WorksheetsGrade X अभ्यास प्रश्न पत्र
Total questions: 40
Worksheet time: 30mins
हरिहर क्या काम करता था?
हरिहर एक किसान था।
हरिहर एक काम करता था।
हरिहर एक चालक था।
हरिहर एक किशन था।
हरिहर की एकमात्र इच्छा क्या थी?
उडुपि के मन्दिर में भगवान श्रीशिव के दर्शन करना।
उडुपि के मन्दिर में भगवान श्रीविष्णु के दर्शन करना।
उडुपि के मन्दिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करना।
उडुपि के मन्दिर में भगवान श्रीराम के दर्शन करना।
हरिहर को तीर्थयात्रा के मार्ग में कौन मिला?
एक बूढ़ी महिला मिली ।
एक बूढ़ा आदमी मिला।
एक बूढ़ा साथी मिला।
एक बूढ़ा बुजुर्ग मिला।
हरिहर को तीर्थयात्रा के मार्ग में जो मिला उसकी क्या स्थिति थी?
उसकी दशा बहुत ही प्रसन्नचित्त थी।
उसकी दशा बहुत ही खुशमिज़ाज थी।
उसकी दशा बहुत ही प्रशंसीय थी।
उसकी दशा बहुत ही दयनीय थी।
हरिहर ने बूढ़े व्यक्ति की कैसे सहायता की?
बूढ़े व्यक्ति के घर चला गया व हर मुमकिम सहायता नहीं की।
बूढ़े व्यक्ति के घर चला गया व हर मुमकिम सहायता की।
बूढ़े व्यक्ति के साथ शहर चला गया व हर मुमकिम सहायता की।
बूढ़े व्यक्ति के गाँव चला गया व हर मुमकिम सहायता की।
हरिहर ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा किसे समझता था?
दीन-दुखियों की दानी को
दीन-दुखियों की सेवा को
दीन-दुखियों की दीनता को
दीन-दुखियों की सहायक को
हरिहर ने घर लौटने का निश्चय क्यों किया?
बूढे के परिवार की सहायता में तीर्थयात्रा के पूरे गहने खर्च कर दिए थे।
बूढे के परिवार की सहायता में तीर्थयात्रा के पूरे लाभ खर्च कर दिए थे।
बूढे के परिवार की सहायता में तीर्थयात्रा के पूरे पैसे खर्च कर दिए थे।
बूढे के परिवार की सहायता में तीर्थयात्रा के पूरे ज़ेवर खर्च कर दिए थे।
बूढ़े के घर से लौटने पर हरिहर ने किसे सपने में देखा?
हरिहर ने सपने में भगवान श्री विष्णु को देखा।
हरिहर ने सपने में भगवान श्री गणेश को देखा।
हरिहर ने सपने में भगवान श्री इंद्र को देखा।
हरिहर ने सपने में भगवान श्रीकृष्ण को देखा।
इस गद्यांश से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
सच्ची ईश्वर भक्ति व तीर्थयात्रा दीन-दुखियों की सेवा व सहायता से ही पूरी होती है।
ईश्वर बाहरी आडम्बर से प्रसन्न नहीं होते बल्कि प्राणीमात्र के दुःख हरने से प्रसन्न होते हैं।
दुखियों के दुःख दूर करना व सेवा कार्य करना तीर्थयात्रा से बड़ा पुण्य प्रदान करता है।
उपर्युक्त सभी
हरिहर किसके साथ उडुपि की ओर चल दिया?
