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Worksheetsअपठित गद्यांश
Total questions: 30
Worksheet time: 10mins
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
प्रश्न -1 शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में किसका महत्त्व है?
थकान
व्यायाम
पसीना
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
शरीर की उपेक्षा करने वाला व्यक्ति अपने लिए -------दरवाजा खोलता है।
खुशी का
धन का
रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को --------- कर दिया है।
व्यस्त
खाली
उदास
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, ----------- तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है।
अशुद्ध जल
ठंडा जल
स्वच्छ जल
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
गद्यांश में 'जीवन' का विलोम शब्द कौन सा है?
मरण
मृत्यु
मौत
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
गद्यांश में 'निरोग' का विलोम शब्द क्या है?
रोग
स्वस्थ
शुद्ध
रविवार का दिन था। सबकी छुट्टी थी। आसमान साफ था और ठंडी-ठंडी हवा बह रही थी। सूरज की किरणें शहर के ऊपर बिखरी थीं। धूप में गरमी नहीं थी। मौसम सुहावना था। बिलकुल वैसा जैसा एक पिकनिक के लिए होना चाहिये। मन्नू सोचने लगा, काश! आज हम कहीं घूमने जा सकते। मन्नू रसोई में आया। माँ बेसिन में बर्तन धो रही थी।"माँ क्या आज हम कहीं घूमने चल सकते हैं?" मन्नू ने पूछा।"क्यों नही, अगर तुम्हारा स्कूल का काम पूरा हो गया तो हम ज़रूर घूमने चलेंगे।" माँ ने कहा।"मैं आधे घंटे के अंदर स्कूल का काम पूरा कर सकता हूँ।" मन्नू ने कहा।मन्नू स्कूल का काम करने बैठ गया।"हम कहाँ घूमने चलेंगे?" मन्नू ने पूछा।"बाबा और मुन्नी ने गांधी पार्क का कार्यक्रम बनाया है।" माँ ने बताया।"यह पार्क तो हमने पहले कभी नहीं देखा?" मन्नू ने पूछा।"हाँ, इसीलिये तो।" माँ ने उत्तर दिया।मन्नू काम पूरा कर के बाहर आ गया।"क्या गांधी पार्क बहुत दूर है?" मुन्नी ने पूछा।"हाँ, हमें कार से लम्बा सफर करना होगा।" बाबा ने बताया।सुबह के काम पूरे कर के सब लोग तैयार हुए। माँ ने खाने पीने की कुछ चीज़ें साथ में ली और वे सब कार में बैठ कर सैर को निकल पड़े।
कैसी हवा चल रही थी ?
नरम
गरम
ठंडी
कोई भी नहीं
रविवार का दिन था। सबकी छुट्टी थी। आसमान साफ था और ठंडी-ठंडी हवा बह रही थी। सूरज की किरणें शहर के ऊपर बिखरी थीं। धूप में गरमी नहीं थी। मौसम सुहावना था। बिलकुल वैसा जैसा एक पिकनिक के लिए होना चाहिये। मन्नू सोचने लगा, काश! आज हम कहीं घूमने जा सकते। मन्नू रसोई में आया। माँ बेसिन में बर्तन धो रही थी।"माँ क्या आज हम कहीं घूमने चल सकते हैं?" मन्नू ने पूछा।"क्यों नही, अगर तुम्हारा स्कूल का काम पूरा हो गया तो हम ज़रूर घूमने चलेंगे।" माँ ने कहा।"मैं आधे घंटे के अंदर स्कूल का काम पूरा कर सकता हूँ।" मन्नू ने कहा।मन्नू स्कूल का काम करने बैठ गया।"हम कहाँ घूमने चलेंगे?" मन्नू ने पूछा।"बाबा और मुन्नी ने गांधी पार्क का कार्यक्रम बनाया है।" माँ ने बताया।"यह पार्क तो हमने पहले कभी नहीं देखा?" मन्नू ने पूछा।"हाँ, इसीलिये तो।" माँ ने उत्तर दिया।मन्नू काम पूरा कर के बाहर आ गया।"क्या गांधी पार्क बहुत दूर है?" मुन्नी ने पूछा।"हाँ, हमें कार से लम्बा सफर करना होगा।" बाबा ने बताया।सुबह के काम पूरे कर के सब लोग तैयार हुए। माँ ने खाने पीने की कुछ चीज़ें साथ में ली और वे सब कार में बैठ कर सैर को निकल पड़े।
कैसा मौसम था ?
