WorksheetsBG CH 18 SHLOKAS
Total questions: 10
Worksheet time: 5mins
यज्ञदानतप:कर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत् ।
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिनाम् ॥
यह गीता का कौन सा श्लोक है?
18.14
18.55
18.5
18.73
ईश्वरः ______ ______ तिष्ठति ।
भ्रामयन_____ _____ मायया॥
सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि
हृद्देशेऽर्जुन सर्वभूतानां
सर्वभूतानि हृद्देशेऽर्जुन
सर्वभूतानां यन्त्रारूढानि
यन्त्रारूढानि सर्वभूतानां
सर्वभूतानि हृद्देशेऽर्जुन
सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन
सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि
कोई मुझे जैसा मैं हूँ, भगवान के परम व्यक्तित्व के रूप में समझ सकता है, केवल भक्तिमय सेवा द्वारा।
किस श्लोक में कहा है?
18.65
18.55
18.54
18.42
शमो दमस्तप: शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च ।
______________________
समः सर्वेषु भूतेषु मद् भक्तिम लभते पराम्।।
मामेवैश्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे।।
स्थितोऽस्मि गतसन्देह: करिष्ये वचनं तव ॥
ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्॥
1)अधिष्ठानं तथा कर्ता
2)दैवं चैवात्र पञ्चमम्
3)विविधाश्च पृथक्चेष्टा
4)करणं च पृथग्विधम्
सही क्रम में लगायें
3-2-1-4
1-3-2-4
1-4-2-3
1-4-3-2
ब्रह्मभूत: प्रसन्नात्मा न शोचति न काङक्षति ।
इसका क्या अर्थ है?
ना सोचता है ना काम करता है
ना शौच करता है ना कामना करता है
ना शोक करता है ना कामना करता है
ना शौच करता है ना कोई काम करता है
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः।।
यह गीता का कौन सा श्लोक है?
18.66
18.73
18.65
18.78
कौन से श्लोक में अर्जुन ने भगवान से कहा-जैसा आप ने कहा मैं वैसा ही करूंगा।
18.5
18.42
18.73
18.78
जहां योगेश्वर कृष्ण हैं, और जहां परम धनुर्धर अर्जुन हैं, वहां निश्चित रूप से ___, ____, ____ और ____भी होगी। ऐसा मेरा मत है।
श्लोक के अनुसार सही क्रम में बताएँ।
ऐश्वर्य, विजय, असाधारण शक्ति और नैतिकता
ऐश्वर्य,नैतिकता , असाधारण शक्ति और विजय
असाधारण शक्ति, ऐश्वर्य, विजय,और नैतिकता
नैतिकता, विजय, असाधारण शक्ति और ऐश्वर्य
18.65 श्लोक के अंतिम शब्द___
विशते तदनन्तरम्
लभते पराम्
मोक्षयिष्यामि मा शुचः
प्रियोऽसि मे
