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WorksheetsMangal Pragya 1 Devdarshan, Dincharya
Total questions: 39
Worksheet time: 20mins
मंदिर जाते वक़्त बहार क्या छोड़ना चाहिए ?
चमड़े की वस्तुएं
ऊनि वस्तुएं
सॉक्स
सांसारिक विचार
सभी
भगवान जी के वेदी के सामने जाकर क्या नहीं बोलना ?
ॐ जय जय जय नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु
णमोकार मंत्र
चत्तरी पाठ
निः सहि
कितने अंगों से नमस्कार करना चाहिए ?
10
6
8
4
दर्शन के बाद तुरंत घर जाना चाहिए |
सही
गलत
स्वाध्याय के बाद क्या मनन करना चाहिए ?
मैं कौन हूँ |
भगवान कौन हैं |
मैं स्वयं भगवान कैसे बन सकता हूँ |
सभी
देव दर्शन से क्या होता है ?
आत्मा में शांति प्राप्त होती है |
परिणामों में निर्मलता आती है |
दोनों
सुबह जल्दी उठने के कौनसे फायदे हैं ?
वातावरण शुद्ध और शांत होता है |
एकाग्रता होती है |
दैनिक कार्य के लिए पर्याप्त समय मिलता है |
सभी
क्या मन गन्दा हो सकता है ?
हाँ
नहीं
आत्मा परमात्मा के चिंतन से मन पवित्र होता है |
हाँ
नहीं
भोजन कैसे नहीं करना चाहिए ?
मौन से
शांति से
एक स्थान पर बैठकर
सूर्यास्त से पहले
टीवी देखकर
देव दर्शन शब्द में दर्शन का अर्थ ?
देखना
निहारना
निरखना
सभी
तीन प्रदक्षिणा क्यों करते है?
भगवान को सब ओर से निहारने के लिए
रत्नत्रय के प्राप्ति के लिए
दोनो
कायोत्सर्ग अर्थात क्या करना ?
शरीर की ममता छोड़ना
नौ बार णमोकार मंत्र पढ़ना
दोनो
Mobile Phone मंदिर में ले जाना चाहिए |
हाँ
कभी नहीं
विधान के दिन
sunday को
निःसहि कब बोलना चाहिए ?
मंदिर से बहार निकलते वक़्त
मंदिर में प्रवेश करते वक़्त
मंदिर में स्वाध्याय करते में
द्रव्य चढाने से पहले
निःसहि का क्या अर्थ है ?
सर्व सांसारिक कार्यों का निषेध
संसार का निषेध
सभी धार्मिक एवं सांसारिक कार्यों का निषेध
मंदिर भी एक समवसरण है |
हाँ
नहीं
मंदिर में दर्शन करने से क्या लाभ है ?
आत्मा में शांति प्राप्त होती है |
परिणामों में निर्मलता आती है |
संसार में सुख मिलता है |
आत्मा की चर्चा होती है |
देवालय एक _____ है |
भिक्षालय
औषधालय
शिक्षालय
भगवान से 'हम भगवान बने' ऐसा तो मांग सकते हैं |
नहीं
हाँ
ब्रह्ममुहूर्त कैसा काल है ?
योगियों के उठने का काल |
साधना का उत्कृष्ट समय |
आत्मा का चिंतन का काल |
परमात्मा के चिंतन का काल |
सुबह सुबह क्या चिंतन करना चाहिए ?
शरीर के प्रति ममत्व कैसे छूटे |
संसार के प्रति ममत्व कैसे छूटे |
भोगों के प्रति ममत्व कैसे बढे |
भोगों के प्रति ममत्व कैसे छूटे |
कुसंगति से बचना चाहिए |
कभी कभी
हमेशा
आलसी व्यक्ति किसका पात्र है ?
प्रशंसा का
घ्रणा का
अनुसरण का
वाह वाही का
सवेरे उठते ही हमे सर्वप्रथम क्या करना चाहिए ?
णमोकार मन्त्र बोलना चाहिए
मोबाइल में स्टेटस चेक करना चाहिए
नेट नही आ रहा हो तो बाहर छत पर जाकर चेक करना चाहिए
जिनका भी जन्म दिवस हो उन्हें बधाई देना चाहिए
सवेरे उठते ही कितनी बार णमोकार मन्त्र बोलना चाहिए ?
हम प्रत्येक कार्य मन,वचन,काय के माध्यम से कृत,कारित,अनुमोदना पूर्वक करते है इन नो के प्रतिक के रूप में कम से कम नो बार अपने आदर्शो का स्मरण करना चाहिए
8 बार बोलना चाहिए
7 बार बोलना चाहिए
इनमे से कोई नही
नो बार णमोकार मन्त्र बोलने के बाद हमे आत्मा परमात्मा का चिंतन क्यों करना चाहिए ?
