Worksheetsदोपहर का भोजन -अमरकांत
Total questions: 20
Worksheet time: 10mins
दोपहर का भोजन कहानी में कितने पात्र हैं ?
चार
तीन
छह
पाँच
सिद्धेश्वरी देवी के कितने पुत्र थे?
दो
तीन
चार
एक
सिद्धेश्वरी देवी से 'गुड़ का रस' किसने माँगा?
मोहन ने
चंद्रिका प्रसाद जी ने
रामचंद्र ने
प्रमोद ने
'दोपहर का भोजन' शीर्षक रचना हिंदी साहित्य की किस विधा में लिखी है?
कविता
लेख
कहानी
संस्मरण
'दोपहर का भोजन' पाठ में किस परिवार की आर्थिक स्थिति को दर्शाता गया है?
निम्नवर्गीय परिवार की
निम्न मध्यवर्गीय परिवार की
मध्यमवर्गीय परिवार की
उपर्युक्त सभी
सिद्धेश्वरी देवी सभी से एक-दूसरे के बारे में झूठ क्यों बोलती है?
उसे झूठ बोलना पसंद था।
वह परिवार वालों से डरती थी।
उसके परिवार के सदस्यों को झूठी तारीफ़ें सुनना पसंद था।
अपने परिवार की आपसी एकता व प्रेम को अक्षुण्ण रखने के लिए।
रामचंद्र की आयु कितनी थी?
पाँच वर्ष
आठ वर्ष
अट्ठारह वर्ष
इक्कीस वर्ष
सिद्धेशवरी किसकी पत्नी है?
प्रमोद
मुंशी चंद्रिका प्रसाद
रामचंद्र
मोहन एवं प्रमोद
रामचंद्र, मोहन और मुंशीजी खाते समय रोटी न लेने का बहाना करते हैं क्योंकि--
रोटी अच्छी नहीं बनी थी
उनका पेट भर गया था
रोटी खत्म हो गई थी
रोटी पर घी नहीं लगा था
सिद्धेश्वरी का एक दूसरे सदस्य के विषय में झूठ बोलना परिवार को जोड़ने का अनथक प्रयास था-
सही
गलत
कारण स्पष्ट नहीं बताया गया
कथन अपूर्ण है
तो थोड़े गुड़ का रस बनाओ, पीऊँगा। किसने ,किससे कहा-
प्रताप ने माँ से
पति ने पत्नी से
बेटे ने माँ से
मोहन के पड़ोसी ने
मुंशी चन्द्रिका प्रसाद किस विभाग में नौकरी किया करते थे?
खेल विभाग
परीक्षा विभाग
बाढ़ नियन्त्रण विभाग
किराया नियन्त्रण विभाग
रामचंद्र क्या काम किया करता था?
पढाई
लिखाई
प्रूफ रीडिंग
मीटर रीडिंग
कहानी के अनुसार प्रमोद किस चीज़ के लिए रोया था ?
जलेबी
रेवड़ी
बर्फी
इमारती
सिद्धेश्वरी रामचन्द्र को किस नाम से पुकारती थी ?
रामू
राम
बडकू
छोटू
सिद्धेश्वरी का मँझला लड़का किस इम्तहान देने की तैयारी कर रहा था?
हाई स्कूल
मिडिल स्कूल
सिविल सेवा
प्राथमिक
सिद्धेश्वरी ने सबके लिए खाने में क्या परोसा था ?
तीन रोटियाँ, कटोरा-भर दाल, चने की तली तरकारी।
दो रोटियाँ, कटोरा-भर पनियाई दाल, चने की तली तरकारी।
दो रोटियाँ, दाल,मखनी चने की तली तरकारी।
दो रोटियाँ, कटोरा-भर दाल, पापड़ और अचार
मुंशी जी ने किसकी लडकी की शादी की सूचना दी?
गया प्रसाद
गंगा प्रसाद
गंगाशरण
गंगाधर
सिद्धेश्वरी ने चौंकते हुए पूछा, 'एक रोटी देती हूँ?'-इस कथन पर मोहन की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उसने माँ को डरकर देखा
उसने विस्मय से देखा
उसने रहस्यमय नेत्रों से देखा
उसने अनदेखा क्र दिया
कहानी के अंत में मुंशी जी कैसे सो रहे थे?
आँखें खोलकर
चादर तान कर
पेट के बल हो कर अचेत होकर
औंधे मुँह हो कर निश्चिंतता के साथ
