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Worksheetsलघु जैन सिद्धांत प्रवेशिका प्रश्न पार्ट - 6
Total questions: 15
Worksheet time: 8mins
इन्द्रिय और मन के निमित्त से होने वाले ज्ञान को क्या कहते है।
मन:पर्यय ज्ञान
अवधि ज्ञान
मति ज्ञान
केवल ज्ञान
आत्मा की शुद्ध अनुभूति रूप श्रुतज्ञान परिणति को क्या कहते है।
द्रव्य मतिज्ञान
भाव श्रुतज्ञान
द्रव्य श्रुतज्ञान
भाव मतिज्ञान
द्रव्य , क्षेत्र , काल और भाव की मर्यादासहित रूपी पदार्थों के स्पष्ट प्रत्यक्ष ज्ञान को क्या कहते है।
श्रुतज्ञान
मन:पर्ययज्ञान
अवधिज्ञान
केवलज्ञान
द्रव्य क्षेत्र काल और भाव की मर्यादासहित दूसरे के मन में स्थित रूपी पदार्थों के स्पष्ट प्रत्यक्ष ज्ञान को क्या कहते है।
मतिज्ञान
अवधिज्ञान
मन: पर्ययज्ञान
इनमें से कोई नहीं
एक जीव में एक साथ कितने ज्ञान हो सकते है।
कम से कम 1, अधिक से अधिक 4
कम से कम 2, अधिक से अधिक 4
कम से कम 1, अधिक से अधिक 3
कम से कम 1, अधिक से अधिक 5
आत्मा सदा स्वरूप से है , पररूप से नहीं , ऐसी दृष्टि ही सच्ची है।
स्याद्वाद दृष्टि
अनेकांत दृष्टि
स्वपर दृष्टि
इनमें से कोई नहीं
स्याद्वाद में स्यात् शब्द का अर्थ क्या है।
कथन
वाद
कथंचित
वास्तव में जैनत्व का प्रारंभ किससे होता है और वह कौनसे गुणस्थान में प्रगट होता है।
व्यवहार सम्यग्दर्शन ,4 गुणस्थान
निश्चय सम्यग्दर्शन , 4 गुणस्थान
व्यवहार मिथ्यादर्शन , 1 गुणस्थान
इनमें से कोई नहीं
अपने स्वभाव में अकषायरूप प्रवृत्ति करना क्या कहलाता है।
श्रद्धा
ज्ञान
चारित्र
चारित्र के कितने भेद है।
2
3
4
5
इनमें से चारित्र का भेद नहीं है।
स्वरूपाचरण चारित्र
यथाशक्ति चारित्र
देश चारित्र
सकल चारित्र
निश्चय सम्यग्दर्शन होने पर आत्मानुभव पूर्वक आत्मस्वरुप में जो स्थिरता होती है , उसे क्या कहते है।
स्वरूपाचरण चारित्र
देश चारित्र
यथाख्यात चारित्र
सकल चारित्र
शुद्ध निश्चय से क्या होता है।
बंध
धर्म
कर्म
अनन्तानुबंधी तथा अप्रत्याख्यानावरण कषायो के अभाव होने पर कौनसा चारित्र प्रगट होता है।
स्वरूपाचरण चारित्र
यथाख्यात चारित्र
देश चारित्र
सकल चारित्र
मुनिपद में 28 मूलगुण आदि के शुभभाव होते हैं , उसे क्या कहते है।
निश्चय सकल चारित्र
व्यवहार यथाख्यात चारित्र
निश्चय देश चारित्र
व्यवहार सकल चारित्र
