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WorksheetsNamahatta SB Quiz
Total questions: 28
Worksheet time: 23mins
कोई भक्त नियमित जप करता है, परन्तु संग में भगवान् के विषय में चर्चा से बचता है।
इस श्लोक के अनुसार उसमें कौन-सा पक्ष अभी अपूर्ण है?
A. मच्चित्ता
B. मद्गतप्राणा
C. बोधयन्तः परस्परम्
D. तुष्यन्ति च रमन्ति च
यदि किसी की सेवा तो निरन्तर चल रही है, पर मन बार-बार इन्द्रिय-विषयों में चला जाता है,
तो वह किस अवस्था की ओर संकेत करता है?
A. पूर्ण शुद्ध भक्ति
B. प्रारम्भिक अवस्था की भक्ति
C. ईश्वर-प्रेम की अवस्था
D. भक्ति से पतन
नामहट्ट या ग्रुप में यदि केवल सूचनाएँ चलती हैं और कृष्ण-कथा नहीं,
तो BG 10.9 के अनुसार किस तत्व की सबसे अधिक कमी है?
A. सेवा
B. अनुशासन
C. कथयन्तश्च मां नित्यम्
D. नियम
रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए
भक्ति-लता का सिंचन _________ और _________ से होता है।
(a)
शुद्ध भक्तों के लक्षण कौन-कौन से हैं?
सही विकल्प चुनिए एक से अधिक उत्तर हो सकतें है
भगवान् में रमा हुआ मन
भगवान् के विषय में चर्चा
आपसी उपदेश और संग
भौतिक इच्छाओं की पूर्ति
“कथयन्तश्च मां नित्यम्” को आप अपने नामहट्ट या ग्रुप जीवन में कैसे लागू कर सकते हैं?
तात्पर्य के अनुसार भक्ति में आनंद और संसारिक आनंद में क्या मूल अंतर है?
यदि किसी भक्त को भक्ति में आनंद नहीं आ रहा, तो वह अपने साधना-जीवन की कैसे समीक्षा करे?
“कृष्ण आपके लिए क्या हैं?”
भगवान के छह ऐश्वर्य कौन-कौन से हैं?
A) बल, धन, रूप, यश, ज्ञान, वैराग्य
B) तप, त्याग, सेवा, ज्ञान, शांति, प्रेम
C) शक्ति, करुणा, क्षमा, दया, प्रेम, सेवा
D) यज्ञ, दान, तप, ज्ञान, भक्ति, वैराग्य
श्रीमद्भागवतम् 3.4.31श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण यह क्यों कहते हैं कि उद्धव उनसे किसी भी प्रकार से न्यून नहीं हैं?
➡️ संकेत: “गुणैः नार्दितः” शब्द पर ध्यान दीजिए।
A. क्योंकि उद्धव बहुत बुद्धिमान थे
B. क्योंकि उद्धव ब्राह्मण कुल में जन्मे थे
C. क्योंकि उद्धव माया के गुणों से प्रभावित नहीं थे
D. क्योंकि उद्धव ने बहुत तपस्या की थी
एक व्यक्ति बाहर से भौतिक परिस्थितियों में रहते हुए भी मुक्त कैसे हो सकता है?
➡️ संकेत: “कर्मणा मनसा गिरा” — तीनों स्तरों पर सोचिए।
A. यदि उसके पास ज्ञान अधिक हो
B. यदि वह नियमों का पालन करे
C. यदि उसकी चेतना पूर्णतः कृष्ण-सेवा में हो
D. यदि वह समाज से अलग हो जाए
उद्धव भगवान से इसलिए समान कहे गए क्योंकि वे ब्राह्मण कुल में जन्मे थे।
☐ सही
☐ गलत
“शब्दयोनि” का अर्थ सबसे उपयुक्त रूप से क्या बताता है?
A) गुरु का रूप
B) वेदों का स्रोत
C) भगवान का अवतार
D) परमात्मा की साधना
इस श्लोक के अनुसार भगवान के प्रकट होने और उनकी लीलाओं को समझना किसके लिए संभव है?
🧠 सोचने का बिंदु: ज्ञान और भक्ति में मूल अंतर क्या है?
A) जो बहुत पढ़ा-लिखा हो
B) जो योग-साधना करता हो
C) जो भक्त हो
D) जो शोध करता हो
SB 3.4.34
श्लोक में “पशूनाम्” शब्द का प्रयोग किनके लिए किया गया है?
🧠 सोच: क्या केवल शरीर से मनुष्य होना पर्याप्त है?
