WorksheetsHindi comprehension quiz 4
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परोपकार का शाब्दिक अर्थ है – दूसरों का भला करना। दूसरों की भलाई के बारे में सोचना और उनके लिए काम करना महान गुण है। अगर सभी अपने गुणों को मुट्ठी में कैद कर लें, तो यह जगत् चक्र एक क्षण भी नहीं टिकता। पेड़ अपने लिए नहीं दूसरों के लिए फल देते हैं। यहां तक कि नदियां भी अपना पानी खुद नहीं पीतीं। परोपकारी लोग दूसरों के कल्याण के लिए भी धन संचय करते हैं।
मानव जीवन भी एक दूसरे के सहयोग पर निर्भर है। दान का सुख लौकिक नहीं, अलौकिक है। जब कोई व्यक्ति निस्वार्थ भाव से किसी घायल व्यक्ति की सेवा करता है, तो उस समय वह मनुष्य नहीं होता। अपनों के लिए कुछ करना अलग बात है। लेकिन खुद के अलावा सबके लिए काम करना ही सच्चा दान है। भारत में परोपकारी महापुरुषों की कोई कमी नहीं है।
दधीचि जैसे ऋषि थे जिन्होंने अपने शरीर की हड्डियों को अपनी जाति के लिए दान कर दिया था। बुद्ध, महावीर, अशोक, गांधी और अरबिंदो जैसे महापुरुषों का जीवन दान के कारण ही महान हुआ है। एक परोपकारी व्यक्ति हमेशा खुश, शुद्ध और हंसमुख रहता है। वह पूजा के योग्य बन जाता है।
(क) परोपकार का क्या अर्थ है?
पर + उपकार
दूसरों का भला
दूसरों की सहायता
दूसरों के बारे में सोचना
(ख) परोपकार करने वाले प्राकृतिक उपादान कौन-से बताए गए हैं?
) वृक्ष
नदियाँ
परोपकारी मनुष्य
उपरोक्त सभी
सच्चा परोपकार क्या है?
महात्मा बुद्ध
महावीर
अशोक, गाँधी
उपरोक्त सभी
परोपकारी व्यक्ति कैसे रहता है?
प्रसन्न
निर्मल
हँसमुख
उपरोक्त सभी