सुहावना
डरावना
ख़राब
बेकार
रविवार का दिन था। सबकी छुट्टी थी। आसमान साफ था और ठंडी-ठंडी हवा बह रही थी। सूरज की किरणें शहर के ऊपर बिखरी थीं। धूप में गरमी नहीं थी। मौसम सुहावना था। बिलकुल वैसा जैसा एक पिकनिक के लिए होना चाहिये। मन्नू सोचने लगा, काश! आज हम कहीं घूमने जा सकते। मन्नू रसोई में आया। माँ बेसिन में बर्तन धो रही थी।"माँ क्या आज हम कहीं घूमने चल सकते हैं?" मन्नू ने पूछा।"क्यों नही, अगर तुम्हारा स्कूल का काम पूरा हो गया तो हम ज़रूर घूमने चलेंगे।" माँ ने कहा।"मैं आधे घंटे के अंदर स्कूल का काम पूरा कर सकता हूँ।" मन्नू ने कहा।मन्नू स्कूल का काम करने बैठ गया।"हम कहाँ घूमने चलेंगे?" मन्नू ने पूछा।"बाबा और मुन्नी ने गांधी पार्क का कार्यक्रम बनाया है।" माँ ने बताया।"यह पार्क तो हमने पहले कभी नहीं देखा?" मन्नू ने पूछा।"हाँ, इसीलिये तो।" माँ ने उत्तर दिया।मन्नू काम पूरा कर के बाहर आ गया।"क्या गांधी पार्क बहुत दूर है?" मुन्नी ने पूछा।"हाँ, हमें कार से लम्बा सफर करना होगा।" बाबा ने बताया।सुबह के काम पूरे कर के सब लोग तैयार हुए। माँ ने खाने पीने की कुछ चीज़ें साथ में ली और वे सब कार में बैठ कर सैर को निकल पड़े।
मन्नू क्या सोच रहा था ?
हम खेलने जा सके?
हम घूमने जा सके
हम सो सके
हम रो सके
रविवार का दिन था। सबकी छुट्टी थी। आसमान साफ था और ठंडी-ठंडी हवा बह रही थी। सूरज की किरणें शहर के ऊपर बिखरी थीं। धूप में गरमी नहीं थी। मौसम सुहावना था। बिलकुल वैसा जैसा एक पिकनिक के लिए होना चाहिये। मन्नू सोचने लगा, काश! आज हम कहीं घूमने जा सकते। मन्नू रसोई में आया। माँ बेसिन में बर्तन धो रही थी।"माँ क्या आज हम कहीं घूमने चल सकते हैं?" मन्नू ने पूछा।"क्यों नही, अगर तुम्हारा स्कूल का काम पूरा हो गया तो हम ज़रूर घूमने चलेंगे।" माँ ने कहा।"मैं आधे घंटे के अंदर स्कूल का काम पूरा कर सकता हूँ।" मन्नू ने कहा।मन्नू स्कूल का काम करने बैठ गया।"हम कहाँ घूमने चलेंगे?" मन्नू ने पूछा।"बाबा और मुन्नी ने गांधी पार्क का कार्यक्रम बनाया है।" माँ ने बताया।"यह पार्क तो हमने पहले कभी नहीं देखा?" मन्नू ने पूछा।"हाँ, इसीलिये तो।" माँ ने उत्तर दिया।मन्नू काम पूरा कर के बाहर आ गया।"क्या गांधी पार्क बहुत दूर है?" मुन्नी ने पूछा।"हाँ, हमें कार से लम्बा सफर करना होगा।" बाबा ने बताया।सुबह के काम पूरे कर के सब लोग तैयार हुए। माँ ने खाने पीने की कुछ चीज़ें साथ में ली और वे सब कार में बैठ कर सैर को निकल पड़े।
मुन्नी ने किस पार्क का कार्यक्रम बनाया था ?