A) जानवरों के लिए
B) साधारण मनुष्यों के लिए
C) ईर्ष्यालु और भक्ति-विरोधी व्यक्तियों के लिए
D) अज्ञानी लोगों के लिए
एक ही भगवान की लीला
– भक्त को प्रेरणा देती है
– ज्ञानी को उलझन देती है
– ईर्ष्यालु को विक्षोभ देती है
👉 प्रश्न:
क्या समस्या भगवान की लीला में है या देखने वाले की चेतना में?
स्पष्ट कीजिए।
मैं भगवान की कथा क्यों सुनता हूँ?
👉 प्रश्न:
वास्तविक उत्तर क्या है?
A) आनंद के लिए
B) ज्ञान दिखाने के लिए
C) तर्क करने के लिए
D) हृदय परिवर्तन के लिए
“भगवान की लीला सुनकर यदि मेरा हृदय न बदले,
तो क्या दोष लीला में है — या मुझमें?”
मुझमें
भगवान् में
लीला में
“धीराणां धैर्य-वर्धनम्” — भगवान की लीलाएँ धीर पुरुषों का धैर्य बढ़ाती हैं, सुख क्यों नहीं?
🤔 सोचने का बिंदु:
क्या भगवान हमें अनुभूति देना चाहते हैं या स्थिरता?
A) क्योंकि भगवान भक्तों को सुख देना नहीं चाहते
B) क्योंकि धीर पुरुष सुख की अपेक्षा नहीं रखते
C) क्योंकि धैर्य स्थायी आध्यात्मिक गुण है, जबकि सुख क्षणिक अनुभूति है
D) क्योंकि धीर पुरुष सुख का अनुभव नहीं करते
निम्न में से कौन-सा कथन धैर्य और सुख के अंतर को सही रूप से दर्शाता है?
🧠 गहन चिंतन:
यदि परिस्थितियाँ बदल जाएँ तो क्या आपका सुख टिकेगा?
A) धैर्य कष्ट से आता है, सुख सुविधा से
B) धैर्य परिस्थिति से स्वतंत्र होता है, सुख परिस्थिति पर निर्भर होता है
C) धैर्य केवल भक्तों में होता है, सुख केवल भोगियों में
D) धैर्य मन का गुण है, सुख शरीर का
निम्न में से कौन-सा धैर्य का गुण नहीं है?
🧠 चिंतन:
जो टूट जाए, क्या वह धैर्य कहलाएगा?
A) संकट में स्थिर रहना
B) भगवान पर भरोसा बनाए रखना
C) परिस्थिति बदलते ही टूट जाना
D) समय की परीक्षा सहना
एक भक्त कठिन परिस्थिति में भी भगवान की लीला सुनकर स्थिर रहता है।
यह किस गुण का लक्षण है?
A) भावुकता
B) सुखानुभूति
C) धैर्य
D) अज्ञान
भगवद् गीता 10.10 के अनुसार
बुद्धियोग वह विधि है जिससे मनुष्य (a) से मुक्त होना चाहता है।
कर्मयोगी, ज्ञानयोगी और भक्तियोगी में मूल अंतर किस बात का है?
🧠 सोच:
तीनों का लक्ष्य कृष्ण होते हुए भी मार्ग अलग क्यों हो जाता है?
A) साधना की कठिनाई
B) लक्ष्य
C) दृष्टिकोण और आश्रय
D) बाहरी आचरण
यदि नामहट्ट में सेवा करते समय भ्रम हो, तो
बुद्धियोग के अनुसार पहला कदम क्या होना चाहिए?
A) सेवा छोड़ देना
B) दूसरों को दोष देना
C) प्रार्थना और मार्गदर्शन लेना
D) चुप रहना
मैं सेवा करता हूँ क्योंकि
(मेरा ईमानदार उत्तर कौन-सा है ?)
A) कर्तव्य है
B) फल मिलेगा
C) समाज देख रहा है
D) कृष्ण से प्रेम है
पराशर मुनि कौन थे?
A) भगवान श्रीकृष्ण के सखा
B) वेदव्यास जी के पिता और महान वैदिक ऋषि
C) पांडवों के गुरु
D) जनक महाराज के राजपुरोहित
मैत्रेय ऋषि कौन थे?
A) पराशर मुनि के शिष्य
B) कौरवों के मंत्री
C) द्वारका के राजा
D) ब्रह्मा जी के मानस पुत्र
एक गृहस्थ भक्त वास्तव में “कमल के फूल” के समान कब कहलाता है?
A) जब वह केवल अपने लिए साधना करता है
B) जब वह गृहस्थ जीवन को त्याग देता है
जब वह पत्नी, पुत्र और परिवार को भी भक्ति में लगाता है
D) जब वह सांसारिक जिम्मेदारियों से भाग जाता है
