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WorksheetsGita Utsav
Total questions: 41
Worksheet time: 49mins
श्रीमद्भागवत गीता के प्रथम श्लोक में युद्धभूमि कुरुक्षेत्र को धर्म क्षेत्र क्यों कहा गया है?
क्योंकि उस स्थान पर युद्ध से पहले धर्म कार्य हुआ करते थे !
क्योंकि कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि में अर्जुन के पक्ष में श्री भगवान स्वयं उपस्थित थे!
5000 वर्ष पूर्व सभी युद्ध भूमि क्षेत्र को धर्म क्षेत्र कहा जाता था!
उपरोक्त सभी सही हैं!
श्रीमद्भगवद्गीता में कृपण व्यक्ति किसे कहा गया है
कृपण वह है जो आत्मसाक्षात्कार के विज्ञान को समझे बिना कुकर सूकर की भांति इस संसार को त्याग कर चला जाता है!
कृपण वह है जो धर्म के कार्यों में अपना धन खर्च नहीं करता है!
कृपण वह है जो सभी से झगड़े करता रहता है!
उपरोक्त सभी गलत है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार किसे विद्वान कहा गया है?
जो शास्त्र अध्ययन में पूर्णता हासिल कर चुका हूं!
जो किसी भी अवस्था में शरीर के लिए, चाहे वह जीवित हो या मृत शौक नहीं करता!
जो यह जानता है कि अत्यधिक धनवान कैसे बना जाए
उपरोक्त में से कोई नहीं
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार सुख की स्थिति व दुख की स्थिति में व्यक्ति का क्या मनोभाव होना चाहिए?
सुख में अत्यधिक सुखी अनुभव करना चाहिए वह दुख में अत्यधिक दुखी अनुभव करना चाहिए!
सुख में सुख भोगना चाहिए और जब दुख आए तब हमें भगवान की शरण में जाना चाहिए!
मनुष्य को चाहिए कि सुख और दुख दोनों ही परिस्थितियों को अविचल भाव से सहन करना सीखें!
सुख और दुख दोनों ही परिस्थितियों में हमें सदैव मुस्कुराते रहना चाहिए!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार आत्मा के संदर्भ में निम्न में से कौन सा एक कथन गलत है!
आत्मा अजन्मा,नित्य, शाश्वत, तथा पुरातन है!
आत्मा ज्ञान से या चेतना से सदा पूर्ण रहता है!
शरीर में होने वाले परिवर्तनों का आत्मा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है!
भविष्य में वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से हम आत्मा को अपनी आंखों से देख पाएंगे!
श्रीमद भगवत गीता में आत्मा के द्वारा पुराने तथा व्यर्थ के शरीरों को त्याग कर नवीन भौतिक शरीर धारण करने को, किस उदाहरण के द्वारा समझाया गया है!
पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्रों को धारण करने के उदाहरण के द्वारा !
पुराने मकान को त्याग कर नवीन मकान में प्रवेश करने के उदाहरण द्वारा !
आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश नहीं करती है अतः कोई उदाहरण नहीं दिया गया है!
किसी पक्षी के एक पेड़ से उड़कर दूसरे पेड़ बदलने के उदाहरण के द्वारा
श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित निम्न कथनों में से कौन सा एक कथन गलत है!
सत्य के लिए युद्ध करना क्षत्रिय का धर्म है!
जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात पुनर्जन्म भी निश्चित है!
आत्मा न तो कभी किसी शास्त्र द्वारा खंड खंड किया जा सकता है ना अग्नि द्वारा जलाए जा सकता है ना जल द्वारा भिगोया या वायु द्वारा सुखाया जा सकता है!
आत्मा का संबंध केवल आध्यात्मिक पुस्तकों से है इसका वास्तविक जीवन से कोई लेना-देना नहीं है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार भगवान की सेवा में किए गए कर्म की क्या विशेषता है?
भगवान की सेवा में किए गए कर्म से ना कोई हानि होती है नहीं कोई हास्
भगवान की सेवा में किए गए अल्प कर्म से महान भय से रक्षा होती है!
यदि कृष्ण भावनामृत का 1% भी कार्य पूरा हुआ तो उसका स्थाई फल होता है अतः अगली बार 2% से शुभारंभ होगा
उपरोक्त सभी सही है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार व्यवसायित्मिका बुद्धि से क्या तात्पर्य है?
यह दृढ़ श्रद्धा की कृष्ण भक्ति द्वारा मनुष्य जीवन की सर्वोच्च सिद्धि प्राप्त की जा सकती है व्यवसायित्मिका बुद्धि कहलाती है!
प्रत्येक क्षेत्र में व्यवसाय किया जा सकता है, चाहे वह आध्यात्मिक क्षेत्र ही क्यों न हो, व्यवसायित्मिका बुद्धि कहलाता है!
प्रत्येक कार्य को व्यवसाय की सफलता को ध्यान में रखते हुए किया जाए तो वह व्यवसायित्मिका बुद्धि कहलाति है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार भौतिक प्रकृति के गुण कौन से हैं?