खली पार्क
गाँधी पार्क
रोहन पार्क
कोई भी नहीं
रास्ता मज़ेदार था। सड़क के दोनो ओर पेड़ थे। हरी घास सुंदर दिखती थी। सड़क पर यातायात बहुत कम था। सफ़ेद रंग के बादल आसमान में उड़ रहे थे। बाबा कार चला रहे थे। मुन्नी ने मीठी पिपरमिंट सबको बांट दी। कार में गाने सुनते हुए रास्ता कब पार हो गया उन्हें पता ही नहीं चला। बाबा ने कार रोकी। माँ ने कहा सामान बाहर निकालो अब हम उतरेंगे।गांधी पार्क में अंदर जा कर मुन्नी ने देखा चारों तरफ हरियाली थी। वह इधर-उधर घूमने लगी। बहुत से पेड़ थे। कुछ दूर पर एक नहर भी थी। नहर के ऊपर पुल था। उसने पुल के ऊपर चढ़ कर देखा। बड़ा सा बाग था। एक तरफ फूलों की क्यारियाँ थीं। थोड़ा आगे चल कर मुन्नी ने देखा गाँधी जी की एक मूर्ति भी थी।
सड़क के दोनों किनारे क्या था ?
आम
पेड़
दही
कुछ नहीं
बचेंद्री पल का जन्म कहाँ हुआ?
उत्तरप्रदेश
उत्तरांचल
मध्यप्रदेश
नेपाल
अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था?
लोपसांग
कर्नल खुल्लर
उपनेता प्रेमचंद
तेनजिंग
जलवायु अनुकूल न होने के कारण किसकी मृत्यु हो गई?
शेरपा कुली की
अभियान दल के सदस्य की
रसोई सहायक की
किसी की नहीं
कैंप चार के बाद बिना ऑक्सीजन के कौन चढ़ाई करने वाला था?
बचेंद्री पाल
बिस्सा
जय
अंगदोरजी
एवरेस्ट पर पहुँचकर किसने फोटो लेना शुरू किया?
अंगदोरजी
सोनम पुलजर
बचेंद्री पाल
तेनजिंग
अंगदोरजी बिना ऑक्सीजन के एवरेस्ट पर कितनी बार चढ़े थे?
दो बार
एक बार
तीन बार
चार बार
हिमपात किसे कहते हैं?
बर्फ़ीली हवा को
बर्फ़ की नदी को
बर्फ़ की दरारों को
बर्फ़ के गिरने को
'दुर्गम' शब्द का क्या अर्थ है?
दुख
कठिन मार्ग
दूर मार्ग
सरल मार्ग
एवरेस्ट अभियान दल कहाँ से कहाँ के लिए चला?
मुंबई से काठमांडू
दिल्ली से काठमांडू
दिल्ली से असम
दिल्ली से उत्तराखंड
शेर्पालैंड का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नगरीय क्षेत्र कौन-सा है?
नेमचा बाज़ार
नेमचे बाज़ार
नमचा बाज़ार
नमचे बाज़ार
"एवरेस्ट जैसे महान् अभियान में मृत्यु को भी स्वीकार कर लेना चाहिए|" ऐसा किसने कहा?
कर्नल खुल्लर
उपनेता प्रेमचंद
तेंजिंग
डॉ. मीनू मेहता
अग्रिम दल का नेतृत्व कौन कर रहा था?
कर्नल खुल्लर
उपनेता प्रेमचंद
तेंजिंग
डॉ. मीनू मेहता
हिमपात किसे कहते हैं?
बर्फ की नदी
बर्फ के पहाड़
बर्फ का गिरना
बर्फ की चट्टान
बर्फ के फूल का नाम क्या था?
फ्लूम
ब्लूम
प्लूम
पलूम
हिम विदर क्या है?
बर्फ की चट्टान
बर्फ में आने वाली गहरी दरारें
बर्फ के पहाड़
बर्फीली चोटियाँ
'पृथ्वी पर बहुत अधिक कठोर जगह' कौन-सी है?
साउथ कोल
नॉर्थ कोल
नॉर्थ पोल
साउथ पोल
लेखिका एवरेस्ट की चोटी पर कब पहुँची?
23 मई 1984 दोपहर 1:06 बजे
23 मई 1983 दोपहर 1:07 बजे
23 मई 1984 दोपहर 1:07 बजे
23 मई 1983 दोपहर 1:06 बजे
कर्नल खुल्लर ने सभी सदस्यों को सहज भाव से क्या स्वीकार करने को कहा?
कठिन चढाई
मृत्यु
परेशानियाँ
इनमें से कुछ नहीं
बछेंद्री पल की नींद कैसे खुली थी
एक जोरदार धमाके की आवाज से
भारी चीज के शरीर ऊपर से जाने से
साँस लेने मे कठिनाई होने से
सर पर कोई सक्त चीज़ टकराने से
