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Worksheetsमौसम कविता सही मिलान कीजिए
Total questions: 10
Worksheet time: 5mins
प्रकृति के हैं रूप निराले,
गरम हवा से सागर का जल,
भाप बन-बन उड़ जाता है।
आओ देखो मौसम मतवाले ।
जो छम-छम बरसा करते हैं।
गरम हवा से सागर का जल,
वर्षा धरती की प्यास बुझाती,
भाप बन-बन उड़ जाता है।
आओ देखो मौसम मतवाले ।
जो छम-छम बरसा करते हैं।
इसी भाप से बनते बादल,
वर्षा धरती की प्यास बुझाती,
भाप बन-बन उड़ जाता है।
आओ देखो मौसम मतवाले ।
जो छम-छम बरसा करते हैं।
वर्षा धरती की प्यास बुझाती,
जिससे चारों ओर हरियाली छाती।
भाप बन-बन उड़ जाता है।
आओ देखो मौसम मतवाले ।
जो छम-छम बरसा करते हैं।
हम फल-फूल और अनाज पाते,
जिससे चारों ओर हरियाली छाती।
भाप बन-बन उड़ जाता है।
आओ देखो मौसम मतवाले ।
जिससे जन अपनी भूख मिटाते।
पृथ्वी जब ठिठुरती जाड़े से,
जिससे चारों ओर हरियाली छाती।
भाप बन-बन उड़ जाता है।
सूरज की किरणें उसे बचाती।
जिससे जन अपनी भूख मिटाते।
घर-आँगन में बिखर-बिखर,
जिससे चारों ओर हरियाली छाती।
खेतों मे वे फसल पकातीं।
सूरज की किरणें उसे बचाती।
जिससे जन अपनी भूख मिटाते।
किरणों से जब जाड़ा उड़ता,
सब ओर बसंत का मेला जुड़ता।
खेतों मे वे फसल पकातीं।
सूरज की किरणें उसे बचाती।
जिससे जन अपनी भूख मिटाते।
चारों दिशाओं में खुशियाँ छाती,
सब ओर बसंत का मेला जुड़ता।
खेतों मे वे फसल पकातीं।
जीवन में मधुरता भर जाती।
जिससे जन अपनी भूख मिटाते।
सूरज भैया से हम सीखें,
सब ओर बसंत का मेला जुड़ता।
खेतों मे वे फसल पकातीं।
जीवन में मधुरता भर जाती।
औरों के लिए नित जीना।
