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अपठित गद्यांश

Total questions: 2

Worksheet time: 14mins

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1-5.

अपठित गद्यांश- 1

 “साहित्य का आधार जीवन हैl इसी आधार पर साहित्य की दीवार खड़ी होती हैl उसकी अटारियां, मीनार और गुंबद बनते हैंl लेकिन बुनियाद मिट्टी के नीचे दबी पड़ी हैl जीवन परमात्मा की सृष्टि है, इसीलिए सुबोध है, सुगम है और मर्यादाओं से परिमित हैl जीवन परमात्मा को अपने कामों का जवाबदेह है या नहीं हमें मालूम नहीं, लेकिन साहित्य मनुष्य के सामने जवाबदेह हैl इसके लिए क़ानून है जिनसे वह इधर-उधर नहीं जा सकताl मनुष्य जीवनपर्यंत आनंद की खोज में लगा रहता हैl किसी को यह रत्न द्रव्य में मिलता है, किसी को भरे-पूरे परिवार में, किसी को लंबे-चौड़े भवन में, किसी को ऐश्वर्य मेंl लेकिन साहित्य का आनंद इस आनंद से ऊँचा हैl इसका आधार सुंदर और सत्य हैl वास्तव में सच्चा आनंद सुंदर और सत्य से मिलता है, उसी आनंद को दर्शाना वही आनंद उत्पन्न करना साहित्य का उद्देश्य हैl”

1.

1-साहित्य और जीवन में गहरा संबंध है क्योंकि-

 (कथन पढ़कर सही विकल्प का चयन कीजिए)

a)

(i)जीवन का मुख्य आधार साहित्य हैl

b)

 (ii)साहित्य जीवन की मजबूत दीवार हैl

c)

(iii)साहित्य का आधार मनुष्य है | l             

d)

(iv)सुंदर और सत्य से मिलने आनंद उत्पन्न करना साहित्य का उद्देश्य है  

2.

मनुष्य किसकी खोज में जीवन भर लगा रहता है?

a)

परमात्मा की

b)

आनंद की

c)

साहित्य की

d)

रत्न द्रव्य भरे-पूरे परिवार, लंबे-चौड़े भवन एवं ऐश्वर्य को पाने की

3.

साहित्य के आनंद का आधार हैl

a)

सुंदर और सत्य को पाना

b)

जीवन

c)

रत्न और ऐश्वर्य पाना 

d)

परमात्मा

4.

परिमिति का अर्थ है

a)

सीमित

b)

दबा हुआ

c)

विस्तृत

d)

फंसा हुआ 

5.

5- कथन (A) और कारण (R) को पढ़कर उपयुक्त विकल्प चुनिए- 

  कथन (A)- जीवन परमात्मा को अपने कामों के प्रति जवाबदेह है या नहीं पता नहीं लेकिन साहित्य मनुष्य के सामने जवाबदेह हैl

 कारण (R)- क्योंकि साहित्य कानून और नियमों से बाहर नहीं जा सकताl

a)

(क) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही हैl

b)

(ख) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत हैl

c)

(ग) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही सही हैl

d)

(घ) कथन (A) सही है, किन्तु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं हैl

6-10.

गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी भारतीयों को मानव-मात्र की समानता और स्वतंत्रता के प्रति जागरुक बनाने का प्रयत्न किया। इसी के साथ उन्होंने भारतीयों के नैतिक पक्ष को जगाने और सुसंस्कृत बनाने के प्रयत्न भी किए। गांधी जी ने ऐसा क्यों किया? इसलिए कि वे मानव-मानव के बीच काले-गोरे, या ऊँच-नीच का भेद ही मिटाना प्रयाप्त नहीं समझते थे, वरन उनके बीच एक मानवीय स्वभाविक स्नेह और हार्दिक सहयोग का संबंध भी स्थापित करना चाहते थे। 

      इसके बाद जब वे भारत आए, तब उन्होंने इस प्रयोग को एक बड़ा और व्यापक रुप दिया विदेशी शासन के अन्याय-अनीति के विरोध में उन्होंने जितना बड़ा सामूहिक प्रतिरोध संगठित किया, उसकी मिसाल संसार के इतिहास में अन्यत्र नहीं मिलती। पर इसमें उन्होंने सबसे बड़ा ध्यान इस बात का रखा कि इस प्रतिरोध में कहीं भी कटुता, प्रतिशोध की भावना अथवा कोई भी ऐसी अनैतिक बात न हो जिसके लिए विश्व-मंच पर भारत का माथा नीचा हो। ऐसा गांधी जी ने इसलिए किया क्योंकि वे मानते थे कि बंधुत्व, मैत्री, सदभावना , स्नेह-सौहार्द आदि गुण मानवता रूप टहनी के ऐसे पुष्प हैं जो सर्वदा सुगंधित रहते हैं। 

 

6.

1. अफ्रीका में प्रवासी भारतीयों के पीड़ित होने का क्या कारण था?

a)

क) निर्धनता धनिकता पर आधारित भेदभाव 

b)

ख) रंग-भेद और सामाजिक स्तर से संबंधित भेदभाव 

c)

ग) धार्मिक भिन्ता पर आश्रित भेदभाव

d)

घ) विदेशी होने से उत्पन्न मन-मुटाव 

7.

2. गांधी जी अफ्रीकावासियों और भारतीय प्रवासियों के मध्य क्या स्थापित करना चाहते थे?

a)

क) सहज प्रेम एवं सहयोग की भावना

b)

ख) पारिवारिक अपनत्व की भावना 

c)

ग) अहिंसा एवं सत्य के प्रति लगाव 

d)

घ) विश्वबंधुत्व की भावना 

 

8.

3. भारत में गांधीजी का विदेशी शासन का प्रतिरोध किस पर आधारित था?

a)

क) संगठन की भावना पर

b)

ख) नैतिक मान्यताओं पर 

c)

ग) राष्ट्रीयता के विचारों पर 

d)

घ) शांति की सदभावना पर 

9.

4. बंधुत्व, मैत्री आदि गुणों की पुष्पों के साथ तुलना आधारित है

a)

क) उनकी सुंदरता पर 

b)

ख) उनकी कोमलता पर 

c)

ग) उनके अपनत्व पर 

d)

घ) उनके कायिक प्रभाव पर 

10.

5. गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?

a)

क) अफ्रीका में गांधी जी 

b)

ख) प्रवासी भारतीय और गांधी जी 

c)

ग) गांधी जी की नैतिकता 

d)

घ) गांधी जी और विदेशी शासन