NEW
Font size
WorksheetsGrand Finale
Total questions: 26
Worksheet time: 4mins
"तत्वज्ञान के अभ्यास से जब कोई पदार्थ इष्ट-अनिष्ट भासित ना हो, तब स्वयमेव ही क्रोधादि उत्पन्न नहीं होते हैं, तब सच्चा धर्म होता है।" उक्त उद्धरण किस ग्रंथ का है ?
मोक्षमार्ग प्रकाशक - पण्डित दौलतरामजी
मोक्षमार्ग प्रकाशक - पण्डित बनारसीदासजी
मोक्षमार्ग प्रकाशक - पण्डित टोडरमलजी
मोक्षमार्ग प्रकाशक - पण्डित बुधजनजी
निम्न में से गलत वाक्य है।
आत्मा में जिस तिथि को क्षमादिरूप शांति प्रकट होती है, वह तिथि पर्व कहलाती है।
धर्म का आधार तिथि नहीं आत्मा है।
केवल दसलक्षण पर्व में ही आत्मा की आराधना की जाती है।
पर्व का संबंध आत्मा के उत्तम क्षमादि गुणों की आराधना से है।
शास्त्रों में चार प्रकार के क्रोध में उक्त भेद नहीं पाया जाता है।
अनंतानुबंधी क्रोध
अप्रत्याख्यानावरण क्रोध
प्रत्याख्यानावरण क्रोध
सांपरायिक क्रोध
क्रोध और बैर में निम्न में से कौन-सा अंतर नहीं है ?
क्रोध किया जाता है और बैर धारण किया जाता है।
क्रोध अच्छा है और बैर बुरा है।
क्रोध में तत्काल प्रतिक्रिया होती है और बैर में मन में गांठ बांध ली जाती है।
क्रोध खतरनाक है और बैर क्रोध से भी अधिक खतरनाक है।
मान सम्मान की चाह तो ज्ञानियों के भी होती है, परन्तु
ज्ञानी के मान की चाह में उपादेयबुद्धि नहीं है ।
ज्ञानी के मान की चाह में उपादेबुद्धि होती हैं ।
मान की चाह में आंशिक मार्दव धर्म होता है ।
मान की उपादेय बुद्धि से संपूर्ण मार्दव धर्म होता है।
गलत कथन को चुनिए -
क्रोध प्रथम कषाय है और मान द्वितीय
क्रोध निंदा से होता है प्रशंसा से मान होता है l
क्रोध के निमित्त शत्रु बनते हैं, मान के निमित्त मित्र बनते हैं ।
क्रोध और मान दोनों रागरूप कषाय हैं ।
"मन में होय सो वचन उचरिये, वचन होय सो तन सो करिए ।" उक्त पंक्ति कहां की है?
दशलक्षण पूजन - द्यानतरायजी
दशलक्षण पूजन - बुधजनजी
दशलक्षण पूजन - वृंदावनदासजी
दशलक्षण पूजन - राजमलजी
"मन में होय सो वचन उच्चरिये" का क्या तात्पर्य है?
मन को ऐसा पवित्र बनाओ उसमें कोई खोटा भाव नहीं आयें ।
मन वाली बात मन में रखना और बोलने वाली बातें बोलना।
मन में कुछ और बोलने में कुछ और ही बोलना।
उक्त कोई नहीं
चतुर्विधस्य ................ निवृत्तिः शौचमुच्यते।
क्रोधस्य
लोभस्य
मानस्य
माया
............... के आश्रय से पर्याय में अपवित्रता प्रकट होती है l
स्व
पर
स्व - पर
उक्त कोई नहीं
उत्तम सत्य धर्म क्या है?
सच्ची वाणी
सत्य का उत्पादन करना
वस्तु को अच्छी बुरी जानना
वस्तु की सच्ची श्रद्धा तथा सच्ची समझ होना ।
उत्तम सत्य धर्म किसके नहीं पाया जाता ?
अविरत सम्यग्दृष्टि के
मिथ्यादृष्टि के
देशविरत के
सिद्धों के
"अथेन्द्रियसौख्यसाधनीभूतमिन्द्रियज्ञानं हेयं प्राणिंदति|" उक्त वाक्य किस ग्रन्थ का है ?
प्रवचनसार
श्रावकाचार
तत्त्वार्थसूत्र
सर्वार्थसिद्धि
" संयमन को संयम कहते हैं | " यह................... शास्त्र में लिखा है|
धवला पुस्तक 2
धवला पुस्तक 1
धवला पुस्तक 3
धवला पुस्तक 4
...........................से शरीर की आवश्यकता पूर्ति भी होती रहे और जिह्वा की लोलुपता पर भी प्रतिबन्ध रहें।
अनशन
अवमौदर्य
रसपरित्याग
वृत्तिपरिसंख्यान
बाह्यभ्यन्तर परिग्रह के त्याग को ...................तप कहते हैं l
व्युत्सर्ग
विनय
विनय
वैय्यावृत्य
तत्वार्थ राजवार्तिक में अकलंकदेव ने किसे त्याग कहा है ?
केवल सचेतन परिग्रह की निवृत्ति
केवल अचेतन परिग्रह की निवृत्ति
दोनों परिग्रह की निवृत्ति को
"त्याग परद्रव्यों का नहीं, अपितु अपनी आत्मा में परद्रव्यों के प्रति होने वाले मोह-राग-द्वेष का होता हैl" त्याग धर्म की यह परिभाषा किस अपेक्षा से है ?
निश्चय
व्यवहार
उभय
अनुभय
द्वेषरूप भाव अभ्यंतर परिग्रह है l
सही
गलत
व्रतियों को महाव्रतियों का भार उठाना था, पर उन्होंने तो अपना भार अव्रतियों पर डाल दिया l इस कारण महाव्रतियों को किसप्रकर की समस्या हो रही है?
उन्हें शयन करने नही मिल रहा
उन्हें अनुद्दिष्ट आहार मिलना बंद हो गया
उनका व्रत भंग हुआ
कोई समस्या नही आ रही है l
व्रतों में सर्वश्रेष्ठ कौन है, जिसका पालन करने वाले शीघ्र अतीन्द्रिय आनंद को प्राप्त करते हैं ?
अष्टान्हिका
अनशन
ब्रह्मचर्य
अहिंसाणुव्रत
ज्ञान ब्रह्मचर्य में बाधक हो सकता है?
नहीं।
हां, परोन्मुखी इन्द्रियज्ञान
ज्ञान समान न आन जगत में...
अध्यात्म में हो सकता है।
क्षमायाचना जो एकदम .................. चीज़ थी, आज बाजारू बन गयी है l
आसान
कठिन
व्यक्तिगत
सामाजिक
“सभी जीवों से मित्रता रखने की भावना मायाचार के त्यागरूप ............. प्राप्त करने की भावना हैl”
शिथिलता
प्रमाद
दुःख
सरलता
दसलक्षण धर्म पूजन में कवि का नाम कितनी बार आया है?
तीन
चार
दो
एक
"द्वादश विध सुखदाय क्यों न करें निज शक्ति सम" यह पंक्ति कौन से धर्म से संबंधित है?
उत्तम आकिंचन
उत्तम तप
उत्तम त्याग
उत्तम ब्रह्मचर्य
