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Total questions: 5
Worksheet time: 3mins
साई इतना दीजिए जा में कुटुम समाये, मैं भी.....
भूका राहून साधू भी भूका जाये
एक दिन ऐसा आएगा मैं रोंदूंगी टोये
भूखा ना रहूँ साधू भी भूखा ना जाये
.................मांगन से तो मरना भला, यह सतगुरु की सीख
मुखिया मुखु सो चाहिए, खान पान कहुँ एक
दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान
माँगन मरण समान है, मति मांगो कोई भीख
प्रस्तुत दोहे की व्याख्या कीजिये-
मुखिया मुखु सो चाहिए ............ तुलसी रहित बिबेक||
मुखिया मुख के समान होना चाहिए जो खाने पाने वाला अकेला है परंतु पालन पोषण सब अंगों का करता है
दुख में सब ईश्वर को याद करते हैं परंतु सुख में कोई याद नही करता। यदि कोई ईश्वर को सुख में याद करे तो उसे कभी दुख न हो
रिश्तों का धागा बहुत कोमल होता है उसे संभाल कर रखना चाहिए क्योंकि अगर वे एक बार टूट जाए तो दोबारा जुड़ने पर गांठ पड़ जाती है
निमंलिखित दोहे के कवि कौन हैं-
वृक्ष कभों नही फाल चखें, नदी न सांचे नीर। परमार्थ के करने, साधुन धरा सरीर||
(a)
जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाही ।सब अँधियारा मिट गया, दीपक देखा माही||
इस दोहे में दीपक को क्या माना गया है?
अहंकार का दीपक
ज्ञान का दीपक
पूजा का दीपक
