कदंब के पेड़ की डालियों पर बसेरा करना चाहते हैं
पता नहीं कि क्या करना चाहते हैं।
इनमें से रसखान जी क्या नहीं बनना चाहते हैं?
मनुष्य
गाय
पहाड़
पत्थर
पाहन और खग का अर्थ होगा
पाहन और खाग
पहाड़ और पक्षी
पत्थर और पक्षी
पक्षी और पत्थर
रसखान जी के सवैया की भाषा है
अवधी
बुन्देली
ब्रज
हरियाणवी
पहले सवैये में कवि ने क्या इच्छा प्रकट की है
हर बार अलग अलग रूपों में जन्म लेना चाहते हैं
उन्हें पशु और पक्षी बनना अच्छा लगता है
चाहे कोई भी जनम ले,वो रहना ब्रज की भूमि पर ही चाहते हैं
कवि ही इस बारे में कुछ बता सकते हैं,हम क्या जाने
रसखान जी श्रीकृष्ण से जुड़ी किस वस्तु को पाने के लिए तीनों लोकों का राज्य भी छोड़ेने को तैयार हैं
श्रीकृष्ण की लाठी और कंबल
श्रीकृष्ण के गहने
श्रीकृष्ण से प्राप्त वरदानों के कारण
पता नहीं
अगर रसखान जी को नंद बाबा के गायों को चराने का मौका मिले तो
वे जंगल में खूब घूमना चाहते हैं
जी भरकर घास चरना चाहते हैं
वे आठों सिद्धियों और नौ निधियों के सुख को भी त्याग सकते हैं।
जी भरकर बाकी गायों के साथ खेलना चाहते हैं
रसखान जी अपनी आंखों से ब्रज की किन किन वस्तुओं को देखना चाहते हैं
स्त्री,पुरुष जानवर
वनों, बगीचों,तालाबों को
घर,महल,सड़कों को
पता नहीं
" कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारों " का अर्थ होगा
कोटिक कालधौत के धाम पर वारों कारील
कवि करील की झाड़ियों पर करोड़ों सोने के महल भी न्योछावर करने के लिए तैयार हैं
दूसरा अर्थ सही है
कोई भी अर्थ सही नहीं है।
कोटिक कलधौत के धाम का अर्थ है
करोड़ों सोने चांदी के महल
कोटिक काले धौत
लाखों सोने चांदी के महल
कुछ पता नहीं चलता है
लकुटी अरु कामरिया का अर्थ होगा -
लाठी और कमर
लाठी और कंबल
कंबल और लाठी
कह नहीं सकते।
करील का अर्थ होगा
कांटेदार झाड़ी
करील
कंबल
तालाब
तिहूं पुर का अर्थ होगा
एक जगह का नाम
तीनों लोक
एक देश का नाम
मथुरा की राजधानी
अपने सवैयो में रसखान जी ने प्रकट किया है
श्रीकृष्ण के प्रति अपने प्रेम को
ब्रजभूमि के प्रति अपने प्रेम को
श्रीकृष्ण के प्रति अपने अनन्य भक्ति भाव को
उपर्युक्त सभी
'रसखान' कवि का पूरा नाम क्या है -
रहीम
सैयद
सैयद इब्राहिम
रैदास
कालिंदी का पर्याय होगा -
गंगा
नर्मदा
यमुना
कावेरी
कालिंदी कूल कदंब की डारन में कौन सा अलंकार है
यमक
अनुप्रास
रूपक
उपमा
गुंज की माल गरे पहिरौंगी
इस पंक्ति में गुंज का क्या अर्थ है
एक जंगली फल
एक जंगली फूल
एक कांटेदार झाड़ी
तालाब
तीसरे सवैये में एक सखी दूसरी सखी को किस का स्वांग रचने को कहती है
राधा का
गोपी का
ग्वालो का
कृष्ण का
गोपी को किस से ईर्ष्या है
मुरली से
कृष्ण से
अपनी सखी से
राधा से
रसखान के सवैये में कवि ने किस की आराधना की है?
श्री कृष्ण
श्री हरिश
श्री राम
