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Worksheetssamaas aur alankaar
Total questions: 30
Worksheet time: 15mins
समास का शाब्दिक अर्थ होता है
संक्षेप
विस्तार
विग्रह
विच्छेद
इनमे से कोन कोन से शब्द अव्ययीभाव समास है
दारोदार
सुपुत्र
प्रतिदिन
भीष्मृतु
देवासुर में कौन सा समास है
बहूव्रीहि
कर्मधारय
तत्पुरुष
द्वंद्व
कौन सा शब्द बहूब्रिही समास का सही उदाहरण है
निशिदिन
त्रिभुवन
पंचानन
पुरुषसिंह
किसमें सही सामासिक पद है
पुरुषधन्वी
दिवारात्रि
त्रिलोकी
मंत्रीपरिषद
’जलमग्न’ शब्द में कौन-सा समास होगाः
द्वन्द्व
अव्ययीभाव
तत्पुरुष
द्विगु
जहाँ कोई शब्द एक बार प्रयुक्त हो, किन्तु प्रसंग–भेद से उसके अर्थ एक से अधिक हों, वहाँ अलंकार होता है I
श्लेष
रूपक
उत्प्रेक्षा
सन्देह
अव्ययीभाव समास का एक उदाहरण यथाशक्ति का सही विग्रह क्या होगा
जैसी शक्ति
जिसकी शक्ति
शक्ति के अनुसार
जिसके लिए शक्ति
राजदूत शब्द के समस्त पद का विग्रह होगा |
राज का दूत
राजा और दूत
राजा के लिए दूत
राजा द्वारा दूत
तीन मंजिल वाला शब्द का समस्त पद बनाइये
तीन है जो मंजिल
तिमंजिला
तीन-मंजिल
तीनों मंजिल
अनुज -अग्रज का समास विग्रह होगा
अनुज का अग्रज
अनुज है जो अग्रज
अनुज और अग्रज
अनुज अग्रज का समाहार
दशमुख में कौन सा समास है
कर्मधारय
बहूव्रीहि
बहूव्रीहि
द्विगु
जिस समास में दूसारा शब्द प्रधान रहता है, उसे कहतै है-
अव्ययीभाव समास
तत्पुरुष समास
द्वन्द्व समास
बहुव्रीहि समास
जिसमें पहला शब्द विशेषण हो और दूसरा शब्द विशेष्य तो उसे कौन-सा समास कहेंगे-
द्विगु
कर्मधारय
द्वन्द्व
तत्पुरूष
’कृष्ण और सुदामा गुरूभाई थे’- में कौन समास है-
अव्ययीभाव समास
तत्पुरुष समास
द्वन्द्व समास
बहुव्रीहि समास
बहुवरीही समास की परिभाषा क्या होती है ?
वह समास होता है जिसमें दोनों पद में कोई पद प्रधान नहीं होता है। तथा दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं
जिस समस्त पद में कोई एक पद अव्यय या उपसर्ग हो तथा कोई दूसरा पद संज्ञा ससे बहुव्रीही समास कहते है
वह समास जिसमें पहला पद संख्यावाचक विशेषण हो और अन्य सभी पद किसी समूह या किसी समाहार का बोध करवाते हो ससे बहुव्रीही समास कहते है
ऐसे समास शब्द जिनमें समस्त या दोनों पद प्रधान हो और जब उन शब्दों का समास किया जाता है तो दोनों पदों को मिलाते समय और, अथवा, या, एवं इत्यादि योजक शब्दों का उपयोग ससे बहुव्रीही समास कहते है
कहै कवि बेनी, बेनी ब्याल की चुराई लानी।’ में कौन सा अलंकार है।
अनुप्रास
यमक
उपमा
रूपक
‘उषा सुनहरे तीर बरसाती, जय लक्ष्मी-सी उदित हुई।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) मानवीकरण अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
‘कढ़त साथ ही म्यान तें, असि रिपु तन ते प्रान ।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अतिश्योक्ति अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंका
i
ii
iii
iv
‘ईस भजनु सारथी-सुजाना , बिरति-वर्म संतोष कृपाना।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
‘रावनु रथी विरथ रघुवीरा’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
‘रति-रति शोभा सब रति के सरीर की’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
‘आवत जात कुंज की गलियन रूप सुधा नित पीजै। गोपी पद-पंकज पावन की रज जामे भीजै।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
‘कहती हुई यूँ उत्तरा के नेत्र जल से भर गए। हिम कणों से पूर्ण मानों हो गए पंकज नए।।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) अतिश्योक्ति अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
iii
ii
iv
‘बरसत बारिद बून्द गहि’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
‘केकी रव की नुपुर ध्वनि सुन, जगती जगती की मूक प्यास।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
कुकि – कुकि कलित कुंजन करत कलोल।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
‘इस सोते संसार बीच, जगकर सजकर रजनीबाले।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) मानवीकरण अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
कंकन किंकिन नूपुर धुनि सुनि। कहत लखन सं राम ह्रदय गुनि।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
‘राम नाम-अवलंब बिनु परमार्थ की आस, बरसत बारिद बूँद गहि चाहत चढ़न अकास।’ में कौन सा अलंकार है।
(i) अनुप्रास अलंकार
(ii) यमक अलंकार
(iii) उपमा अलंकार
(iv) रूपक अलंकार
i
ii
iii
iv