सतोगुण
तमोगुण
रजोगुण
उपरोक्त सभी
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार मनुष्य सुख-दुख, जय- पराजय, मान- अपमान, लाभ- हानि जैसी द्वैतताओ से ऊपर उठकर दिव्य अवस्था को कैसे प्राप्त करता है?
जब मनुष्य पुस्तकों का अध्ययन कर बहुत बड़ा विद्वान बन जाता है तब!
जब मनुष्य कठिन परिश्रम के द्वारा अत्यधिक धनवान बन जाता है तब!
जब मनुष्य अत्यधिक प्रसिद्ध होने के साथ उच्च पद पर स्थापित हो जाता है तब!
जब मनुष्य कृष्ण भक्ति को स्वीकार कर कृष्ण की इच्छा पर पूर्णतया आश्रित रहता है तब!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार भगवान की पूर्ण कृपा कौन प्राप्त कर सकता है?
जो समस्त राग तथा द्वेष से मुक्त है
जो अपनी इंद्रियों को संयम द्वारा वश में करने में समर्थ है!
उपरोक्त दोनों सही है!
अ व् ब दोनों गलत है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार कर्म बंधन से मुक्ति के लिए अपने नियत कर्मों को किसकी प्रसन्नता के लिए करना चाहिए?
अपने कर्मों को इस प्रकार करना चाहिए जिससे परिवारिक सदस्यों व मित्रों की प्रसन्नता हो!
अपने नियत कर्मों को इस प्रकार करना चाहिए जिससे भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न हो !
अपने नियत कर्मों को केवल अपनी प्रसन्नता के लिए करना चाहिए
उपरोक्त सभी सही है!
श्रीमदभगवत गीता के अनुसार मनुष्य न चाहते हुए भी पाप कर्मों के लिए प्रेरित क्यों होता है?
इसका कारण रजोगुण से उत्पन्न काम है!
इसका कारण है कि वह संविधान के बताए गए नियमों का पालन नहीं करता!
इसका कारण मनुष्य का मनमौजी स्वभाव है!
उपरोक्त सभी सही है!
श्रीमद भगवत गीता का अध्ययन हमें किस प्रकार करना चाहिए?
अपने तर्क वितर्क के आधार पर !
गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत किसी शुद्ध भक्त के अनुगत्य में रहकर
संस्कृत के महान विद्वान के मार्गदर्शन में
उपरोक्त में से कोई नहीं!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार निम्न में से कौन एक भगवान के संसार में प्रकट होने का कारण नहीं है!
भगवान दुष्टों के विनाश के लिए संसार में प्रकट होते हैं!
भगवान भक्तों के उद्धार के लिए संसार में प्रकट होते हैं!
भगवान धर्म की रक्षा के लिए संसार में प्रकट होते हैं!
भगवान इस संसार का सुख भोगने के लिए प्रकट होते हैं!
श्रीमदभगवत गीता के अनुसार चार वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्र चार वर्ण किस आधार पर निर्मित किए गए हैं!
जन्म के आधार पर अर्थात जिसका जन्म जिस वर्ण में हुआ है वह उसी वर्ण में हमेशा बना रहेगा!
गुण व कर्म के आधार पर अर्थात व्यक्ति का वर्ण उसके गुणों व कर्मों के आधार पर तय होगा!
श्रीमद्भगवद्गीता में किसी भी वर्ण का कोई वर्णन नहीं है, वर्ण व्यवस्था तो कालांतर में सामान्य व्यक्तियों के द्वारा निर्मित की गई है!
वर्ण का निर्धारण व्यक्ति के धनवान व निर्धन होने से तय किया गया है!
गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत आने वाले गुरु से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का निम्न में से कौन सा एक सही तरीका नहीं है!
अहंकार रहित होकर दास की तरह गुरु की सेवा करनी चाहिए!
विनीत होकर जिज्ञासा करनी चाहिए!
अपने मनोधर्म व शुष्क तर्कों को त्याग कर गुरु के वचनों को यथारूप पालन करना चाहिए!
गुरु को चुनौती देकर उसके ज्ञान को परखना चाहिए!
श्रीमदभगवत गीता के अनुसार विद्वान व्यक्ति भौतिक इंद्रियों से प्राप्त होने वाले सुखों का आनंद क्यों नहीं लेता?
क्योंकि यह भौतिक इंद्रियों के संसर्ग से उत्पन्न होते हैं!
क्योंकि ऐसे भोगो का आदि व अंत होता है!
क्योंकि वह आध्यात्मिक मार्ग का अनुसरण कर दिव्य आनंद प्राप्त करना चाहता है!
उपरोक्त सभी सही है!
श्रीमदभगवत गीता के अनुसार समस्त भौतिक क्लेशो को कौन नष्ट कर सकता है!
जिसका जन्म उच्च कुल में हुआ हो और जो अत्यधिक धनवान हो!
जो दिन-रात कठिन परिश्रम कर अत्यधिक धन व प्रसिद्धि प्राप्त करना चाहता है!
