Wayground logo

Free Printable Worksheets

Font size

S
M
L
XL
Worksheets

सार लेखन

Total questions: 3

Worksheet time: 2mins

Name
Class
Date
1.

सार लेखन और भाव - पल्ल्वन में क्या अंतर होता है ?

a)

कही गई बात में से अनावश्यक उदाहरण , उद्धरण , व्याख्या भाग को निकाल कर तथ्य को पूर्णता की साथ प्रस्तुत करना सार लेखन है और किसी सूक्ति या व्याक्यांश को स्पष्ट रूप से विस्तार से प्रस्तुत करना। कथन को उदहारण और उद्धरण से पुष्ट करना भाव पल्लवन कहलाता है।

b)

कही गई बात में से अनावश्यक उदाहरण , उद्धरण , व्याख्या भाग को निकाल कर तथ्य को पूर्णता की साथ प्रस्तुत करना भाव पल्लवन है और किसी सूक्ति या व्याक्यांश को स्पष्ट रूप से विस्तार से प्रस्तुत करना। कथन को उदहारण और उद्धरण से पुष्ट करना भाव सार लेखन कहलाता है।

2.

लोगों ने धर्म को धोखे की दुकान बना रखा है। वे उसकी आड़ में स्वार्थ सिद्ध करते हैं। बात यह है कि लोग धर्म को छोड़कर संप्रदाय के जाल में फंसे हैं। संप्रदाय बाहरी कृत्यों पर ज़ोर देते हैं। वे चिह्नों को अपना कर धर्म के सारतत्व को मसल देते है। धर्म मनुष्य को आत्म- साक्षात्कार कराता है , उसके हृदय के किवाड़ों को खोलता है। उसकी आत्मा को विशाल , मन को उदार तथा चरित्र को उन्नत बनाता है। संप्रदाय संकीर्णता सिखाते हैं। ये हमें जाट - पात , रूप -रंग तथा ऊंच -नीच के भेदभावों से ऊपर नहीं उठने देते। प्रश्न - इस अनुच्छेद का मूलभाव क्या है ?

a)

संप्रदाय धर्म से अच्छा है।

b)

धर्म और संप्रदाय दोनों एक हैं।

c)

धर्म और संप्रदाय की व्याख्या करना।

3.

लोगों ने धर्म को धोखे की दुकान बना रखा है। वे उसकी आड़ में स्वार्थ सिद्ध करते हैं। बात यह है कि लोग धर्म को छोड़कर संप्रदाय के जाल में फंसे हैं। संप्रदाय बाहरी कृत्यों पर ज़ोर देते हैं। वे चिह्नों को अपना कर धर्म के सारतत्व को मसल देते है। धर्म मनुष्य को आत्म- साक्षात्कार कराता है , उसके हृदय के किवाड़ों को खोलता है। उसकी आत्मा को विशाल , मन को उदार तथा चरित्र को उन्नत बनाता है। संप्रदाय संकीर्णता सिखाते हैं। ये हमें जात - पात , रूप -रंग तथा ऊंच -नीच के भेदभावों से ऊपर नहीं उठने देते।

प्रश्न - दिए गए विकल्पों में से किस वाक्य में व्याख्या है ?

a)

लोगों ने धर्म को धोखे की दुकान बना रखा है।

b)

संप्रदाय बाहरी कृत्यों पर जोर देते हैं और धर्म आत्म -साक्षात्कार कराते हैं । बात यह है कि लोग धर्म को छोड़कर संप्रदाय के जाल में फँस रहे हैं।

c)

वे धर्म के सार - तत्व को मसल देते हैं।