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Worksheetsदीवानों की हस्ती
Total questions: 10
Worksheet time: 7mins
दीवानों की हस्ती’ कविता के रचयिता कौन हैं ?
महादेवी वर्मा
भगवतीचरण वर्मा
जया जादवानी
सुभाष गताडे
दीवाने संसार से कैसा भाव रखते हैं?
मैत्रीभाव
सम भाव
ईर्ष्या भाव
भावुकता से भरा भाव
सुख-दुख में कौन-सा समास है?
तत्पुरुष
द्विगु
कर्मधारय
द्वंद्व
हम दीवानों की क्या हस्ती,हैं
आज यहाँ, कल वहाँ चले,
मस्ती का आलम साथ चला,
हम धूल उड़ाते जहाँ चले।
आए बनकर उल्लास अभी,
आँसू बनकर बह चले अभी,
सब कहते ही रह गए, अरे,
तुम कैसे आए, कहाँ चले?
पंक्तियों के आधार पर दीवानों की हस्ती क्यों नहीं है ?
क्यों कि वो एक जगह पर नहीं रहते
क्यों कि उनका सारा जीवन मातृभूमि के लिए समर्पित रहता है
क्यों कि उनका सारा जीवन अपने परिवार के लिए समर्पित रहता है
क्यों कि उनका सारा जीवन भारत भ्रमण के लिए समर्पित रहता है
किस ओर चले? यह मत पूछो,
चलना है, बस इसलिए चले,
जग से उसका कुछ लिए चले,
जग को अपना कुछ दिए चले,
दो बात कही, दो बात सुनी;
कुछ हँसे और फिर कुछ रोए।
छककर सुख-दुख के घुटों को
हम एक भाव से पिए चले।
इन पंक्तियों में स्वंत्रता सेनानियों की किन भावनाओं का निरूपण किया गया है ?
वो सुख-दुख में भी अपना जीवन सदा समर्पण के लिए उद्यत रहते नहीं हैं |
वो सुख-दुख में भी अपना जीवन कभी-कभी समर्पण के लिए उद्यत रहते हैं |
वो सुख-दुख में भी अपना जीवन सदा समर्पण के लिए उद्यत रहते नहीं हैं | ऐसा माना जा सकता है |
वो सुख-दुख में भी अपना जीवन सदा समर्पण के लिए उद्यत रहते नहीं हैं | ऐसा निश्चित रूप से सत्य है
हम भिखमंगों की दुनिया में,
स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले,
हम एक निसानी-सी उर पर,
ले असफलता का भार चले।
अब अपना और पराया क्या?
आबाद रहें रुकनेवाले!
हम स्वयं बँधे थे और स्वयं
हम अपने बंधन तोड़ चले।
कवि ने दुनिया को भिखमंगों की दुनिया कहा है | क्या ऐसा कवि को कहना चाहिए था ?
कवि की अपनी मर्जी है , कुछ भी कह सकता है |
कवि का अनुभव रहा होगा तो कह दिया होगा | लेकिन मुझे क्या ?//
निश्चित रूप से कवि ने एकदम सत्य कहा हैं , आजकल लोग स्वार्थी हो गए हैं |
कवि को ऐसा नहीं कहना चाहिए था , क्यों कि ऐसा कहने से लोग बदल नहीं जाएँगे |
हम भिखमंगों की दुनिया में,
स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले,
हम एक निसानी-सी उर पर,
ले असफलता का भार चले।
अब अपना और पराया क्या?
आबाद रहें रुकनेवाले!
हम स्वयं बँधे थे और स्वयं
हम अपने बंधन तोड़ चले।
दीवाने अपने बंधन तोड़कर किस ओर बढ़ना चाहते हैं?
धर्म की ओर, जहाँ केवल अधर्म की बात करना धर्म माना जाता है |
दीवाने अपने बंधन तोड़कर अपनी जिंदगी को मोक्ष की दिशा में बढ़ाना चाहते हैं।
दीवाने अपने बंधन तोड़कर अन्यत्र लोगों को खुशियाँ बाँटते हुए स्वतंत्रता के लिए कुरबान होने की दिशा में बढ़ना चाहते हैं। लेकिन उनका मन विचलित है , वो कन्फ्यूज्ड हैं |
दीवाने अपने बंधन तोड़कर अन्यत्र लोगों को खुशियाँ बाँटते हुए स्वतंत्रता के लिए कुरबान होने की दिशा में बढ़ना चाहते हैं।
भगवती चरण वर्मा ने किस पत्रिका का सम्पादन किया ?
विचार
बालप्रबोधिनी
कंकाल
प्रतिमा
हस्ती का अर्थ है -
हाथी
अस्तित्व
हंस
हँसी का विलोम शब्द
आबाद रहें रुकने वाले !
इस पंक्ति में किस विराम चिह्न का प्रयोग है ?
योजक
विस्मयादिबोधक
हंसपद
अर्धविराम