योगाभ्यास द्वारा जो खाने सोने, आमोद - प्रमोद तथा काम करने की आदतों में नियमित रहता है!
उपरोक्त सभी सही हैं!
श्रीमदभगवत गीता के अनुसार सभी प्रकार के योगियों में कौन सर्वश्रेष्ठ योगी है?
ज्ञानयोगी
अष्टांग योगी
भक्ति योगी
कर्म योगी
प्रकृति के 3 गुणों वाली भगवान की शक्ति माया को कौन पार कर सकता है?
जो श्रीभगवान के पूर्ण शरणागत है!
जो सदैव शास्त्रों के अध्ययन में लगा रहता है!
जो सुबह से लेकर शाम तक अपने समस्त कार्यों को ईमानदारी से करता है!
उपरोक्त सभी सही है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार कौन श्री भगवान की शरण स्वीकार नहीं करता ?
जो निपट मूर्ख है और मनुष्य में अधम है!
जिसका ज्ञान माया द्वारा हर लिया गया है!
जो असुरों की नास्तिक प्रवृत्ति को धारण करता है!
उपरोक्त सभी सही है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार कौन व्यक्ति श्री भगवान के धाम को प्राप्त करता है?
जीवन के अंत में जो केवल श्री भगवान का स्मरण करते हुए शरीर का त्याग करता है!
जो व्यक्ति जीवन पर्यंत गरीबों की सेवा करता है!
जो व्यक्ति सन्यास आश्रम स्वीकार करता है!
उपरोक्त सभी सही है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार भगवान ने इस भौतिक संसार का स्वभाव कैसा बताया है!
भौतिक संसार अनित्य व दुखों से पूर्ण है!
भौतिक संसार आनंद से पूर्ण है!
भौतिक संसार आनंद से पूर्ण नहीं है परंतु प्रयास करके इसे आनंद पूर्ण बनाया जा सकता है!
भौतिक संसार गरीबों, कम पढ़े लिखे व निम्न कुल में जन्म लेने वालों के लिए कष्टप्रद तथा अमीरों, अधिक पढ़े लिखे व उच्च कुल में जन्म लेने वालो के लिए सुख प्रदान करने वाला है!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार निम्न में से किसे महात्मा कहा गया है?
जो निरंतर भगवान की महिमा का स्मरण करते हैं और गुणगान करते हैं!
जो बड़े-बड़े कथा पंडालों में प्रवचन देते हैं!
जो राजनीति में उच्च स्तर पर हैं व सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं!
उपरोक्त में से कोई नहीं!
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण जब इस भौतिक संसार में अवतरित होते हैं तो कौन उनके दिव्य स्वभाव को नहीं समझ पाता
(a)
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार हम जो कुछ खाते हैं,जो कुछ करते हैं, जो कुछ दान देते हैं, जो कुछ तपस्या करते हैं, उसे किसे अर्पित करते हुए करना चाहिए ?
(a)
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार यदि कोई जघन्य से जघन्य कर्म करता है परंतु भक्ति में दृढ़ता पूर्वक रत रहता है तो उसे क्या मानना चाहिए ?
(a)
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार परम भगवान श्री कृष्ण किन्हे बुद्धि प्रदान करते हैं जिससे वह श्री भगवान को प्राप्त कर सकें ?
(a)
श्रीमद्भगवद्गीता में नारद, असीत, देवल तथा व्यास जैसे ऋषियो व श्री अर्जुन के द्वारा किसे परम भगवान, परम पवित्र, परम सत्य व परमधाम बताया गया है ?
(a)
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार किस योग विधि के माध्यम से भगवान को उसी रूप में जाना जा सकता है जिस रूप में वह स्वयं है ?
(a)
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार मन का स्वभाव कैसा बताए गया है?
(a)
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार भौतिक जगत के सारे जीव किसके शाश्वत अंश है?
(a)
श्री भगवान के अनुसार जो शास्त्रों के आदेश की अवहेलना करता है और मनमाने ढंग से कार्य करता है, उसकी क्या स्थिति रहती है?
(a)
श्रीमद भगवत गीता में नरक के तीन द्वार कौन से है ?
(a)
कौन श्रीमद्भगवद्गीता को समझ सकता है?
(a)
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार देवता गण व महर्षि गण भी भगवान श्रीकृष्ण की उत्पत्ति या ऐश्वर्य को क्यों नहीं जानते? संक्षिप्त विवरण कीजिए ?
(a)
परम भगवान श्री कृष्णके अनुसार, जो भगवान की सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं या जो अव्यक्त निर्विशेष ब्रह्म की पूजा करते हैं इन दोनों में किसे अधिक सिद्ध माना गया है? और क्यों ? संक्षिप्त में वर्णन कीजिए
(a)
श्रीमद भगवत गीता के अनुसार मनुष्य ना चाहते हुए भी पाप कर्मों के लिए प्रेरित क्यों होता है? संक्षिप्त में वर्णन कीजिए!
(a)
प्रत्येक मनुष्य को श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं को अपने जीवन में क्यों उतारना चाहिए? अपने शब्दों में उत्तर दीजिए!