हम परमात्मा के जैसा बनना चाहते है इसलिए हमे परमात्मा और आत्मा का चिंतन करना चाहिए
आत्मा परमात्मा का चिंतन करने से क्या होने वाला है
शरीर है वही तो मै हू फिर ये आत्मा परमात्मा कहा से आ गए
परमात्मा दिखाई तो देते ही नही फिर किसका चिंतन करू
मन की शुद्धि केसे होती है ?
मन में राग द्वेष आदि विकारी भाव उत्पन्न नही होना ही मन की शुद्धि है
मन में मोह राग द्वेष आदि विकारी भाव उत्पन्न नही होना ही मन की शुद्धि है
मन में मोह राग आदि विकारी भाव उत्पन्न नही होना ही मन की शुद्धि है
मन में राग द्वेष आदि विकारी भाव उत्पन्न नही होना ही मन की शुद्धि है
मन शांत रखकर क्यों भोजन करना चाहिए ?
हम जेसे मन से भोजन करेगे शरीर पर वेसा प्रभाव पड़ेगा
सात्विक भोजन को भी क्रोधावेश से करने पर शरीर में विष बनने लग जाता है
शांत मन से किया गया रुखा सुखा भोजन भी शरीर को पूर्ण संतुष्टि देता है
उपरोक्त सभी
रात्री भोजन क्यों नही करना चाहिए ?
रात्री में बर्तन साफ नही होने से जीवराशी उत्पन्न हो जाती है जिस कारन जीव हिंसा का दोष लगता है
रात में लाइट जलाने से जीव हिंसा ,बिजली का बिल अधिक आना , आरम्भ परिग्रह का अधिक होना एवं महिलाओ आराम नही मिल पाता
जैन धार्मिक संस्कृति नष्ट हो जाती है
शरीर के प्रति तीव्र आसक्ति बिना यह घोर पाप नही हो पाता है जिस कारण पर भव में दुर्गुती होती है
उपरोक्त सभी
भगवान् को चारों ओर से निहारने के लिए मंदिर जी में क्या किया जाता है ?
प्रदक्षिणा दी जाती है
पूजन की जाती है
भक्ति की जाती है
नृत्य किया जाता
गंधोदक को हमें किन दो उँगलियों से धारण करना चाहिए ?
तर्जनी एवं मध्यमा
मध्यमा एवं अनामिका
तर्जनी एवं अंगुष्ठ
मध्यमा एवं कनिष्ठा
कायोत्सर्ग शब्द का शाब्दिक अर्थ है ?
शरीर से राग करना
प्रदक्षिणा देना
णमोकार मंत्र पढना
शरीर से ममत्व छोड़ना
तीन प्रदक्षिणा करने के अनेक कारणों में से एक कारण नहीं है ?
तीन संख्या बहुवचन सूचक होने से अनेक बार लगाना होता है |
त्रियोग पूर्वक परिक्रमा लगाना
तीन बार लगाने से अधिक पुण्य मिलता हैं
समरंभ,समारंभ,आरम्भ रूप सम्पूर्ण विषय-कषायमय पाप परिणामों के त्याग की सूचक
कृत,कारित,अनुमोदना की सूचक
हमें प्रतिदिन देवदर्शन/ भगवान् के दर्शन क्यों करना चाहिए ?
परीक्षा में प्रथम आने के लिए
स्वर्ग की प्राप्ति के लिए
क्योंकि देवदर्शन से आत्मा में शांति प्रगट होती है |
देवदर्शन से अहिंसादि घट जाते हैं |
धरणेन्द्र पद्मावती आदि अन्य देवी-देवता पूज्य नहीं हैं क्योंकि वे
मोह,राग,द्वेष जन्म,मरण आदि सभी दोषों से सहित हैं |
विषय-कषायों में आसक्त हैं |
साज-श्रृंगार, वस्त्राभूषण, अस्त्र शस्त्र आदि आरम्भ परिग्रह सहित हैं |
हम जैसे अल्पज्ञानी एवं दुखी हैं
उपर्युक्त सभी
निम्न में से गलत कथन है -
जिनमन्दिर बिना भोजन किए जाना चाहिए
जिनमन्दिर शुद्ध साफ़ वस्त्र पहिनकर जाना चाहिए
जिनमन्दिर धोती-दुपट्टा पहनकर जाना चाहिए
जिनमन्दिर चावल/ अष्ट द्रव्य सामग्री लेकर जाना चाहिए
जिनमन्दिर अप्रसन्न होकर जाना चाहिए
साष्टांग नमस्कार में आठ अंग कौन कौन से हैं ?
दो कान , दो हाथ, नितम्ब(पीछे का भाग) , पीठ, ह्रदय और शिर
दो पैर, दो हाथ, नितम्ब(पीछे का भाग) , पीठ, ह्रदय और सिर
दो पैर, दो हाथ, नितम्ब(पीछे का भाग) , कमर , ह्रदय और शिर
दो पैर, दो हाथ, नितम्ब(पीछे का भाग) , पीठ, पेट और शिर
गंधोदक को शरीर किस सर्वोत्कृष्ट एवं पवित्र अंग पर लगाना चाहिए ?
कान पर
गले पर
मस्तिष्क पर
नाभि पर
