Worksheetsगद्यांश आकलन
Total questions: 10
Worksheet time: 30mins
किन मनुष्यों को आत्मनिर्भर कहा जा सकता हैं?
जो आत्मज्ञान के लिए साधना करते हैं।
जो आत्मा - परमात्मा का अंतर समझ जाते हैं।
जो अपने आत्मसम्मान का ध्यान रखते हैं।
जो किसी भी कार्य के लिए दूसरों का मुँह नहीं ताकतें।
किसी भी समाज और राष्ट्र की सफलता की पहली सीढ़ी क्या है?
देश के लोग देशभक्त हो
देश के पास अपार धन हो
देश के नागरिक स्वावलंबी हो
इनमें से कोई नहीं
शिशु को आनंद कब प्राप्त होता है?
जब वह अपनी माँ पर आश्रित होता है।
जब उसकी माँ उसे प्यार करती है।
जब वह अपना कार्य स्वयं करने लगता है।
जब वह अपने दोस्तों के साथ समय बिताता है।
पेड़ -पौधें हमें किस प्रकार स्वावलंबी होने की शिक्षा देते हैं?
हमारे लिए फल देकर
चारों ओर हरियाली फैलाकर
अपना भोजन स्वयं बनाकर
तीनोंमें से कोई नहीं
आत्मनिर्भरता शब्द में प्रत्यय लगा है...
आत्म
ता
रता
निर्भरता
आत्मनिर्भरता
इसका विग्रह और समास होगा ..
आत्म (स्वयं) पर निर्भर - तत्पुरुष समास
आत्म के समान निर्भर - कर्मधारय समास
आत्मा और निर्भर - द्वंद्व समास
आत्म की निर्भरता - संबंध तत्पुरुष
कूट-कूट कर भरा है का अर्थ है...
पर्याप्त मात्रा में होना
भरपूर मात्रा में होना
ठूँस-ठूँस कर भरना
भारी होना
दूसरे पर आश्रित होना
इस अर्थ का गद्यखण्ड में दिया मुहावरा है...
मुँह नही ताकना
जाग्रत करना
पहली सीढ़ी होना
मुँह ताकना
शिशु की यह प्रसन्नता स्वावलंबन का आनंद है।
इस वाक्य में आई भाववाचक संज्ञा नही हैं...
प्रसन्नता
आनंद
शिशु
स्वावलंबन
'सफलता' में मूल शब्द है..
सफल
फल
फलता
सभी गलत हैं
