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कविता और साहस पर प्रश्न

Total questions: 19

Worksheet time: 55mins

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Class
Date
1.

क) कव ना वक से या कह रहा है?

4 lines
2.

ख) समु ने किस कार का प धारण कया है?

4 lines
3.

ग)कवनेमानवको‘मटकापतु लायकहाहै?

4 lines
4.

घ) सागर पार करने के लिए या आव यक है?

4 lines
5.

क)अधं ड़म साहसकोकैसेतौलाजासकताहै?

4 lines
6.

कव ने मानव किस विशेषता की ओर इशारा किया है?

4 lines
7.

इस कविता में किसे-या रचना दी गई है?

4 lines
8.

कठिन परिस्थितियों का सामना करने से क्या लाभ होते हैं?

4 lines
9.

कठन परि थतय का सामना करने से या लाभ होते ह?

4 lines
10.

साहस और कठिन परिस्थितियाँ व्यक्ति को साहसी और दृढ़ बनाती हैं। वह आसानी से हार नहीं मानता और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करता है।

4 lines
11.

कविता का यह संदेश है कि संघर्ष और मुश्किल हमें और भी अधिक मजबूत और आत्मविश्वासी बनाती है।

4 lines
12.

कविता हमें सिखाती है कि हार मानना या समस्याओं से भागना नहीं चाहिए, बल्कि डटकर उनका सामना करना चाहिए।

4 lines
13.

जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमारे इरादे मज़बूत होने चाहिए। समुद्र में नाव चलाते समय जिस तरह नाविक थपेड़ों से बिना डरे आगे बढ़ता है, उसी तरह हमें बाधाओं से न डरते हुए अपनी मंजिल तक आगे बढ़ते रहना चाहिए।

4 lines
14.

कव कहते हैं कि माँझी अपनी पतवार तफ़ू़ान की ओर घुमा दो, लहर के गरजने से पीछे नहीं मुड़ना है। लहर को भी साहस जवाब दो और बिना डरे आगे बढ़ते जाओ। समझो कि यह हारे साहस का पराकाष्ठा है और इससे पार भी उतरना है।

4 lines
15.

आगेबढ़तेजाओ।समझो कयहतु हारेसाहसक पर है और इसम से पार भी उतरनाहै। इंसानको कभी-कभी अपने जीवनमचनु ौतय कासामनाकरनापड़ताहै। जीवनक राहम बाधाएँ आएगी पर हम इन सबका सामना करके सफलता हाँसल करनी है। यह असीम नज..................कभी न मानी हार।

4 lines
16.

मनु य जानता है क उसक शि त सी मत है, सागर क असीम शि त के सामने उसक शि त का कोई मोल नहं। समु क वकरालता को भी वह पहचानता है फर भी साहस करने से नहं कता। इंसान अपने सामने आई मसु ीबत के सामने कभी झकु ना नहं चाहता, डँटकर मक़ु ाबला करता है, कभी हार नहं मानता।

4 lines
17.

सागर अपनी (a)   सात सागर पार।

18.

इस पिं त का भावाथ यह है क सागर अपनी वशालता, गहराई और मता के लए जाना जाता है। यह असीमत सभं ावनाओं और साम य का ती क है। क वता म इस पिं त का आशय यह है क यि त या सागर अपनी सीमाओं से बधं ा नहं होता, बि क अपनी शि त और मता के बल पर कसी भी चनु ौती या बाधा को पार कर सकता है।

4 lines
19.

यह पिं त आ म व वास, साहस और ढ़ सकं प क भावना को य त करती है, जो यह दशा ति है क अगर इंसान अपनी मता को पहचाने और उसका परू ा उपयोग करे, तो वह जीवन क कसी भी चनु ौती को पार कर सकता है,

4 lines