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Worksheetsअपठित गद्यांश -5
Total questions: 16
Worksheet time: 15mins
अपठित गद्यांश का क्या अर्थ है ?
पढ़ा हुआ गद्यांश
वह गद्यांश जो पहले न पढ़ा हो
स्वयं लिखा हुआ गद्यांश
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
प्रश्न -1 शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में किसका महत्त्व है?
थकान
व्यायाम
पसीना
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
शरीर की उपेक्षा करने वाला व्यक्ति अपने लिए -------दरवाजा खोलता है।
खुशी का
धन का
रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को --------- कर दिया है।
व्यस्त
खाली
उदास
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, ----------- तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है।
अशुद्ध जल
ठंडा जल
स्वच्छ जल
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
व्यायाम करने वाले व्यक्ति में ---------- आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
अद्भुत भक्ति
अद्भुत शक्ति
अद्भुत मति
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
गद्यांश में 'जीवन' का विलोम शब्द कौन सा है?
मरण
मृत्यु
मौत
शरीर को स्वस्थ या निरोग रखने में व्यायाम का कितना महत्त्व है, इस पर कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। आज की भाग-दौड़ से भरी जिंदगी ने मनुष्य को इतना व्यस्त कर दिया है कि वह यह भी भूल गया है कि इस सारी भाग-दौड़ का वह तभी तक हिस्सेदार है जब तक कि उसका शरीर भी स्वस्थ है। जो व्यक्ति अपने शरीर की उपेक्षा करता है वह अपने लिए रोग, बुढ़ापे तथा मृत्यु का दरवाजा खोलता है। वैसे तो अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, स्वच्छ जल तथा शुद्ध वायु संयम तथा नियमित जीवन सभी कुछ आवश्यक है किंतु इन सबमें व्यायाम करने वाले व्यक्ति में कुछ ऐसी अद्भुत शक्ति आ जाती है कि अपने सारे शरीर पर उसका अधिकार हो जाता है।
गद्यांश में 'निरोग' का विलोम शब्द क्या है?
रोग
स्वस्थ
शुद्ध
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
चिड़ा पेड़ पर क्या बना के रहता था ?
खेत
घोंसला
कुछ नही
दोनों
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
चिड़ा दाना- पानी के चक्कर में कहाँ पहुँच गया ?
बगीचे में
खेत में
घर में
कहीं नही
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
चिड़ा दाना- पानी के चक्कर में कहाँ पहुँच गया ?
बगीचे में
खेत में
घर में
कहीं नही
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
शाम को कौन पेड़ के पास आया ?
खरगोश
चूहा
कबूतर
कोई नही
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
जब खरगोश ने घोंसले में देखा तो घोंसला कैसा था ?
भरा था
खाली था
अंडे थे
वहाँ घोंसला था
एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मज़े से रहता था। एक दिन वह दाना - पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुँच गया। वहाँ खाने- पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहाँ चिड़े का घोंसला था। पेड़ ज़रा भी ऊँचा नहीं था। इसलिए खरगोश ने उस घोंसलें में झाँक कर देखा तो पता चला कि यह घोंसला खाली पड़ा है। घोंसला अच्छा- खासा बड़ा था इतना कि उसमें खरगोश आराम से रह सकता था। उसे यह बना- बनाया घोंसला पसन्द आ गया और उसने वहीं रहने का फैसला कर लिया।
खरगोश कहाँ आराम से रह सकता था ?
घर में
घोंसले में
छत पर
सब जगह
कुछ दिनों बाद वह चिड़ा खा- खाकर मोटा ताज़ा बन कर अपने घोंसलें की याद आने पर वापस लौटा। उसने देखा कि घोंसलें में खरगोश आराम से बैठा हुआ है। उसे बड़ा गुस्सा आया, उसने खरगोश से कहा, "चोर कहीं का, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गये हो? चलो निकलो मेरे घर से, जरा भी शर्म नहीं आई मेरे घर में रहते हुए?"
चिड़ा खा- खाकर कैसा हो गया ?
पतला
मोटा
बीमार
सवस्थ
कुछ दिनों बाद वह चिड़ा खा- खाकर मोटा ताज़ा बन कर अपने घोंसलें की याद आने पर वापस लौटा। उसने देखा कि घोंसलें में खरगोश आराम से बैठा हुआ है। उसे बड़ा गुस्सा आया, उसने खरगोश से कहा, "चोर कहीं का, मैं नहीं था तो मेरे घर में घुस गये हो? चलो निकलो मेरे घर से, जरा भी शर्म नहीं आई मेरे घर में रहते हुए?"
चिड़े ने क्या देखा ?
कौवा आराम से घोंसले में है
चूहा आराम से घोंसले में है
खरगोश आराम से घोंसले में है
घोंसले में कोई नही है