तीर्थयात्रियों के दो दल के साथ
तीर्थयात्रियों के एक दल के साथ
तीर्थयात्रियों के तीन दल के साथ
तीर्थयात्रियों के कुछ दल के साथ
"नारी " का पर्यायवाची शब्द है :
अनुचर
पिनाक
महिला
दास
निम्नलिखित में से शुद्ध शब्द का चुनाव कीजिए।
प्रतिग्या
प्रतियग्या
प्रतिज्ञ
प्रतिज्ञा
"मंगल " का विलोम शब्द है :
सुमंगल
नमंगल
समंगल
अमंगल
आकाश में बादल दिखाई नहीं दे रहे है। (रेखांकित वाक्यांश के लिए एक शब्द का प्रयोग कीजिए। )
आकाश में बादल अदृश्य हो गए है।
आकाश में बादल सुदृश्य हो गए है।
आकाश में बादल दृश्य हो गए है।
आकाश में बादल नदृश्य हो गए है।
"जीना" का भाववाचक शब्द है :
जीन
जीव
जन
जीवन
परीक्षा में बैठे सभी लोग विद्वान हैं।
(रेखांकित शब्द का लिंग बदलकर वाक्य पुनः लिखिए। )
परीक्षा में बैठे सभी लोग विदवानी हैं।
परीक्षा में बैठे सभी लोग विदवती हैं।
परीक्षा में बैठे सभी लोग विदया हैं।
परीक्षा में बैठे सभी लोग विदूषी हैं।
गुलाब के पौधे पर कली खिल गई है।
(वाक्य का वचन बदलकर लिखिए। )
गुलाब के पौधे पर कलियाँ खिल गई है।
गुलाब के पौधों पर कली खिल गई है।
गुलाब के पौधों पर कलियाँ खिल गई हैं।
गुलाबों के पौधे पर कली खिल गई है।
उदासी व्यक्ति को कमज़ोर बना देती है।
(रेखांकित शब्द के विशेषण शब्द का प्रयोग कीजिए। )
उदास व्यक्ति कमज़ोर हो जाता है।
उदासीनता व्यक्ति कमज़ोरी हो जाता है।
उदासीत व्यक्ति कमज़ोर हो जाता है।
उदासिक़ व्यक्ति कमज़ोर हो जाता है।
आकाश में घिरते बादल बड़े सुहाने लग रहे हैं।
(वाक्य को संयुक्त वाक्य में बदलिए। )
जैसे आकाश में घिर रहे हैं वैसे बादल बड़े सुहाने लग रहे हैं।
आकाश में घिर रहे हैं और बादल बड़े सुहाने लग रहे हैं।
जब आकाश में घिर रहे हैं तब बादल बड़े सुहाने लग रहे हैं।
जैसे ही आकाश में घिर रहे हैं वैसे ही बादल बड़े सुहाने लग रहे हैं।
"अक्षि " शब्द का तद्भव शब्द है :
नाक
गाला
कान
आँख
उन दिनों कौन - सी प्रथा प्रचलित थी?
उन दिनों यज्ञों को बेचने की प्रथा प्रचलित थी।
उन दिनों फल को बेचने की प्रथा प्रचलित थी।
उन दिनों यज्ञों के फल के क्रय-विक्रय की प्रथा प्रचलित थी।
उन दिनों महायज्ञ को बेचने की प्रथा प्रचलित थी।
सेठानी ने एक यज्ञ बेचने का सुझाव क्यों दिया?
दुर्लभता से परेशान होकर सेठ की पत्नी ने सेठ को एक यज्ञ बेचने का सुझाव दिया।
उदारता से परेशान होकर सेठ की पत्नी ने सेठ को एक यज्ञ बेचने का सुझाव दिया।
गरीबी से परेशान होकर सेठ की पत्नी ने सेठ को एक यज्ञ बेचने का सुझाव दिया।
उदासिनता से परेशान होकर सेठ की पत्नी ने सेठ को एक यज्ञ बेचने का सुझाव दिया।
भूखे कुत्ते को रोटियाँ खिलाने को सेठ ने महायज्ञ क्यों नहीं माना?
सेठ का मानना था कि भूखे कुत्ते को रोटी खिलाना मानवोचित कर्त्तव्य है।
सेठ का मानना था कि भूखे कुत्ते को रोटी खिलाना मानवोचित कार्य नहीं है।
सेठ का मानना था कि भूखे कुत्ते को रोटी खिलाना मानव का कार्य नहीं है।
सेठ का मानना था कि भूखे कुत्ते को रोटी खिलाना मानवोचित कार्य सही नहीं है।
कहानी के अनुसार महायज्ञ क्या था?
स्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्चा महायज्ञ कहलाता है।
हम स्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्चा महायज्ञ कहलाता है।
निर्मल भाव से किया गया कर्म ही सच्चा महायज्ञ कहलाता है।
निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्चा महायज्ञ कहलाता है।
दिन फिरने पर सेठ पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उनके दरवाजे के कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटता था ।
संगी – साथियों ने भी उनसे मुँह फेर लिया और नौबत यहाँ तक आ गयी कि सेठ व सेठानी दाने – दाने को मोहताज हो गए।
संगी – साथियों ने भी उनसे मुँह नहीं फेर लिया और नौबत यहाँ तक आ गयी कि सेठ व सेठानी दाने – दाने मिलने लगे ।
उनके दरवाजे के कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटता था । सभी भरपेट भोजन पाते।
महायज्ञ के बदले में सेठ को क्या मिला?
सेठ को कुंदनपुर में एक तहखाने में हीरे-जवाहरात मिले
सेठ को गाँव में एक तहखाने में हीरे-जवाहरात मिले
सेठ को अपने घर में एक तहखाने में हीरे-जवाहरात मिले
सेठ को अपने महल में एक तहखाने में हीरे-जवाहरात मिले
सेठ जी ने कितनी रोटियाँ कुत्ते को खिलाई ?
चार
दो
तीन
एक
धन्ना सेठ की पत्नी के संबंध में क्या अफ़वाह थी?
धन्ना सेठ की पत्नी के संबंध में यह अफ़वाह थी कि वे यज्ञों के फल का क्रय - विक्रय करते हैं।
धन्ना सेठ की पत्नी के संबंध में यह अफ़वाह थी कि वे महायज्ञों के फल का क्रय - विक्रय करते हैं।
धन्ना सेठ की पत्नी के संबंध में यह अफ़वाह थी कि वे यज्ञों के फल का क्रय - विक्रय करते हैं वः वापस नहीं मिलता।
धन्ना सेठ की पत्नी के संबंध में यह अफ़वाह थी कि उसे कोई दैवीय शक्ति प्राप्त है जिससे वह तीनों लोकों की बात जान सकती है।
”सेठ जी ! यज्ञ खरीदने के लिए हम तैयार हैं, पर आपको अपना महायज्ञ बेचना होगा।” - अवतरण के वक्ता कौन है ?
धन्ना सेठ की पत्नी
धन्ना सेठ
धनी सेठ
अदृश्य वाणी
सेठानी भौचक्की-सी क्यों खड़ी हो गई?
लोहे के दरवाज़े को देखकर
लोहे के कुंदे को देखकर
लोहे के सलाखो को देखकर
लोहे के कड़ी को देखकर
हाड़ा वंश किस प्रकार का अनुशासन मानने को सदा तैयार है ?
आदर का
सेवा का
लोभ का
प्रेम का
हाड़ाओं ने कब व कहाँ आक्रमण किया ?
दिन के समय महाराणा शिवरों पर आक्रमण किया।
रात के समय महाराणा शिवरों पर आक्रमण किया।
शाम के समय महाराणा शिवरों पर आक्रमण किया।
सुबह के समय महाराणा शिवरों पर आक्रमण किया।
महाराणा लाखा ने क्या प्रतिज्ञा की ?
जब तक मेवाड़ के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करता, अन्न - जल ग्रहण नहीं करूँगा।
जब तक चित्तौड़ के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करता, अन्न - जल ग्रहण नहीं करूँगा।
जब तक दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करता, अन्न - जल ग्रहण नहीं करूँगा।
जब तक बूँदी के दुर्ग में ससैन्य प्रवेश नहीं करता, अन्न - जल ग्रहण नहीं करूँगा
महाराणा के जीवन का मूलमंत्र क्या है ?
प्राण जाएँ पर वचन न जाए
प्राण जाएँ पर वचन जाए
शक्ति जाएँ पर वचन न जाए
वचन जाएँ पर प्राण न जाए
हाड़ा जाति वीरता में सिसोदिया जाति से किसी प्रकार हीन नहीं है इस बात की पुष्टि कब हुई ?
मेवाड़ के मैदान में हुए युद्ध में
राजस्थान के मैदान में हुए युद्ध में
नीमरा के मैदान में हुए युद्ध में
चित्तौड़ के मैदान में हुए युद्ध में
अभयसिंह राव हेमू के पास क्यों गए हुए थे ?
बूँदी की अधीनता स्वीकार करने की आज्ञा लेकर।
मेवाड़ की अधीनता स्वीकार करने की आज्ञा लेकर।
राव हेमू की अधीनता स्वीकार करने की आज्ञा लेकर।
राजस्थान की अधीनता स्वीकार करने की आज्ञा लेकर।
राजपूतों की किस प्रकार की शक्ति विदेशियों का सामना नहीं कर सकती ?
छिन्न - भिन्न संगठित शक्ति
छिन्न - भिन्न एकत्रित शक्ति
छिन्न - भिन्न सामुहिक शक्ति
छिन्न - भिन्न असंगठित शक्ति
मातृभूमि का मान एकांकी द्वारा एकांकीकार ने कौन - सी भावनाओं को उजागर करने का प्रयास किया है ?
जीवन की समस्याओं का चित्रण
देशभक्ति, राष्ट्रीयता , साहस, वीरता और पराक्रम का चित्रण
आधुनिक जीवन की मानसिक कुंठाओं का चित्रण
मानवतावादी दृष्टिकोण का चित्रण
राजपूती शक्तियों का केंद्र किसे माना गया ?
चित्तौड़
मेवाड़
महाराणा
बूँदी
मेवाड़ के गौरवपूर्ण इतिहास में कलंक का टीका किसने लगाया ?
अभयसिंह ने
बाप्पा रावल ने
वीरवर हम्मीर ने
महाराणा लाखा ने
